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सेशल्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘गार्डियन ऑफ़ द ब्लू होराइज़न’ से सम्मानित किया है. पीएम मोदी सेशल्स के तीन दिवसीय दौरे पर हैं.
सेशल्स के राष्ट्रपति डॉक्टर पैट्रिक हर्मिनी के साथ संयुक्त प्रेस बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘गार्डियन ऑफ़ द ब्लू होराइज़न’ सम्मान मिलना, उनके और भारत के 140 करोड़ लोगों के लिए गर्व और खुशी की बात है.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “मैं इस सम्मान को विनम्रतापूर्वक स्वीकार करता हूं और इसे उन सभी देशों को समर्पित करता हूं जो जलवायु परिवर्तन की चुनौती से लड़ रहे हैं और पर्यावरण संरक्षण को भावी पीढ़ियों के प्रति अपनी दायित्व मानते हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “यह सम्मान अंतरराष्ट्रीय हस्तियों को दिया जाने वाला सेशल्स गणराज्य का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है. यह हमारी ओर से गहरे सम्मान और पहचान का प्रतीक है…”
पीएम मोदी ने क्या कहा
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पीएम मोदी ने कहा कि उनकी यह यात्रा ऐसे ऐतिहासिक समय में हो रही है जब सेशल्स अपनी आज़ादी के 50 साल पूरे कर रहा है. साथ ही भारत और सेशल्स के बीच राजनयिक संबंधों के भी 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं.
उन्होंने कहा कि हिंद महासागर ने सदियों से भारत और सेशल्स के संबंधों को मज़बूत किया है. इसकी लहरों ने दोनों देशों के बीच व्यापार, संस्कृति और लोगों के आपसी संबंधों को लगातार बढ़ावा दिया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और सेशल्स आर्थिक सहयोग, डिजिटल तकनीक और संपर्क बढ़ाने पर मिलकर काम करेंगे. दोनों देशों ने हिंद महासागर क्षेत्र में साझा सुरक्षा और समृद्धि के संकल्प को भी दोहराया.
आइए जानते हैं सेशल्स के बारे में कुछ अहम बातें-
तख़्तापलट के ख़िलाफ़ भारत का ‘फ़्लावर्स आर ब्लूमिंग’ अभियान
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साल 1976 में ब्रिटेन से आज़ादी मिलने के बाद से ही सेशल्स में राजनीतिक तौर पर कई बार तख़्तापलट की कोशिश की गई.
रणनीतिक तौर पर भारत के लिए यह देश हमेशा से अहम रहा है और सेशल्स से भारत के ऐतिहासिक रिश्ते रहे हैं.
साल 1986 में भारत ने सेशल्स में सरकार को बचाने में बड़ी भूमिका निभाई. भारत ने सेशल्स को सैन्य सहायता दी और सेशल्स के तत्कालीन रक्षा मंत्री के नेतृत्व में किए गए तख़्तापलट के प्रयास को नाकाम कर दिया गया.
उस वक़्त साज़िशों से घिरे तत्कालीन राष्ट्रपति रेने ने सुरक्षा के लिए भारत का रुख़ किया था, और भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से किसी भी तख़्तापलट के ख़िलाफ़ दख़ल देने का वादा मांगा था. हालांकि इंदिरा गांधी ने इसकी सार्वनजिक घोषणा से मना कर दिया.
फिर भी, अगले कुछ सालों में, भारत ने छोटी सी सेशल्स एयर फोर्स को दो हेलीकॉप्टर, ट्रेनिंग और टेक्नीशियन दिए.
साल 1986 में सेशल्स के रक्षा मंत्री ओगिल्वी बर्लुइस के नेतृत्व में राष्ट्रपति रेने के ख़िलाफ़ तख़्तापलट की कई कोशिशों के दौरान सेशल्स में भारत की सुरक्षा भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई.
जब भारत को तख़्तापलट की कोशिश की ख़बर मिली, तो उस वक़्त के प्रधानमंत्री राजीव गांधी (जो रक्षा मंत्री भी थे) ने नौसेना प्रमुख एडमिरल आरएच तहिलियानी से संपर्क किया और रेने की मदद करने का मौखिक अनुरोध किया.
