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दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में तीन पदों पर एबीवीपी का क़ब्ज़ा, किसने क्या कहा

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Source :- BBC INDIA

खिल भारतीय विद्यार्थी परिषद

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नतीजे आने के बाद जश्न मनाते एबीवीपी के सदस्य

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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं. इसमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने तीन पदों पर क़ब्ज़ा कर लिया है, जबकि एक पद इंडिपेंडेंट उम्मीदवार के खाते में गया है.

इन नतीजों को लेकर केंद्रीय मंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू समेत बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं ने टिप्पणी की है.

वहीं कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित से मतगणना को लेकर सवाल खड़े किए हैं.

नतीजों को लेकर संदीप दीक्षित ने कहा, “मैंने यह एनएसयूआई अध्यक्ष से सुना है कि मतगणना और मतदान केंद्रों पर गड़बड़ी हुई. इसकी जांच की जानी चाहिए, क्योंकि इसका उन 2-3 सीटों पर बड़ा असर पड़ सकता है, जिनका फ़ैसला बेहद कम अंतर से हुआ.”

डीयू छात्रसंघ के चुनाव में कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई को एक भी पद हासिल नहीं हुआ.

इन चुनावों में प्रेसीडेंट पद पर एबीवीपी के यश डबास ने जीत हासिल की है.

वहीं, सेक्रेटरी पद पर एबीवीपी की रिया छाबड़ी और ज्वाइंट सेक्रेटरी पद पर एबीवीपी के ही लक्ष्य राज सिंह ने जीत हासिल की है.

सबसे अधिक चर्चा वाइस प्रेसीडेंट पर इंडिपेंडेंट उम्मीदवार दीपांशु शौकीन के जीत की हो रही है.

किसने क्या कहा?

एबीवीपी के यश डबास ने जीता दिल्ली छात्रसंघ के अध्यक्ष का पद

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अध्यक्ष पद पर जीत हासिल करने के बाद यश डबास ने कहा, “पीयू (पंजाब यूनिवर्सिटी) से लेकर डीयू तक छात्रों ने हमें जिताने की कोशिश की. हमारे लिए सबसे पहला मुद्दा हॉस्टल्स और पीजी का सेफ्टी ऑडिट करना है. क्योंकि हम नहीं चाहते कि आने वाले समय में सत्य निकेतन जैसा हादसा दोबारा हो.”

वहीं, उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल करने वाले दीपांशु शौकीन ने कहा, “मेरा यह संघर्ष दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए रहा है और छात्रों के लिए मैं आगे भी संघर्ष करता रहूंगा.”

प्रेसीडेंट पद के लिए एनएसयूआई के उम्मीदवार विजय शंकर मीणा ने छात्र संघ चुनाव में बोगस वोटिंग के आरोप लगाए हैं.

उन्होंने पत्रकारों से कहा, “हम हारे नहीं हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय के हर छात्र ने चुनाव जीता है. आपके अपार समर्थन के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद. हमने कल स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज, रामजस कॉलेज और शिवाजी कॉलेज जैसे कॉलेजों में हुई घटनाओं को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी. फर्जी वोटिंग हुई थी. छात्रों को जबरन वोट देने के लिए मजबूर किया गया और उनके आईडी कार्ड ज़ब्त कर लिए गए. हम इस मामले को अदालत में ले जाएंगे और इसके लिए लड़ेंगे.”

दिल्ली से बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “डूसू चुनाव के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश के युवाओं और छात्रों ने राष्ट्रवादी विचारधारा को चुनते हुए एबीवीपी के पक्ष में मतदान किया है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकास नीतियों को चुना है. छात्रों ने 4 में से 3 पदों पर एबीवीपी को जिताया. इस चुनाव में एनएसयूआई अपना खाता तक नहीं खोल सकी.”

उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है, “देश के युवाओं ने कांग्रेस पार्टी को पूरी तरह ख़ारिज कर दिया है.”

गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी की शानदार जीत पर परिषद के सभी कर्मठ कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई.”

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी एबीवीपी की जीत पर संगठन को बधाई दी है.

उन्होंने एक्स पर लिखा, “दिल्ली विश्वविद्यालय में एबीवीपी की छात्रसंघ चुनावों में ऐतिहासिक जीत पर मेरे सभी युवा साथियों को बधाई. यह जीत सकारात्मक और रचनात्मक छात्र राजनीति में युवाओं के लगातार विश्वास को दर्शाती है, जो ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना पर आधारित है. यह ‘विकसित भारत’ के विजन में योगदान देने के उनके मजबूत संकल्प को भी दर्शाती है.”

वहीं केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू एक्स पर लिखा, “युवाओं की आवाज़ बुलंद और स्पष्ट है. दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी के सभी विजयी उम्मीदवारों, कार्यकर्ताओं और सभी शुभचिंतकों को हार्दिक बधाई!”

सीजेपी के सौरव दास ने कांग्रेस पर साधा निशाना

दीपांशु शौकीन

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डीयू छात्रसंघ चुनाव परिणापर सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रवक्ता सौरव दास ने एक्स पर लिखा, “माफ कीजिए, लेकिन डूसू के नतीजों को लेकर मेरी दो टिप्पणियां हैं. छात्रों का बहुमत मौजूदा सरकार के ख़िलाफ़ है, लेकिन वे बंटे हुए हैं और इसका फ़ायदा सरकार को मिलता है.”

“लेकिन यह एक सकारात्मक पहलू भी है. जिन लोगों ने पद हासिल किए हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि वे राजा या रानी नहीं हैं. बहुमत ने उनके पक्ष में वोट नहीं दिया है.”

सौरव दास ने लिखा, “सीजेपी को निशाना बनाने पर ध्यान देने के बजाय कांग्रेस और उसके संगठनात्मक ढांचे के लिए बेहतर होगा कि वे अपनी व्यवस्था ठीक करें. यह व्यवस्था ठीक करने की प्रक्रिया पिछले 12 साल से चल रही है और लोग अब धैर्य खो रहे हैं.”

“ठीक उसी तरह जैसे एनएसयूआई का बाग़ी उम्मीदवार, जिसे एनएसयूआई का टिकट नहीं दिया गया, उपाध्यक्ष पद पर बड़े अंतर से जीत गया. वामपंथी एकता में कुछ लोग, सभी नहीं, वैचारिक शुद्धता और अलगाव पर बहुत ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं.”

सौरव दास ने लिखा, “उन्हें जागना चाहिए और हक़ीक़त को समझना चाहिए. कोई भी उनके समर्थन या मान्यता के लिए उनके पास नहीं आ रहा है. अगर यही विपक्ष की ‘एकता’ है, तो मुझे डर है कि वे आगे भी विपक्ष में ही बने रहेंगे.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS