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दिवाली पर खुशियों के बीच तनाव क्यों बढ़ता है? जानें कैसे रखें खुद को रिलैक्स

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Source :- LIVE HINDUSTAN

दिवाली पर घर की सफाई, सजावट, शॉपिंग और मेहमानों की तैयारी में कई लोग इतने व्यस्त हो जाते हैं कि त्योहार का मजा ही नहीं ले पाते। जानें बिना स्ट्रेस और किसी प्रेशर के दिवाली कैसे मनाएं।

दिवाली खुशियां बांटने और अपनों के साथ समय बिताने का त्योहार है। लेकिन आजकल त्योहार मनाने का तरीका भी बदल रहा है। पहले जहां घर की सफाई, पूजा और परिवार के साथ मिलकर खाना बनाना ही खास होता था, वहीं अब सजावट, थीम पार्टी, नए कपड़े और सोशल मीडिया के लिए अच्छी तस्वीरें लेने का दबाव भी बढ़ गया है। ऐसे में कई लोग त्योहार से पहले ही थकने लगते हैं।

वडोदरा के भैलाल अमीन जनरल हॉस्पिटल की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट आश्का मिस्त्री के अनुसार, दिवाली का मजा लेने के लिए हर चीज का परफेक्ट होना जरूरी नहीं है। त्योहार को बिना किसी स्ट्रेस के भी खूबसूरती से मनाया जा सकता है। जब हम दूसरों की उम्मीदें पूरी करने और हर चीज को परफेक्ट बनाने में लग जाते हैं, तो त्योहार की असली खुशी पीछे छूट सकती है।

जब दिवाली की तैयारियां ही बन जाएं तनाव की वजह

दिवाली पर घर की सफाई करना, सजावट करना और मेहमानों के लिए इंतजाम करना कई परिवारों की पुरानी परंपरा है। कुछ घरों में हर साल खास तरीके से पूजा होती है, तो कहीं परिवार के सभी लोग मिलकर खाना बनाते हैं। इन परंपराओं को निभाना अच्छा लगता है, लेकिन जब इनके साथ नए जमाने की उम्मीदें भी जुड़ जाती हैं, तो काम बढ़ने लगता है।

  • कई बार लोग चाहते हैं कि घर भी सुंदर दिखे, मेहमानों के लिए अच्छा खाना भी बने और हर छोटी-बड़ी तैयारी समय पर पूरी हो जाए। ऐसे में थकान और चिड़चिड़ापन महसूस होना आम बात है।

दिवाली पर हर चीज परफेक्ट करने का प्रेशर क्यों?

आश्का मिस्त्री बताती हैं कि कई बार हम त्योहार को महसूस करने के बजाय इस बात की चिंता करने लगते हैं कि वह दूसरों को कैसा दिखेगा। घर की सजावट कैसी है, कपड़े कितने अच्छे हैं और मेहमानों को सब पसंद आएगा या नहीं, ऐसी बातें तनाव बढ़ा सकती हैं।

  • सोशल मीडिया भी इस दबाव को बढ़ाता है। वहां दूसरों के सजे हुए घर, महंगे कपड़े और शानदार पार्टियां देखकर लोग अपनी दिवाली की तुलना उनसे करने लगते हैं। फिर मन में लगता है कि हमें भी वैसा ही कुछ करना चाहिए। लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर किसी के लिए दिवाली मनाने का तरीका एक जैसा हो।

हर किसी के लिए दिवाली खुशी का मौका नहीं होती

दिवाली को खुशियों का त्योहार कहा जाता है, लेकिन हर इंसान के लिए यह समय एक जैसा नहीं होता। कुछ लोग पैसों की परेशानी से गुजर रहे होते हैं, तो कुछ के परिवार में अनबन चल रही होती है। वहीं, कुछ लोग अपनों से दूर होने या किसी अपने को खोने की वजह से अकेलापन महसूस करते हैं।

ऐसे में जरूरी है कि हम खुद पर खुश दिखने या दूसरों की तरह त्योहार मनाने का दबाव न डालें। अगर इस समय आपका मन उदास है, तो अपनी भावनाओं को समझना भी जरूरी है।

दिवाली कोई मुकाबला नहीं!

आश्का मिस्त्री कहती हैं कि दिवाली कोई मुकाबला नहीं है। न ही सबसे सुंदर घर सजाने या सबसे बड़ी पार्टी रखने के लिए किसी को इनाम मिलने वाला है। इसलिए दूसरों से अपनी तुलना करने के बजाय अपनी खुशी को अहमियत दें।

  1. हर काम खुद करने की जिम्मेदारी न लें: घर की सफाई, सजावट और खाने की तैयारी में परिवार के दूसरे लोगों की मदद लें। इससे सारा काम एक ही व्यक्ति पर नहीं पड़ेगा।
  2. अपनी क्षमता के हिसाब से तैयारी करें: जितना समय और पैसा आपके पास है, उसी के मुताबिक प्लान बनाएं। सिर्फ दूसरों को देखकर महंगी सजावट या शॉपिंग करने की जरूरत नहीं है।
  3. सोशल मीडिया से थोड़ा ब्रेक लें: अगर दूसरों की तस्वीरें देखकर आपको अपनी दिवाली कम अच्छी लगने लगती है, तो कुछ समय के लिए सोशल मीडिया से दूरी बना लें।
  4. छोटी-छोटी खुशियों पर ध्यान दें: परिवार के साथ बैठकर बातें करना, पसंद का खाना खाना या बच्चों के साथ समय बिताना भी दिवाली को खास बना सकता है।
  5. अपने लिए भी समय निकालें: त्योहार की भागदौड़ के बीच थोड़ा आराम करें। याद रखें, दिवाली का मजा तभी आएगा जब आप खुद भी अच्छा महसूस करेंगे।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN