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पाकिस्तान के दो कॉस्मेटिक उत्पादों पर जारी की भारत ने चेतावनी, क्या है पूरा मामला?

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Source :- BBC INDIA

गोरी क्रीम

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भारत सरकार ने पाकिस्तान में निर्मित दो कॉस्मेटिक उत्पादों, गोरी ब्यूटी क्रीम और चांदनी व्हाइटनिंग क्रीम के इस्तेमाल के ख़िलाफ़ देशभर में चेतावनी जारी की है.

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने यह कार्रवाई भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) की सलाह पर की है. ये उत्पाद भारत में ग़ैरक़ानूनी तौर पर बेचे जा रहे हैं.

डीसीजीआई ने कार्रवाई करते हुए कहा है कि ये दोनों उत्पाद “अनधिकृत हैं और इनमें निर्धारित सीमा से अधिक भारी धातुएं मौजूद हैं. इससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को जोखिम हो सकता है, जिसमें विषैले प्रभाव भी शामिल हैं.”

पाकिस्तान में बिक रही इन क्रीमों के लैब टेस्ट में मर्करी याना पारे की मात्रा बहुत अधिक होने की बात सामने आई है.

डॉक्टरों ने कहा है कि पारे का सेहत पर बहुत अधिक पड़ सकता है और किडनी तक ख़राब हो सकती है.

जुलाई में महाराष्ट्र के फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफ़डीए) ने पाकिस्तान निर्मित गोरी क्रीम समेत कई प्रसाधन उत्पादों में मर्करी की मात्रा अधिक होने की बात कही थी.

नोटिस में क्या कहा गया है

कॉस्मेटिक प्रोडक्ट

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एक अधिकारी ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, “यह एक ख़तरनाक और अनधिकृत उत्पाद है.”

“अगर आप ऐसे उत्पाद का इस्तेमाल कर रहे हैं जिसे भारत में बिक्री की अनुमति नहीं है, तो उससे होने वाले किसी भी नुक़सान के लिए उपभोक्ता ख़ुद ज़िम्मेदार होगा.”

8 सितंबर को जारी सार्वजनिक नोटिस में कहा गया, “अनधिकृत कॉस्मेटिक उत्पादों को देखते हुए उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि इन उत्पादों को न ख़रीदें और अगर इन्हें ख़रीद लिया है, तो इनका या इसी तरह के नाम वाले कॉस्मेटिक उत्पादों का इस्तेमाल न करें.”

नोटिस में कहा गया, “केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने परीक्षण और विश्लेषण के ज़रिए पुष्टि की है कि ये दोनों कॉस्मेटिक उत्पाद अनधिकृत हैं. इन्हें भारत में बिक्री के लिए आयात करने का पंजीकरण प्रमाणपत्र सक्षम अथॉरिटी की ओर से जारी नहीं किया गया है.”

सीडीएससीओ, भारत की रेग्युलेटरी संस्था है. इसकी भूमिका अमेरिका और यूरोपीय संघ की फ़ूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (एफ़डीए) जैसी संस्थाओं के समान है.

कौन से ब्यूटी प्रोडक्ट सुरक्षित

ब्यूटी प्रोडक्ट

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नोटिस में लोगों को सलाह दी गई है कि वे सिर्फ़ वही ब्यूटी और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट ख़रीदें जिनकी बिक्री की अनुमति हो.

ऐसे उत्पादों पर लाइसेंस नंबर, निर्माता का नाम, बैच नंबर, बनाने की तारीख़ और एक्सपायरी डेट लिखी होनी चाहिए. अगर कोई प्रोडक्ट विदेश से आयात किया गया है, तो उस पर रजिस्ट्रेशन नंबर भी होना चाहिए.

नोटिस में कहा गया है कि लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कॉस्मेटिक उत्पाद सुरक्षित होने चाहिए. इसके लिए भारत में ब्यूटी प्रोडक्ट्स के निर्माण और आयात से जुड़े क़ानूनी नियम बनाए गए हैं.

इनके निर्माण को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और आयात को कॉस्मेटिक नियम, 2020 के तहत नियंत्रित किया जाता है.

और उनकी गुणवत्ता के मानक भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) तय करता है.

किसी भी कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को बेचने के लिए उसका निर्माता पहले राज्य सरकार से लाइसेंस लेता है. वहीं विदेश से आने वाले कॉस्मेटिक उत्पादों का केंद्र सरकार की संबंधित संस्था में पंजीकरण होना ज़रूरी है.

भारत कैसे आई ये क्रीम

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने आशंका जताई कि ये दोनों क्रीम तस्करी के ज़रिए भारत लाई जा रही हैं.

उन्होंने कहा, “लोग जानवरों, उनकी खाल और दूसरी दुर्लभ चीज़ों की भी तस्करी करते हैं. संभव है कि ये उत्पाद भी कम मात्रा में इसी तरह देश में लाए गए हों.”

हालांकि, इस संवाददाता को बेंगलुरु की एक दवा दुकान में गोरी ब्यूटी क्रीम बिकती हुई मिली.

