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नेपाल आपदा आने से पहले इंजीनियरों ने बनाया एक वॉट्सऐप ग्रुप, अब ऐसे कर रहा मदद

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अब जब खोजी टीमें रेस्क्यू अभियान चला रही हैं, तो इंजीनियरों का यह वॉट्सऐप ग्रुप एक लाइफलाइन बनकर उभरा है और बचाव दल को दबे हुए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के बारे में जरूरी जानकारी दे रहा है।

नेपाल त्रासदी को कई दिन बीत गए हैं, लेकिन अब भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। बड़ी संख्या में लोगों को बचाया जा चुका है। हालांकि, इस हादसे में अब तक 1287 लोगों की जान चली गई है और चार हजार से ज्यादा लोग लापता हैं। आपदा आने से ठीक पहले इंजीनियरों ने एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाया था, जो अब बचाव दल को टनों कीचड़, पत्थरों और मलबे के नीचे दबी सुरंगों में रास्ता खोजने में मदद कर रहा है। इस ग्रुप में 500 से ज्यादा सदस्य हैं, जिनमें इंजीनियर, हाइड्रोपावर के पुराने कर्मचारी, सरकारी अधिकारी और दूसरे एक्सपर्ट शामिल हैं।

अब जब खोजी टीमें रेस्क्यू अभियान चला रही हैं, तो इंजीनियरों का यह वॉट्सऐप ग्रुप एक लाइफलाइन बनकर उभरा है और बचाव दल को दबे हुए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के बारे में जरूरी जानकारी दे रहा है। पिछले हफ्ते जब बचाव दल चीनी बॉर्डर के पास हिमालय घाटी में चिलिमे हाइड्रोपावर प्लांट के दबे हुए अवशेषों को खोज रहे थे, तो एक सरकारी अधिकारी ने मदद के लिए ग्रुप से संपर्क किया। अधिकारी ने लिखा, “क्या आप मुझे चिलिमे लेआउट की ड्राइंग भेज सकते हैं?” कुछ मिनट बाद, एक सदस्य ने प्रोजेक्ट के पावरहाउस की ड्राइंग और उसकी एक्सेस टनल की डिटेल्स भेजीं।

यह ग्रुप बचाव दल के लिए एक रियल-टाइम सपोर्ट नेटवर्क बन गया है। आइडिया यह है जब बचाव दल को कोई समस्या आती है, तो वे इंजीनियरों से पूछते हैं और प्लांट से जान-पहचान वाला कोई व्यक्ति जवाब देता है। इंजीनियर टनल के मैप और ड्रॉइंग शेयर कर रहे हैं, जिनसे पता चलता है कि रास्ते कहां जाते हैं, चैंबर कहां हैं और प्लांट के अलग-अलग हिस्से कैसे जुड़े हुए हैं। प्लांट के पुराने वर्कर भी बचाव दल को टनल में रास्ता बताने में मदद कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जब बाढ़ का पानी और मलबे से नजारा बदल जाता है, तो सुविधाओं के अंदर उनका अनुभव बहुत काम आ सकता है।

यह ग्रुप लापता वर्करों को ट्रैक करने में भी मदद कर रहा है। सदस्य अपने नाम और मोबाइल नंबर अधिकारियों के साथ शेयर करते हैं, जो यह जानकारी टेलीकॉम अधिकारियों को दे सकते हैं। उनकी आखिरी रिकॉर्ड की गई फोन लोकेशन से यह पता चल सकता है कि आपदा आने पर वे कहां थे।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN