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दाल बनाते वक्त ये 7 गलतियां उसके प्रोटीन को कर देती हैं कम, आज से ही कर दें बंद

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Source :- LIVE HINDUSTAN

दाल वेजिटेरियन लोगों के लिए प्रोटीन का सीधा, सरल और सस्ता  सोर्स है जो हर घर में होता है। लेकिन दाल को बनाते वक्त काफी सारे घरों में कुछ गलतियां की जाती है जिसकी वजह से दाल का पोषण और प्रोटीन दोनों कम हो जाता है, जानें कौन सी गलतियों को नहीं करना चाहिए।

उड़द, चना, मूंग, मसूर, अरहर, दालों की लंबी लिस्ट है, जो लगभग हर घर की रसोई में बनती है। नमक, हल्दी के साथ मिलाकर पकाई गई दाल, रोटी-चावल दोनों के साथ खाई जाती है। इन दालों की न्यूट्रिशनल वैल्यू भी होती है, वहीं प्रोटीन की मात्रा अच्छी खासी होती है वेजिटेरियन लोगों के लिए ये एक हेल्दी फूड है। लेकिन काफी सारे लोग इन दाल को पकाने में छोटी-छोटी मिस्टेक कर देते हैं। जिसकी वजह से ना केवल इनकी प्रोटीन वैल्यू कम हो जाती है बल्कि बाकी न्यूट्रिशन भी कम हो जाते हैं। तो जब भी दाल को पकाना हो तो इन 7 गलतियों को भूलकर भी ना पकें, नहीं तो पूरी तरह से दाल के फायदे शरीर को नहीं मिलेंगे।

दाल को पकाने से पहले ना भिगोने की गलती

काफी सारे लोग दाल को भिगोने वाले प्रोसेस को छोड़ देते हैं। रोजमर्रा के काम में जल्दीबाजी में अक्सर लोग डायरेक्ट दाल धोकर गैस पर चढ़ा देते हैं लेकिन ये गलत है। अगर दाल के पूरे न्यूट्रिशन चाहिए तो दाल को कम से कम आधा घंटा तो भिगोएं। दाल में फाइटेट्स होते हैं जो न्यूट्रिशन को बांधकर रखते हैं और शरीर में अब्जॉर्ब होने में मुश्किल पैदा करते हैं। जब आप दालों को कुछ देर के लिए भिगोते हैं तो ये फाइटेट्स टूटते हैं और ना केवल दाल जल्दी पकती है बल्कि दाल का प्रोटीन भी शरीर में आसानी से अब्जॉर्ब हो पाता है।

दाल को ज्यादा पका देना

कुछ लोग दाल को गलाने के चक्कर में ज्यादा पका देते हैं। दाल को सॉफ्ट करने और पकाने के लिए उसे ज्यादातर देर तक कुक करने से न्यूट्रिशनल वैल्यू कम हो जाती है। प्रोटीन 9 अमीनो एसिड का स्ट्रक्चर होता है। ज्यादा देर तक हाई हीट पर रहने की वजह से ये अमीनो एसिड टूट जाते हैं और दाल काभी ज्यादा सॉफ्ट हो जाती है। काफी सारी दाल प्रेशर कुकर में मात्र कुछ सीटियों में ही पक जाती हैं और इन्हें ज्यादा पकाने की जरूरत नहीं होती है।

दाल में बेकिंग सोडा डालना

काफी सारे घरों में दाल पकाने के लिए चुटकीभर बेकिंग सोडा डाल देते हैं। लेकिन ये ट्रिक दाल को भले ही जल्दी से पका देता हो लेकिन बेकिंग सोडा पीएच लेवल को बदल देता है, जिससे दाल का पानी एल्केलाइन हो जाता है और दाल के विटामिन और मिनरल्स प्रभावित होते हैं। अगर आप हर दिन दाल पकाने के लिए बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करते हैं तो ना केवल नेचुरल फ्लेवर बदलता है बल्कि न्यूट्रिशन भी दाल के कम हो जाते हैं।

दाल का पानी फेंक देना

दाल पकाने के बाद बचे हुए पानी को काफी सारे लोग फेंक देते हैं। जबकि दाल पकने के प्रोसेस में कुछ न्यूट्रिशन, वाटर सॉल्यूएबल विटामिन पानी में चले जाते हैं और ये दाल का पानी विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होता है। जब आप इस पानी को फेंक देते हैं तो दाल का एक पोषण से भरा पार्ट चला जाता है। दाल के इस पानी में टेस्ट और पोषण दोनों होता है, इसलिए इसे फेंकने की गलती नहीं करनी चाहिए।

दाल को बिना अनाज के खाना

दाल में प्रोटीन की अच्छी खासी मात्रा होती है लेकिन इसके अमीनो एसिड पूरी तरह से बैलेंस नहीं होते। दाल में मिथोनाइन कम होते हैं जो कि जरूरी अमीनो एसिड होता है जिसकी जरूरत बॉडी को होती है। कंप्लीट न्यूट्रिशन के लिए दाल को अनाज के साथ मिलाकर खाना फायदेमंद होता है। जब दाल को बिना अनाज के खाते हैं तो इसके प्रोटीन को शरीर पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं कर पाता है। इसलिए दाल को चावल, गेंहू या फिर मिलेट्स के साथ खाना चाहिए। इसीलिए सिंपल घर का दाल-चावल जैसा बेसिक खाना भी आपको पर्याप्त न्यूट्रिशन देता है।

बार-बार दाल को गर्म करना

दाल को फ्रिज में रखकर जब बार-बार गर्म करते हैं तो इससे दाल की न्यूट्रिशनल वैल्यू घट जाती है। हर बार गरम करने से दाल के अमीनो एसिड टूटते हैं और प्रोटीन का स्ट्रक्चर धीरे-धीरे बदल जाता है। भले ही ये दाल में ज्यादा बदलाव ना लाए लेकिन हर बार अगर आप ज्यादा दाल बनाकर उसे बार-बार गर्म करती हैं तो ये आदत छोड़ दें। जब जरूरत हो उतनी मात्रा में दाल कुक करें और उसे गर्म करके खाएं.

बहुत गर्म तेल का तड़का

गर्म तेल में जीरा, हींग और सूखी लाल मिर्च का तड़का तो अच्छा लगता है लेकिन अगर ये गर्म तेल मसाले जलने तक गर्म किया गया है और दाल पर डाला जाता है तो इससे हार्मफुल कंपाउंड बनते हैं। जिससे दाल के कुछ न्यूट्रिशन कम होते हैं। घी या तेल में जब तड़का बनाना हो तो टेंपरेचर का ध्यान रखना जरूरी है। मध्यम आंच पर सिंके जीरा, मेथी, हींग, मिर्च स्वाद के साथ आपके दाल को हेल्दी भी बनाते हैं।

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