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दावा: कुछ दिन में दुनिया देखेगी बड़ी तबाही, ईरान पर परमाणु बम फेंकने वाला है US

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मशहूर टीवी होस्ट और राजनीतिक विश्लेषक टकर कार्लसन का दावा है कि आने वाले कुछ दिनों में अमेरिका ईरान पर परमाणु हमला कर सकता है। इसके तार उन्होंने इजरायल में हुए आम चुनाव से जोड़े हैं, जिसमें बेंजामिन नेतन्याहू को बहुमत नहीं मिला है।

ईरान के खिलाफ अमेरिका जल्द ही परमाणु हमला कर सकता है। आशंका है कि कुछ ही दिनों के अंदर इजरायल के दबाव में यह फैसला लेने जा रहा है। मशहूर टीवी शो होस्ट और पत्रकार टकर कार्लसन ने ऐसा दावा किया है। हालांकि, अमेरिका सेना या इजरायल सरकार की ओर से अगली कार्रवाई को लेक आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। ये घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहे हैं, जब अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ कार्रवाई के संकेत दिए हैं और इजरायल चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की अगुवाई वाला गठबंधन बहुमत हासिल नहीं कर सका है।

टकर कार्लसन ने मामले के जानकार के हवाले से लिखा है कि इस संबंध में नेतन्याहू की तरफ से रोज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से संपर्क किया जा रहा है। उन्होंने लिखा, ‘इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दबाव में ट्रंप प्रशासन कुछ दिनों में ईरान पर परमाणु हमला कर सकता है।’

कहां होगा हमला

कार्लसन का दावा है कि हमला मध्य ईरान के पिकाक्स पर्वत पर होगा। उन्होंने लिखा, ‘इजरायली खुफिया एजेंसियां दावा करती हैं कि यहां पर ईरान सरकार ने न्यूक्लियर प्रोग्राम शुरू किया है। कोई भी साधारण अमेरिकी हथियार 300 फीट ग्रेनाइट को चीरकर उन सुरंगों को तबाह नहीं कर सकेगा, जहां कथित तौर पर परमाणु कार्यक्रम चल रहा है। केवल एकमात्र सैन्य उपाय परमाणु हमला है। एक जानकार के हवाले से लिखा,’बीबी इस संबंध में ट्रंप को रोज कॉल करते हैं।”

क्या चुनाव है वजह

उन्होंने इसके तार इजरायली चुनाव से भी जोड़े हैं। उन्होंने लिखा, ‘नेतन्याहू बहुत चिंतित हैं। बीते सप्ताह आए चुनाव के नतीजों के बाद वह तब तक सरकार नहीं बना सकते जब तक ट्रंप सीधे तौर पर इजरायल की राजनीति में दखल न दे दें और दूसरी पार्टियों से डील न करा दें। जिसकी मदद से नेतन्याहू को नेसेट में 61 सीटें मिल जाएंगी। ऐसा नहीं हुआ तो वह पीएम पद गंवा देंगे और जांच और जेल जाने तक की नौबत आ सकती है। नेतन्याहू को ट्रंप के करीब ही रहना होगा। उन्हें इस युद्ध की जरूरत है।’

दो नेताओं का साथ भी मिला?

कार्लसन ने दावा किया है, ‘इसके लिए उन्होंने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और सेंटकॉम कमांडर ब्रैड कूपर समेत प्रशासन के अपने करीबियों पर भी दबाव बनाना शुरू कर दिया है। युद्ध को ठीक से संभालने में फेल रहे ये दोनों ही किसी भी समझौते के खिलाफ हैं। दोनों ही बड़े ऑपरेशन शुरू करने के पक्ष में हैं। विदेश मंत्री मार्को रूबियो और सीआईए डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ भी नेतन्याहू की बात मान रहे हैं और डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं के मामले में भी हाल यही हैं।’

तैयार है इजरायल

वार्ता ने इजरायली अखबार येदियोत अहरोनोत के हवाले से बताया है कि इजरायल ने ईरान के साथ संभावित नए सैन्य टकराव के लिए अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख ने राष्ट्रपति ट्रंप के सामने ईरान पर हमले फिर शुरू करने के विकल्प पेश किए हैं। अखबार ने अज्ञात राजनीतिक सूत्रों के हवाले से बताया कि इजरायली सेना ने संभावित रूप से फिर से संघर्ष शुरू होने की स्थिति के लिए अपनी रक्षात्मक और आक्रामक तैयारियां पूरी कर ली हैं। हालांकि, सैन्य कार्रवाई शुरू करने का फैसला ट्रंप के हाथ में है, जबकि वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी है।

अखबार के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख ब्रैड कूपर ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन केन की मौजूदगी में हुई बैठक में ट्रंप के सामने सैन्य कार्रवाई के विकल्प पेश किए। हालांकि, सैन्य अभियान फिर से शुरू करने को लेकर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।

भारत पाकिस्तान का लिया नाम

कार्लसन ने इस दौरान भारत और पाकिस्तान का भी नाम लिया है। उन्होंने लिखा, ‘…अमेरिका ने कभी भी युद्ध में परमाणु का इस्तेमाल नहीं किया है। अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तो ये नई मिसाल होगी। रूसी भी कम से कम दो सरकारों से कह चुके हैं कि अगर अमेरिका ने परमाणु हमला किया, तो उन्हें भी यूक्रेन पर हमले की आजादी मिल जाएगी । पाकिस्तान और भारत, उत्तर कोरिया और सोल भी ऐसा सोच सकते हैं। पहले परमाणु हमले के बाद तीसरा विश्व युद्ध हो कर रहेगा। वो युद्ध छोटा और अंतिम होगा।’

कब तक फैसला ले सकते हैं ट्रंप

उन्होंने जानकारों के हवाले से कहा है कि ट्रंप अगले सप्ताह इस बात पर फैसला ले सकते हैं कि परमाणु का इस्तेमाल करना है या नहीं। उन्होंने लिखा, ‘वो तारीख 7 नवंबर होगी यानी अब से 6 दिन। फिलहाल, ट्रंप संकोच कर रहे हैं और अपने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और दूत स्टीव विटकॉफ की बात सुन रहे हैं। दोनों का मानना है कि ईरान के साथ समझौता किया जा सकता है।’

SOURCE : LIVE HINDUSTAN