संयोग से, भारतीय नौसेना ने पहले ही आइएनएस विंध्यागिरी को सेशल्स के स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लेने के लिए सेशल्स भेजा हुआ था.
विंध्यागिरी के पहुँचने पर उसमें एक इंजीनियरिंग ख़राबी बताई गई. इसके बाद नौसेना खुफिया विभाग के निदेशक और नौसेना संचालन निदेशक ने एक कमोडोर को जानकारी दी.
उन्हें इस ऑपरेशन की कमान संभालने और दिखावे के तौर पर जहाज़ की मरम्मत का काम देखने के लिए कमर्शियल एयरलाइन से सेशल्स भेजा गया था.
भारत ने इस गुप्त ऑपरेशन को ‘फ़्लावर्स आर ब्लूमिंग’ का कोडनेम दिया था.
विशाल कछुओं के लिए मशहूर
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सेशल्स हिन्द महासागर में मौजूद एक द्वीपीय देश है. इसके दक्षिण में मेडागास्कर है, जबकि पश्चिम में समुद्र पार तंज़ानिया और कीनिया जैसे अफ़्रीकी देश हैं.
सेशल्स की राजधानी विक्टोरिया है. इस देश का क्षेत्रफल क़रीब 459 वर्ग किलोमीटर है. यहां की आबादी एक लाख से कुछ ज़्यादा है.
इस देश में अंग्रज़ी, फ़्रेंच और सेशल्स भाषा मुख्य तौर पर बोली जाती है.
सेशल्स को आज़ादी मिलने के बाद इस देश में तख़्तापलट भी हुआ और किराये के लड़ाकों ने हमला भी किया. यहाँ सेना का नाकाम विद्रोह भी हो चुका है.
हालाँकि इन सबके बाद भी सेशल्स ने स्थिरता के साथ आर्थिक तौर पर विकास किया है. प्रति व्यक्ति आय के साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति इस देश में काफ़ी अच्छी है.
ब्रिटिश उपनिवेश रह चुके इस देश की अर्थव्यवस्था में मछली उद्योग और पर्यटन का बड़ा योगदान है.
सेशल्स विशाल कछुओं और समुद्री कछुओं सहित कई तरह के वन्य जीवों के लिए मशहूर है. इस देश का ज़्यादातर हिस्सा प्राकृतिक तौर पर संरक्षित इलाक़े में आता है.
सेशल्स का इतिहास
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साल 1768 में फ़्रांसीसी बाग़ान मालिक और उनके ग़ुलामों ने आमतौर पर निर्जन सेशल्स में बसना शुरू किया.
बाद में ब्रिटेन ने सेशल्स पर क़ब्ज़ा कर लिया. साल 1814 में पेरिस की संधि में इस देश पर ब्रिटेन का औपचारिक रूप से नियंत्रण स्थापित हो गया और यहां के द्वीपों का प्रशासन मॉरीशस से संचालित किया जाने लगा.
साल 1903 में सेशल्स एक स्वतंत्र ब्रिटिश उपनिवेश बन गया. साल 1976 में सेशल्स को ब्रिटेन से आज़ादी मिली. फिर यहां एक गठबंधन की सरकार बनी, जिसमें जेम्स मैनचम राष्ट्रपति और फ़्रांस रेने प्रधानमंत्री बने.
आज़ादी के महज़ तीन साल के अंदर यानी साल 1979 में तत्कालीन प्रधानमंत्री रेने ने तख़्तापलट कर राष्ट्रपति जेम्स मैनचम को सत्ता से हटा दिया.
सन 1979 में सेशल्स ने ख़ुद को एक समाजवादी एकदलीय राज्य घोषित किया, जो 1991 तक कायम रहा.
साल 1981 में भाड़े के दक्षिण अफ़्रीकी सैनिकों ने मैनचम को सत्ता में बहाल करने का प्रयास किया लेकिन वे नाकाम रहे और सेना के नेतृत्व में हुआ विद्रोह असफल रहा.
साल 2020 वेवेल रामकलवान सेशल्स के राष्ट्रपति बने. इस मायने में ये अहम था कि साल 1976 में आज़ादी मिलने के बाद से देश के अलग-अलग सियासी दलों के बीच राष्ट्रपति पद का पहला शांतिपूर्ण हस्तांतरण था.
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