Source :- LIVE HINDUSTAN
मुख्य बातें
- Property Documents: घर, फ्लैट या जमीन खरीदना जिंदगी का बड़ा फैसला होता है
- इस दौरान कई तरह के कागजात सामने आते हैं, लेकिन एग्रीमेंट ऑफ सेल और सेल डीड दो सबसे जरूरी डॉक्यूमेंट हैं
Property Documents: घर, फ्लैट या जमीन खरीदना जिंदगी का बड़ा फैसला होता है। इस दौरान कई तरह के कागजात सामने आते हैं, लेकिन एग्रीमेंट ऑफ सेल और सेल डीड दो सबसे जरूरी डॉक्यूमेंट हैं। अक्सर लोग दोनों को एक ही समझ लेते हैं। यही गलती आगे चलकर परेशानी खड़ी कर सकती है। सिर्फ एग्रीमेंट ऑफ सेल साइन करने या एडवांस पैसा देने से आप उस प्रॉपर्टी के कानूनी मालिक नहीं बन जाते। असली मालिकाना हक ट्रांसफर करने के लिए सेल डीड की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होता है।
एग्रीमेंट ऑफ सेल क्या होता है?
एग्रीमेंट ऑफ सेल यानी सेल समझौता खरीदार और बेचने वाले के बीच होने वाला एक करार है। इसमें दोनों पक्ष यह तय करते हैं कि बेचने वाले अपनी प्रॉपर्टी खरीदार को बेचने के लिए तैयार है और खरीदार उसे खरीदने के लिए सहमत है।
इस डॉक्यूमेंट में आमतौर पर प्रॉपर्टी की पूरी जानकारी, सेल की कीमत, कितनी रकम एडवांस दी गई है, बाकी पैसा कब देना है, रजिस्ट्रेशन कब होगा और प्रॉपर्टी का कब्जा कब मिलेगा जैसी बातें लिखी होती हैं। इसके अलावा अगर सौदे से जुड़ी कोई खास शर्त है तो उसे भी एग्रीमेंट ऑफ सेल में शामिल किया जा सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि एग्रीमेंट ऑफ सेल साइन करने के बाद आप अपने आप उस प्रॉपर्टी के मालिक नहीं बन जाते।
सेल डीड क्या होती है?
सेल डीड वह डॉक्यूमेंट है जिसके जरिए प्रॉपर्टी का मालिकाना हक बेचने वाले से खरीदार को ट्रांसफर किया जाता है। इसमें खरीदार और बेचने वाले की जानकारी, प्रॉपर्टी की जानकारी, सेल की रकम, पेमेंट की जानकारी, अधिकारों का हस्तांतरण और कब्जे से जुड़ी जानकारी दर्ज होती है। सामान्य तौर पर अचल संपत्ति की सेल में सेल डीड को कानूनी तरीके से तैयार और रजिस्टर कराना जरूरी होता है। इसी प्रक्रिया के जरिए प्रॉपर्टी का मालिकाना हक खरीदार के नाम ट्रांसफर होता है।
दोनों में सबसे बड़ा अंतर क्या है?
एग्रीमेंट ऑफ सेल एक वादा या समझौता है, जबकि सेल डीड मालिकाना हक ट्रांसफर करने वाला डॉक्यूमेंट है। एग्रीमेंट ऑफ सेल आमतौर पर अंतिम सेल से पहले होता है। इसमें सौदे की शर्तें तय की जाती हैं। वहीं सेल डीड सेल पूरी होने और मालिकाना हक ट्रांसफर करने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।
एडवांस देने से मालिक नहीं बन जाते
मान लीजिए आपने किसी घर के लिए 10 लाख रुपये एडवांस दे दिए और एग्रीमेंट ऑफ सेल भी साइन कर दिया। इसका मतलब यह नहीं है कि घर कानूनी तौर पर आपका हो गया। ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट की धारा 54 के मुताबिक, सिर्फ प्रॉपर्टी बेचने का कॉन्ट्रैक्ट अपने आप उस प्रॉपर्टी में खरीदार का कोई मालिकाना हक या अधिकार पैदा नहीं करता। इसलिए एडवांस पेमेंट और एग्रीमेंट को मालिकाना हक मिलने के बराबर नहीं समझना चाहिए।
एग्रीमेंट साइन करने से पहले ये चीजें जरूर चेक कर लें
एग्रीमेंट ऑफ सेल पर साइन करने से पहले सिर्फ प्रॉपर्टी की कीमत न देखें। प्रॉपर्टी का सही जानकारी, बेचने वाले का मालिकाना हक, प्रॉपर्टी पर कोई लोन या अन्य कानूनी बोझ, पेमेंट का पूरा शेड्यूल, सेल डीड की रजिस्ट्रेशन की तारीख और कब्जे की शर्तें जरूर चेक कर लें। इसके अलावा, अगर सौदा कैंसिल होता है तो एडवांस रकम वापस कैसे मिलेगी, स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन का खर्च कौन देगा और प्रॉपर्टी के लिए किसी मंजूरी की जरूरत है या नहीं, यह भी पहले से चेक कर लें।
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