दुकान के कर्मचारी ने बताया, “एक ग्राहक ने इसके बारे में पूछा था. इसके बाद हमें यह बाज़ार में मिल गई. लेकिन यह सामान्य डिस्ट्रिब्यूटर्स के नेटवर्क में उपलब्ध नहीं है.”

पाकिस्तान की लैब में क्या पता चला?

लैब टेस्ट

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बीबीसी उर्दू की संवाददाता तरहब असगर के अनुसार, लाहौर में गोरी क्रीम बड़े पैमाने पर बिक रही है. दरअसल, ये क्रीम अलग-अलग वर्जन में आती हैं, जैसे डे क्रीम, नाइट क्रीम और कई अन्य वेरिएंट.

असगर ने कहा कि उन्होंने इन क्रीमों को खरीदने के बाद इनके सैंपल एक टेस्टिंग लैब में दिए गए, जिसकी रिपोर्ट में पाया गया कि इनमें लगभग 1,300 से 1,500 मिलीग्राम मर्करी (पारा) पाया गया. यह एक विषैला पदार्थ है.

क्रीम के निर्माताओं ने फ़ोन पर बीबीसी उर्दू संवाददाता को ये नहीं बताया कि इनकी मैन्युफ़ैक्चरिंग कहां होती है लेकिन उन्होंने ये ज़रूर कहा कि वो एक दिन में 5,000 बॉक्स पहुंचा सकते हैं.

इन क्रीमों की दूसरे देशों में तस्करी भी की जा रही है, क्योंकि निर्माता ने बताया कि उनका स्टॉक कई देशों में जाता है, जिनमें खाड़ी के देश, अफ़्रीकी देश, भारत और बांग्लादेश शामिल हैं.

पाकिस्तान में इस उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक़, कॉस्मेटिक उद्योग को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है. यह सिर्फ एक क्रीम का नहीं बल्कि हज़ारों ऐसी क्रीमों का मामला है.

दिलचस्प बात यह है कि 2016 में पाकिस्तान स्थित अमेरिकी दूतावास ने भी इसी तरह का एक मुद्दा पाकिस्तान सरकार के सामने उठाया था. वे ऐसी कई क्रीमों के नाम प्रतिबंधित सूची में शामिल कराने में सफल रहे.

मर्करी से क्या नुकसान?

ब्यूटी क्रीम

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महाराष्ट्र एफ़डीए ने जिन उत्पादों की पहचान की है, उनमें गोरी ब्यूटी क्रीम, गोरी ब्यूटी व्हाइटनिंग बॉडी लोशन, गोरी व्हाइटनिंग साबुन, फ़ेस फ्रेश गोल्ड प्लस (ब्यूटी क्रीम और ब्यूटी सीरम) और गोल्डन स्टार ब्यूटी क्रीम शामिल हैं.

एफ़डीए की जांच के मुताबिक, इन उत्पादों पर निर्माण और एक्सपायरी की तारीख़ जैसी ज़रूरी जानकारियां नहीं दी गई थीं.

इन उत्पादों में मर्करी की मात्रा 10 गुना से अधिक होती है.

साबुन की क़ीमत 30 रुपये और क्रीम, लोशन की क़ीमत 160 से 499 रुपये के बीच है.

एफ़डीए के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से जीएमपी ने बताया, “गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों के कारण कई देशों में पारे जैसे भारी धातुओं के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है या इसे सख़्ती से नियंत्रित किया जाता है. इसके बावजूद कुछ ऐसे उत्पादों में पारा अब भी पाया जाता है जो बिना नियमन के बिक रहे हैं, नकली हैं या गैरकानूनी तरीके से बाज़ार में बेचे जा रहे हैं.”

इन उत्पादों से किडनी, दिमाग और त्वचा को स्थायी नुक़सान हो सकता है.

मुंबई के सरकारी कामा एंड अल्बलेस अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. तुषार पालवे के अनुसार, “मर्करी को गैररक़ानूनी तरीक़े से मिलाया जाता है, क्योंकि यह मेलेनिन के उत्पादन को रोकता है और त्वचा को जल्दी गोरा करने का असर देता है.”

पालवे के मुताबिक़, “अगर पारे की मात्रा बहुत ज्यादा है, तो 10 से 12 दिनों के भीतर किडनी को नुकसान शुरू हो सकता है. पारे की मात्रा कम होने पर भी ऐसी क्रीम का रोज इस्तेमाल कुछ महीनों तक करने से धीरे-धीरे किडनी और शरीर के दूसरे अंगों को नुकसान हो सकता है.”

“कई बार इसके लक्षण सालों तक दिखाई नहीं देते, इसलिए लोग ज़हरीली क्रीम का इस्तेमाल जारी रखते हैं. उनमें लक्षण तब दिखाई दे सकते हैं, जब उनकी हालत इतनी गंभीर हो चुकी हो कि उन्हें डायलिसिस की ज़रूरत पड़ने लगे.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS