Source :- LIVE HINDUSTAN
पाकिस्तान से श्री हेमकुंड साहिब के दर्शन के लिए आ रहे श्रद्धालुओं को एयरपोर्ट पर ही रोक दिया गया। इन श्रद्धालुओं के पास भारतीय वीजा और पासपोर्ट समेत बाकी दस्तावेज थे। लेकिन इसके बाद भी इन्हें नहीं आने दिया गया।
पाकिस्तान से भारत आने के लिए तैयार बैठे 104 सिख श्रद्धालुओं को उस वक्त झटका लगा, जब उन्हें एयरपोर्ट पर ही रोक दिया गया। श्री हेमकुंड साहिब के दर्शन के लिए इन श्रद्धालुओं को भारत की तरफ से वीजा जारी कर दिया गया था। लेकिन इसके बाद भी ऐन मौके पर इन्हें फैसलाबाद एयरपोर्ट से शारजाह की फ्लाइट में चढ़ने से रोक दिया गया। बता दें, भारत और पाकिस्तान के बीच कोई सीधी फ्लाइट नहीं चलती है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से अटारी-वाघा बॉर्डर का जमीनी रास्ता भी बंद है। ऐसे में दोनों देशों से यात्रियों को किसी तीसरे देश से होकर आना पड़ता है।
न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, काफी पहले समय से भारत आने की तैयारी कर रहे इन श्रद्धालुओं को उस वक्त झटका लगा, जब पाकिस्तान के इमीग्रेशन अधिकारियों ने एयरोपोर्ट पर ‘नौ ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) की मांग की। इस पर श्रद्धालुओं की तरफ से तर्क दिया गया कि उनमें से कोई भी सरकारी नौकरी में नहीं रहा, न किसी तरह से सरकार का हिस्सा है। उनके पास पासपोर्ट है और कानूनी वीजा है। ऐसे में एनओसी की जरूरत ही नहीं है। हालांकि, इसके बाद भी पाकिस्तानी अधिकारियों ने उन्हें फैसलाबाद एयरपोर्ट पर रोककर रखा और उनकी फ्लाइट को निकाल दिया।
श्रद्धालुओं का कहना है कि इस हरकत की वजह से उनको काफी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा अब उनकी भारत यात्रा भी खतरे में आ गई है।
एयरपोर्ट पर आने के बाद ही शुरू हुई एनओसी की बात- सिख श्रद्धालु
न्यूज 18 से बात करते हुए जत्थे के नेता पापिंदर सिंह ने बताया कि सभी यात्रियों के पास वीजा और पासपोर्ट समेत बाकी दस्तावेज मौजूद थे। उन्हें शुक्रवार की दोपहर 2:10 पर शारजाह की फ्लाइट से निकलना था। वहां से फिर दिल्ली की फ्लाइट पकड़नी थी। टिकट पहले से ही बुक हो चुकी थी। लेकिन इमिग्रेशन अधिकारियों ने आगे नहीं बढ़ने दिया। पहले एनओसी को लेकर कोई बात नहीं कही थी, लेकिन जैसे ही एयरपोर्ट पहुंचे एनओसी के मुद्दे को उठा दिया गया।
फैसलाबाद एयरपोर्ट से वायरल हुए एक वीडियो में एक श्रद्धालु सवाल करता हुआ नजर आता है कि आम नागरिकों के लिए एनओसी का क्या काम है। उन्होंने कहा कि ग्रुप में सभी के पास वैध भारतीय वीजा है। उनके पास पाकिस्तानी पासपोर्ट भी है। ऐसे में एनओसी का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा, “हम सभी आम नागरिक हैं। कोई सरकारी आदमी नहीं है। किसी के ऊपर कोई क्रिमिनल केस नहीं है। ऐसे में पता नहीं क्यों हमसे एनओसी मांगा जा रहा है।”
2 करोड़ से ज्यादा का नुकसान- सिख श्रद्धालु
फैसलाबाद से शाहजाह और वहां से नई दिल्ली की फ्लाइट करने वाले इन 100 लोगों को इस घटना की वजह से बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। एक श्रद्धालु ने बताया कि पूरे समूह को कुल मिलाकर 2 करोड़ पाकिस्तानी रुपए का घाटा लगा है। अगर उन्हें समय पर फ्लाइट पकड़ ली जाने दी जाती, तो वह शुक्रवार की शाम को ही भारत पहुंच जाते और अपने तय समय के मुताबिक काम कर सकते थे।
फिलहाल इन लोगों की आगे की यात्रा कैसे होगी। इस पर संकट बना हुआ है। इन्होंने पाकिस्तानी अधिकारियों से आग्रह किया है कि वह उन्हें अटारी वाघा बॉर्डर के जरिए भारत में प्रवेश की अनुमति दें। हालांकि, आपको बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद से यह जमीनी रास्ता बंद है।
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