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देश में बढ़ेंगी तेल की कीमतें? पेट्रोल पर ₹5 और डीजल पर ₹23/लीटर का नुकसान; क्रूड $100 के पार

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से भारत की सरकारी तेल कंपनियों पर बढ़ा दबाव।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेज उछाल ने भारत की सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा दिया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इसका सीधा असर भारतीय तेल कंपनियों की कमाई पर पड़ रहा है, क्योंकि देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें पिछले तीन महीने से ज्यादा समय से स्थिर हैं। मौजूदा हालात में सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल बेचने पर करीब 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 23 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में अब तक औसत कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से तेल कंपनियों की मार्केटिंग मार्जिन निगेटिव हो गई है। पेट्रोल और डीजल के अलावा घरेलू LPG सिलेंडर पर भी कंपनियों को लगभग 200 रुपये प्रति सिलेंडर की अंडर-रिकवरी हो रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 2.5 प्रतिशत बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी करीब 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।

आयात बिल बढ़कर पहुंचा 63.4 अरब डॉलर

भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में होने वाली तेजी का देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ता है। अप्रैल से जुलाई के बीच भारत का कच्चा तेल आयात बिल 56 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 63.4 अरब डॉलर पहुंच गया। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 40.5 अरब डॉलर था। आयात की मात्रा में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ, लेकिन तेल की बढ़ती कीमतों ने देश का खर्च काफी बढ़ा दिया।

कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर

भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत भी तेजी से ऊपर गई है। सितंबर की शुरुआत में इसकी कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई, जो अगस्त और जुलाई के औसत स्तर से काफी अधिक है। अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत का आयात बिल और बढ़ सकता है। इससे व्यापार घाटे और रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

महंगाई पर भी पड़ेगा इसका असर

महंगा कच्चा तेल केवल पेट्रोलियम कंपनियों के लिए ही चिंता का विषय नहीं है। इसका असर महंगाई पर भी पड़ सकता है। एविएशन, पेंट, टायर, केमिकल, ट्रांसपोर्ट और FMCG जैसे कई उद्योगों की लागत बढ़ सकती है। कंपनियां अगर बढ़ी हुई लागत ग्राहकों पर डालती हैं, तो डेली की वस्तुएं और सर्विसेज महंगी हो सकती हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

एक्सपर्ट का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल, सरकार और तेल कंपनियों के सामने चुनौती यह है कि बढ़ती लागत और आम उपभोक्ताओं को राहत देने के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। आने वाले दिनों में कच्चे तेल की दिशा भारत की महंगाई, रुपये और शेयर बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN