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फिल्म ‘सूर्या’ से डॉक्टरों को क्या परेशानी? रिलीज से पहले कटा बवाल, दिल्ली HC कोर्ट पहुंचा मामला

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Source :- LIVE HINDUSTAN

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दिल्ली उच्च न्यायायलय ने सोमवार को केन्द्र सरकार, सीबीएफसी व आने वाली हिंदी फिल्म ”सूर्या: अंत से आरंभ तक” के निर्माताओं से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह फिल्म निजी अस्पतालों के डॉक्टरों को भ्रष्ट दिखाती है। 

फिल्म ‘सूर्या’ से डॉक्टरों को क्या परेशानी? रिलीज से पहले कटा बवाल, दिल्ली HC कोर्ट पहुंचा मामला

दिल्ली उच्च न्यायायलय ने सोमवार को केन्द्र सरकार, सीबीएफसी व आने वाली हिंदी फिल्म ”सूर्या: अंत से आरंभ तक” के निर्माताओं से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह फिल्म निजी अस्पतालों के डॉक्टरों को भ्रष्ट दिखाती है। साथ ही स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देती है। सनी देओल अभिनीत यह फिल्म 20 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने डॉक्टरों के एक समूह द्वारा दायर याचिका पर सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी), इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सूचना व प्रसारण मंत्रालय, फिल्म निर्माता एम एम मूवीज और ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड को नोटिस जारी किया है। पीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 नवंबर की तारीख तय की है। याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश वकील वरुण सिंह ने पीठ से फिल्म के टीजर के प्रदर्शन पर रोक लगाने का आग्रह किया है। हालांकि पीठ ने इस पर कोई आदेश नहीं दिया है।

चार डॉक्टरों (जिनमें ”डॉक्टर्स ऑफ कॉर्पोरेट सोसाइटी” (डीओसीएस) के पदाधिकारी भी शामिल हैं) द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि अधिकारियों ने फिल्म के टीजर को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की है। याचिका में कहा गया है कि इस तरह की बिना पुष्टि वाली व मानहानि करने वाली सामग्री से पैदा होने वाला खतरा महज एक कल्पना नहीं है। याचिका के अनुसार यह टीजर फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देता है। ये स्वास्थ्य कर्मी देश के स्वास्थ्य ढांचे को संभालने का काम करते हैं। पहले ही मरीजों के नाराज परिजनों के हमलों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में यह टीजर कॉर्पोरेट अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों के लिए एक वास्तविक खतरा पैदा करता है।

याचिका में मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा गया है कि यह फिल्म मलयालम फिल्म जोसेफ का हिंदी रूपांतरण है। जोसेफ 16 नवंबर 2018 को रिलीज हुई थी। इसके निर्देशक भी एम. पद्मकुमार ही थे। याचिका के मुताबिक जोसेफ एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी की कहानी है, जो एक ऐसे रैकेट का पर्दाफाश करता है, जिसमें निजी अस्पतालों में ब्रेन-स्टेम डेथ (दिमाग की नसों के काम करना बंद कर देने) का गलत सर्टिफिकेट देकर अंगों को निकाला जाता है।

यह याचिका डॉ. निशांत सोनी, डॉ. आशीष तोमर, डॉ. रवि भाटिया व डॉ. शिवम वत्सल ने दायर की है, जो यहां के अलग-अलग कॉर्पोरेट अस्पतालों में प्रैक्टिस करते हैं। इसमें अधिकारियों से यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वे टीजर की जांच करें। याचिका में यह भी मांग की गई है कि जब तक सक्षम अधिकारी टीजर की जांच न कर लें, तब तक इसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से हटा दिया जाए या ब्लॉक कर दिया जाए। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि टीजर में एक निजी अस्पताल को दिखाया गया है, जो ब्रेन-स्टेम डेथ घोषित होने के बाद एक युवती के अंगों को दान करने के लिए सहमति लेता है। साथ ही इसमें डॉक्टरों पर मरीजों से ज्यादा पैसे वसूलने, अनावश्यक टेस्ट करवाने व कमीशन लेने का आरोप लगाया गया है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN