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फ़िट दिखने वाले युवाओं को भी क्यों हो रहा हार्ट अटैक? कार्डियोलॉजिस्ट ने ये बताया

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Source :- BBC INDIA

नौजवानों में भी हार्ट अटैक के मामले लगातार बढ़ रहे हैं जिसका मुख्य कारण जीवनशैली को माना जा रहा है (सांकेतिक तस्वीर)

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पहले जब हार्ट अटैक का ज़िक्र होता था, तो ज़्यादातर लोगों के मन में किसी बुज़ुर्ग की छवि उभरती थी. लेकिन अब हालात बदल रहे हैं और नौजवान भी तेज़ी से इसका शिकार बन रहे हैं.

कई बार कोई व्यक्ति बाहर से पूरी तरह फ़िट और तंदुरुस्त दिखाई देता है, लेकिन उसके भीतर दिल से जुड़ी गंभीर समस्याएं विकसित हो रही होती हैं.

बीबीसी पंजाबी के हेल्थ पॉडकास्ट ‘सेहत सीक्रेट्स’ में इसी विषय पर जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. केवल किशन तलवार से बातचीत की गई. डॉ. तलवार वर्तमान में दिल्ली के पीएसआरआई अस्पताल के हार्ट इंस्टीट्यूट के चेयरमैन हैं.

वे एम्स, नई दिल्ली में कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख रह चुके हैं. इसके अलावा, उन्होंने पीजीआई चंडीगढ़ में निदेशक के रूप में भी सेवाएं दी हैं.

पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. केके तलवार को हृदय रोगों के क्षेत्र में चार दशक से अधिक का अनुभव है.

इस बातचीत में यह समझने की कोशिश की गई कि युवाओं में हार्ट अटैक के मामले क्यों बढ़ रहे हैं. साथ ही, यह भी जाना गया कि दिल को स्वस्थ रखने और इस ख़तरे से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है.

बीबीसी पत्रकार प्रियंका धीमान, डॉ. केवल किशन तलवार से बातचीत करते हुए.

दिल को स्वस्थ रखने के लिए नौजवानों को क्या करना चाहिए?

सबसे ज़्यादा ज़रूरी है कि हर रोज़ कसरत की जाए. काम की जगह पर भी कोशिश करें कि लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करें. साथ ही शारीरिक गतिविधियां करते रहें.

रोज़ 30 से 40 मिनट पैदल चलना बहुत ज़रूरी है. कोशिश करें कि 10 से 12 मिनट में एक किलोमीटर की दूरी तय की जाए.

खानपान का भी विशेष ध्यान रखें.

फल और सब्ज़ियां खाएं. अंडा खाना भी अच्छा है. ड्राई फ़्रूट्स को भी अपने आहार में शामिल करें. जो लोग मांसाहारी भोजन करते हैं, वे चिकन और मछली को रोस्ट करके खा सकते हैं.

मटन में वसा ज़्यादा होती है. इसलिए हम इसे कम खाने की सलाह देते हैं. इस बीमारी में आनुवंशिकता की भी बड़ी भूमिका होती है.

इसलिए अगर किसी का कोलेस्ट्रॉल ज़्यादा हो, तो उसे दवाइयां भी लेनी चाहिए. हालांकि मैं यह नहीं कहता कि शुरुआत में ही दवाइयां खाना शुरू कर दें.

पहली कोशिश यही होनी चाहिए कि सही खानपान और कसरत से स्थिति में सुधार हो जाए. इसके अलावा सिगरेट और शराब की आदत छोड़ देनी चाहिए.

सिगरेट कई बीमारियों की जड़ है. इनमें हार्ट अटैक, स्ट्रोक और कैंसर शामिल हैं. नौजवानों को पैसिव स्मोकिंग का भी ध्यान रखना चाहिए.

इसका मतलब है कि आप ख़ुद सिगरेट नहीं पी रहे हैं, लेकिन आपके साथ मौजूद कोई व्यक्ति सिगरेट पी रहा है.

उसका असर भी आपके शरीर पर लगभग उतना ही पड़ता है.

क्या जिम शुरू करने से पहले हार्ट की जांच करानी ज़रूरी है?

सिगरेट पीना नौजवानों में हार्ट अटैक के प्रमुख कारणों में से एक है (सांकेतिक तस्वीर)

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कसरत आपके शरीर के लिए अच्छी है. यह आपको कई बीमारियों से बचाती है.

लेकिन अगर किसी व्यक्ति ने पहले कभी कसरत नहीं की हो और वह अचानक बहुत ज़्यादा कसरत शुरू कर दे, तो उससे फ़ायदे की बजाय नुक़सान भी हो सकता है.

