Source :- LIVE HINDUSTAN
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया 4 जुलाई से शुरू होगी और उनके गृहनगर पवित्र शहर मशाद में नौ जुलाई को दफनाने के साथ खत्म होगी।
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया 4 जुलाई से शुरू होगी और उनके गृहनगर पवित्र शहर मशाद में नौ जुलाई को दफनाने के साथ खत्म होगी। जानकारी के मुताबिक इस दौरान करीब दो करोड़ लोग वहां मौजूद होंगे, जिसमें 30 देशों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। यह सबकुछ छह दिन तक चलेगा। अंतिम संस्कार की रस्में, दक्षिणी तेहरान के पवित्र शहर कौम में भी होंगी। बता दें कि 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के दौरान खामेनेई की मौत हो गई थी। दोनों देशों के बीच फिलहाल शांति बहाल है और युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत चल रही है।
4 से 6 जुलाई
अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्में, 4 जुलाई से शुरू होंगी। इस दिन खामेनेई का ताबूत तेहरान के ‘ग्रैंड मोसल्ला’ में रखा जाएगा। इस दौरान ईरान की आम जनता, उनके दर्शन करेगी। इसके बाद छह जुलाई को तेहरान की गलियों में खामेनेई की अंतिम यात्रा निकाली जाएगी।
7 जुलाई
अयातुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम यात्रा इस दिन पवित्र शहर कौम पहुंचेगी। यह शहर तेहरान के दक्षिण-पश्चिम में करीब 140 किमी दूर है। कौम शहर, शिया इस्लामिक विद्वानों का एक अहम सेंटर माना जाता है।
8 जुलाई
इसके बाद अंतिम यात्रा पहुंचेगी दो अन्य ऐतिहासिक और पवित्र शहरों, नजफ और कर्बला में। यह दोनों शहर इराक के पड़ोस में हैं।
9 जुलाई
अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार का यह अंतिम दिन होगा। इस दिन उन्हें मशाद के इमाम रेजा दरगाह में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। यह खामेनेई का गृहनगर भी है।
लाल झंडे में लिपता ताबूत
ईरान के सरकारी मीडिया द्वारा जारी वीडियो में गुरुवार रात खामेनेई के लिए आयोजित एक शोकसभा दिखाई गई। काले कपड़े पहने शोकाकुल लोगों ने स्कार्फ और अन्य वस्तुएं वहां मौजूद सहायकों की ओर फेंकीं ताकि उन्हें ताबूत से स्पर्श कराया जा सके। ईरान में यह एक आम परंपरा है। ईरान की सरकारी मीडिया ने खामेनेई के ताबूत की तस्वीरें जारी कीं। इस पर लाल झंडा लिपटा हुआ था। इस झंडे पर सफेद अक्षरों में ‘या हुसैन’ लिखा था। यह शिया समुदाय का एक वाक्यांश है, जो पैगंबर मोहम्मद के नवासे की सातवीं सदी में हुई शहादत की याद दिलाता है। परंपरागत रूप से यह झंडा अन्यायपूर्ण तरीके से मारे गए व्यक्ति के बहाए गए खून और उसका बदला लेने के आह्वान का भी प्रतीक है।
ईरान सरकार का आकलन है कि शनिवार से राजधानी की सड़कों पर करीब दो करोड़ लोग उतरेंगे। यह दृश्य 1989 में दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रूहुल्ला खुमैनी के अंतिम संस्कार जैसा हो सकता है। इससे खासकर ऐसे समय में ईरान सरकार का मनोबल बढ़ाने में मदद मिल सकती है, जब वह युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने नियंत्रण का लाभ उठाने की कोशिश कर रही है।
मुजतबा शामिल होंगे या नहीं?
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि मुजतबा खामेनेई अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे या नहीं। उनके पिता अली खामेनेई 1989 में खुमैनी के अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे और उस समय वह रोते हुए नजर आए थे। इसके बाद उन्होंने दशकों तक सख्ती से ईरान का नेतृत्व किया और पश्चिमी देशों का सामना किया।
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