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नसीरुद्दीन शाह के मोदी वाले बयान पर बोले जावेद अख्तर- उन्हें ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

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लीजेंडरी लिरिक्स राइटर जावेद अख्तर ने नसीरुद्दीन शाह वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सिर्फ उन पर ही क्यों सवाल उठाया जाना चाहिए?

जावेद अख्तर ने नसीरुद्दीन शाह के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी है, जिसको लेकर हंगामा मचा हुआ है।

लिरिक्स और स्क्रिप्ट राइटर जावेद अख्तर ने लीजेंडरी एक्टर जावेद अख्तर के नसीरुद्दीन शाह पर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया दी है। जावेद अख्तर ने कहा कि है कि नसीर साहब अपने विचारों को ज्यादा संयमित ढंग से रख सकते थे। मालूम हो कि नसीरुद्दीन शाह ने अपने हालिया बयान में अशिक्षित नेताओं को निशाना बनाते हुए कहा था कि एक निरक्षर शासक इस देश को ‘अनपढ़, असंवेदनशील, नाकाबिल और असफल’ बनाना चाहेगा। नसीरुद्दीन शाह ने हालांकि सीधे तौर पर पीएम मोदी का नाम नहीं लिया था, लेकिन उनके इस बयान को प्रधानमंत्री मोदी पर अप्रत्यक्ष रूप से साधे गए निशाने पर देखा जा रहा है।

‘नसीर साहब नेता बनना चाहते हैं या नहीं’

अब सीनियर लिरिक्स राइटर जावेद अख्तर ने अपने एक इंटरव्यू में इस बारे में बात की, कि क्या नसीरुद्दीन शाह का बयान उनके निजी गुस्से की उपज था, साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस तरह के विचारों को ज्यादा संयमित ढंग से पेश किया जा सकता था। जावेद अख्तर ने कहा, “मुझे नहीं पता कि यह पलटवार है या नहीं। मैं यह नहीं कह सकता कि नसीर साहब नेता बनना चाहते हैं या नहीं, लेकिन मुझे लगता है कि ऐसी बातें कहीं ज्यादा सभ्य ढंग से कही जा सकती थीं। खैर, वह एक अधेड़ उम्र के गुस्सैल आदमी हैं, इसलिए वह इसी तरह बोलते हैं। यह उनकी अपनी राय है।

‘वह एक अधेड़ उम्र के गुस्सैल आदमी हैं’

जावेद अख्तर ने द इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में कहा, “मुझे नहीं पता कि यह बदले की भावना है या नहीं। मैं यह नहीं कह सकता कि नसीर साहब नेता बनना चाहते हैं या नहीं, लेकिन मुझे लगता है कि ऐसी बातें कहीं अधिक सभ्य भाषा में कही जा सकती थीं। खैर, वह एक अधेड़ उम्र के गुस्सैल आदमी हैं, इसलिए वह इसी तरह बोलते हैं। यह उनकी राय है। मैं क्या कह सकता हूं?” जनता के बीच हो रही बहस के बदले सुरों पर बात करते हुए सीनियर राइटर ने कहा कि पब्लिक डिबेट के बदलते हुए रूप पर विस्तार से बताते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि राजनीति में अभद्र भाषा का इस्तेमाल अब किसी खास इंसान तक सीमित नहीं रहा है। बल्कि यह इस बात को दिखाता है कि पिछले कुछ दशकों में लोगों का बर्ताव कितनी तेजी से बदला है।

नसीर को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है?

जावेद साहब ने कहा, “यह बदलाव सिर्फ नसीर में नहीं, बल्कि पूरे समाज में दिखाई पड़ रहा है। अगर आप आज की राजनीति को देखें, तो 1950 के दशक में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं होता था। उस वक्त लोग हर विचारधारा से जुड़े थे, चाहे वह वामपंथी हो, दक्षिणपंथी हो, अति वामपंथी हो या अति दक्षिणपंथी, फिर भी हमने कभी ऐसी भाषा नहीं सुनी।” जावेद अख्तर ने सवाल उठाया कि फिर सिर्फ नसीर को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है? मैं आपको 15 और भी ज्यादा मुख्य नेताओं के नाम और उनके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा के उदाहरण भेज सकता हूं। करोड़ों लोग उन राजनेताओं को भी सुनते हैं।”

SOURCE : LIVE HINDUSTAN