Source :- LIVE HINDUSTAN
ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच संबंधों में सुधार का बड़ा संकेत मिला है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने रविवार को कहा कि दोनों देश पुराने विवाद को भूलकर आगे बढ़ना चाहते हैं।
मीडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। तनाव के बीच एक राहत वाली खबर सामने आई है। ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच लंबे समय से तनाव के बाद दोनों देशों के बीच अब फिर से बातचीत शुरू हुई है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने रविवार को कहा कि तेहरान और अबू धाबी अब पुराने विवाद को भूलकर आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश भविष्य को साथ मिलकर बनाना चाहते हैं।
यह बयान ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत में हुई एक अहम मुलाकात के बाद आया। शनिवार को ईरानी राष्ट्रपति की मुलाकात संयुक्त अरब अमीरात के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से हुई थी। यह बैठक दोनों देशों के बीच हाल के समय की सबसे ऊंचे स्तर की बातचीत मानी जा रही है।
क्या बोले पेजेशकियान?
बैठक के एक दिन बाद पेजेशकियान ने कहा कि हमने अबू धाबी के क्राउन प्रिंस से रचनात्मक बातचीत की। हम इस बात पर सहमत हुए कि पुराने अध्याय को भूलकर भविष्य की ओर देखेंगे और उसे साथ मिलकर बनाएंगे। उनके इस बयान को दोनों देशों के बीच राजनयिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
दरअसल, पिछले कुछ महीनों में मध्य पूर्व की स्थिति काफी तनावपूर्ण रही है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद क्षेत्र में हालात बिगड़ गए थे। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए थे। इन हमलों में संयुक्त अरब अमीरात भी प्रभावित हुआ था। इसी वजह से दोनों देशों के रिश्ते और ज्यादा खराब हो गए थे।
तनाव के बाद पहली बार बैठक
तनाव इतना बढ़ गया था कि पिछले महीने संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान के साथ व्यापार और वित्तीय लेन-देन रोकने की घोषणा कर दी थी। इस फैसले से दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों पर भी असर पड़ा था। ऐसे में भारत में हुई यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह उसी तनाव के बाद पहला बड़ा संपर्क है।
कूटनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि दोनों देश अब स्थिति को और बिगड़ने से रोकना चाहते हैं। ईरान और यूएई के बीच पहले व्यापार, ऊर्जा और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई मुद्दों पर संपर्क रहा है। अब नेताओं के इस स्तर पर बातचीत होने से संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष कम से कम बातचीत का रास्ता फिर से खोलना चाहते हैं।
हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि व्यापार और वित्तीय लेन-देन पर लगी रोक कब हटेगी। लेकिन ईरानी राष्ट्रपति के बयान से यह जरूर लगता है कि तेहरान और अबू धाबी अब टकराव की जगह समझौते की भाषा अपना रहे हैं। भारत में हुई इस मुलाकात को इसीलिए क्षेत्रीय राजनीति की एक महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है।
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