इसलिए जब भी कसरत शुरू करें, तो एकदम से बहुत ज़्यादा कसरत न करें. अपने शरीर को धीरे-धीरे उसकी आदत डालें.

वैसे कसरत शरीर के लिए बहुत ज़रूरी है. यह आपके दिल को भी स्वस्थ रखती है. जैसे किसी मशीन को तेल की ज़रूरत होती है, उसी तरह शरीर के लिए कसरत ज़रूरी है.

लेकिन जब आप कोई भी कसरत शुरू करते हैं, तो कुछ नियमित जांच करवा लेनी चाहिए. जैसे शुगर और ब्लड प्रेशर की जांच.

इसके अलावा हम यह सलाह भी देते हैं कि शुरुआत करने से पहले थोड़ा ट्रेडमिल करके देख लें. अगर कोई समस्या होती है या कोई तकलीफ़ महसूस होती है, तो उसका पता शुरुआत में ही चल जाता है.

अचानक शुरू की गई ज़्यादा कसरत की वजह से कई बार पोटैशियम और इलेक्ट्रोलाइट्स का स्तर कम हो सकता है.

यह दिल से जुड़ी किसी समस्या का कारण बन सकता है.

एक दिन में कितनी कसरत करनी चाहिए?

दिल की अच्छी सेहत के लिए कसरत और शारीरिक गतिविधि ज़रूरी है: डॉ. तलवार. (सांकेतिक तस्वीर)

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हर रोज़ 30 मिनट से 45 मिनट तक कसरत ज़रूर करनी चाहिए. जो व्यक्ति जवान और तंदुरुस्त है, उसे 10 मिनट में एक किलोमीटर तक चलना चाहिए.

अगर आप बैडमिंटन, टेनिस और फ़ुटबॉल जैसे खेल खेल सकते हैं, तो यह भी बहुत अच्छा है. इससे आपका शरीर ज़्यादा आराम महसूस करता है.

क्योंकि जब आप सैर करते हैं, तो आपका दिमाग कुछ-न-कुछ सोचता रहता है. लेकिन जब आप खेल खेलते हैं, तो आपका पूरा ध्यान उसी पर होता है.

वैसे हम सप्ताह में पांच दिन कसरत करने की सलाह देते हैं. लेकिन अगर सातों दिन कसरत की जा सके, तो यह और भी बेहतर है.

क्या नौजवानों में हार्ट अटैक से पहले कोई शुरुआती संकेत मिलते हैं?

नौजवानों में कई बार कोई चेतावनी संकेत नहीं आते. उन्हें अचानक ही हार्ट अटैक आ जाता है.

लेकिन उम्रदराज़ लोगों में हार्ट अटैक से पहले कई चेतावनी संकेत दिखाई देते हैं.

जैसे चलने पर सांस फूलना, सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना और छाती में भारीपन महसूस होना.

लेकिन अगर मैं नौजवानों की बात करूं, तो उनमें अक्सर ये लक्षण दिखाई नहीं देते. उन्हें अचानक ही हार्ट अटैक आता है.

अगर किसी को चलते समय सांस फूलने लगे और छाती में भारीपन महसूस हो, तो उसे डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए.

यह किसी गंभीर समस्या का शुरुआती संकेत हो सकता है.

हार्ट अटैक का दर्द शरीर के किस हिस्से में होता है?

डॉ. तलवार के मुताबिक़, नौजवानों में हार्ट अटैक के लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते और यह अचानक हो सकता है. (सांकेतिक तस्वीर)

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हार्ट अटैक का दर्द छाती की बीच वाली हड्डी के आसपास होता है. यह दर्द जबड़े तक भी जा सकता है. यह दाएं और बाएं दोनों बाजुओं में भी महसूस हो सकता है.

पेट के निचले हिस्से में भी दर्द हो सकता है. कई बार लोग इसे केवल पेट दर्द समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं. ऐसा नहीं करना चाहिए.

हार्ट अटैक से जुड़ी एक और बहुत महत्वपूर्ण बात यह है कि जब किसी को हार्ट अटैक आ रहा हो, तो जितनी जल्दी चिकित्सा सहायता ली जाए, उतनी जल्दी उसका इलाज किया जा सकता है.

दिल की तीन मुख्य धमनियां होती हैं.

अगर इनमें से किसी एक में रुकावट आ जाए, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेकर उसका इलाज कराना चाहिए.

जितनी जल्दी इलाज होता है, मरीज़ उतनी जल्दी ठीक हो जाता है. आजकल पीसीआई नाम की एक प्रक्रिया उपलब्ध है.

