Source :- LIVE HINDUSTAN
अमेरिका और ईरान के बीच जंग का अंत हो गया है। इस शांति समझौते की घोषणा ने वैश्विक बाजारों को राहत दी है। इस समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का प्रस्ताव है। इस कदम से भारत की अर्थव्यवस्था को कई मोर्चों पर राहत मिलने की उम्मीद है।
दरअसल, इस समझौते की वजह से कच्चे तेल के दाम में बड़ी गिरावट देखी गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर करीब 77-78 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई, जो पिछले तीन महीनों का निचला स्तर है। ऐसे में अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम कम होंगे?
क्यों है उम्मीद?
भारत जैसे देश अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करते हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि कच्चे तेल की कीमतें कम होने से भारत का आयात बिल कम हो जाएगा। हालांकि, इसका मतलब ये नहीं कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी सिलेंडर की कीमतें तुरंत कम हो जाएंगी। बता दें कि भारत में ईंधन की खुदरा कीमतें केवल कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करतीं। इनमें रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च, केंद्रीय उत्पाद शुल्क, वैट और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी अहम भूमिका निभाती है।
7 रुपये से ज्यादा बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम
अमेरिका और ईरान की जंग के चरम के दौरान कच्चे तेल की कीमतें फरवरी के 70-72 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। इससे पेट्रोल-डीजल उत्पादन लागत बढ़ी। हालांकि सरकार ने खुदरा कीमतों में संशोधन को मई के मध्य तक टाल दिया था।
सरकार ने 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क 10 रुपये प्रति लीटर घटाया था। पश्चिम बंगाल समेत पांच अहम राज्यों में चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई जबकि सीएनजी छह रुपये प्रति किलोग्राम और एलपीजी 14.2 किलोग्राम सिलेंडर पर 89 रुपये महंगी हुई। इसके बावजूद, खुदरा कीमतें लागत से कम रहने के कारण सरकारी तेल कंपनियों को अभी भी लगभग 650 करोड़ रुपये प्रतिदिन का नुकसान हो रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का पड़ा था असर
बीते फरवरी महीने के अंत में ईरान से जुड़े तनाव शुरू होने के बाद इस जलडमरूमध्य से कच्चे तेल (जिससे पेट्रोल और डीजल बनते हैं) और प्राकृतिक गैस (जिसका उपयोग बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण, सीएनजी एवं घरेलू रसोई गैस के रूप में होता है) की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। इससे कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग बीमा प्रीमियम और मालभाड़ा दरों में तेज बढ़ोतरी हुई।
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