इस प्रक्रिया की मदद से खून के थक्के को हटाया जा सकता है.

अगर धमनी में आई रुकावट को नहीं हटाया जाए, तो दिल की मांसपेशी को नुक़सान पहुंचता है.

हार्ट अटैक आने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए?

सबसे पहले अस्पताल पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए. कुछ दवाइयां अपने पास रखी जा सकती हैं. जैसे एस्पिरिन या डिस्पिरिन.

उसे चबा लेना चाहिए. इससे भी तुरंत फ़र्क पड़ता है.

लेकिन सबसे ज़रूरी बात यह है कि आप जितनी जल्दी हो सके चिकित्सा सहायता लें.

दिल की सेहत के लिए कौन से नियमित टेस्ट ज़रूरी हैं?

डॉ. तलवार ने कहा कि शुरुआत हल्की-फुल्की कसरत से करनी चाहिए, ताकि शरीर को इसकी आदत पड़ सके (सांकेतिक तस्वीर)

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शुगर, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और यूरिक एसिड. ये सभी ज़रूरी जांच हैं.

इसके अलावा आजकल सीआरपी टेस्ट कराने की भी सलाह दी जाती है. लेकिन इस बारे में मेरी राय यह है कि सीआरपी कई कारणों से बढ़ सकता है.

हो सकता है कि पहले कोई संक्रमण हुआ हो. उसकी वजह से भी सीआरपी बढ़ सकता है. इससे लोगों के मन में भ्रम पैदा होने लगता है.

एक और बहुत ज़रूरी बात है कि आजकल नौजवान गूगल पर सर्च करते हैं या फिर एआई की मदद लेते हैं.

मैं कहूंगा कि बीमारी के मामले में केवल इन पर निर्भर नहीं होना चाहिए. इससे भ्रम और बढ़ता है.

यह नुक़सान भी पहुंचा सकता है और हमेशा फ़ायदा नहीं देता. कई लोग डॉक्टर के पास जाने की बजाय गूगल या एआई की मदद से दवाइयां लेना शुरू कर देते हैं.

लेकिन कई बार इससे समस्या ठीक होने के बजाय और बढ़ जाती है.

हार्ट अटैक के इलाज का पहला चरण क्या होता है?

वर्तमान समय में सीपीआर को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने की बेहद ज़रूरत है: डॉ. तलवार. (सांकेतिक तस्वीर)

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जब कोई हार्ट अटैक का मरीज़ अस्पताल पहुंचता है, तो वहां पूरा कार्डियक सेटअप मौजूद होता है.

सबसे पहले ईसीजी किया जाता है. इससे हार्ट अटैक के बारे में पता चलता है. इसके बाद ख़ून की जांच की जाती है. फिर पूरे विभाग को अलर्ट कर दिया जाता है, चाहे दिन हो या रात.

डॉक्टरों, नर्सों और तकनीशियनों, सभी को मरीज़ के बारे में जानकारी दी जाती है. क्योंकि यह एक गोल्डन टाइम होता है.

जितनी जल्दी मरीज़ को भर्ती करके उसका इलाज शुरू किया जाता है, उतनी ही जल्दी उसके दिल की मांसपेशी को बचाया जा सकता है.

जितनी जल्दी एंजियोप्लास्टी की जाती है, उतना ही बेहतर परिणाम मिलता है.

हार्ट अटैक के संकेत मिलते ही जितनी जल्दी हो सके मेडिकल मदद लेनी चाहिए (सांकेतिक तस्वीर)

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मान लीजिए कि आसपास ऐसा कोई अस्पताल नहीं है, जहां इस तरह की सुविधा मौजूद हो. ऐसी स्थिति में आजकल कई जगहों पर थ्रोम्बोलाइटिक थेरेपी उपलब्ध है.

तुरंत वहां पहुंचकर थ्रोम्बोलाइटिक थेरेपी ले लेनी चाहिए. इसमें केवल एक इंजेक्शन लगाया जाता है. इसके बाद मरीज़ को आगे किसी बड़े अस्पताल में रेफ़र किया जा सकता है.

इसके अलावा, समाज में सीपीआर के बारे में जागरूकता बढ़ाना भी बहुत ज़रूरी है. सीपीआर यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन.

मान लीजिए किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक आता है और वह तुरंत बेहोश हो जाता है.

अगर उसी समय उसका कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन कर दिया जाए और फिर उसे अस्पताल में भर्ती कराया जाए, तो बहुत से लोगों की जान बचाई जा सकती है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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