Source :- LIVE HINDUSTAN
न्यूक्लियर प्लांट का कामकाज देखने वाली फ्रांसीसी कंपनी EDF के अनुसार, ठीक एक साल पहले भी इसी तरह जेलीफिश के हमले के कारण पूरे प्लांट के कामकाज में रुकावट आई था।
उत्तरी फ्रांस में स्थित पश्चिमी यूरोप के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा स्टेशन ग्रेवलाइन्स (Gravelines Nuclear Power Station) में समुद्री जीवों के कारण बिजली प्रोडक्शन ठप्प होने का अनोखा मामला सामने आया है। समुद्र से आने वाले पानी के कूलिंग पंपों और फिल्टरों में जेलीफिश का एक विशाल झुंड फंस जाने के बाद प्लांट के तीन रिएक्टरों को पूरी तरह से बंद करना पड़ा है।
प्लांट का कामकाज देखने वाली फ्रांसीसी कंपनी EDF के अनुसार, ठीक एक साल पहले भी इसी तरह जेलीफिश के हमले के कारण पूरे प्लांट के कामकाज में रुकावट आई था।
6 में से केवल 1 रिएक्टर पूरी क्षमता पर चालू
ग्रेवलाइन्स न्यूक्लियर प्लांट में 900-मेगावाट क्षमता की कुल 6 रिएक्टर हैं, जो कुल 5.4 गीगावाट बिजली उत्पन्न करती हैं। इस घटना के बाद प्लांट का स्टेटस यह है:
- रिएक्टर 2, 3 और 4: जेलीफिश का झुंड पंपों में फंसने के बाद पूरी तरह बंद किए गए।
- रिएक्टर 1: एहतियात के तौर पर इसका प्रोडक्शन घटाकर 50% कर दिया गया है।
- रिएक्टर 5: पहले से ही रेगुलर मेंटेनेंस के लिए बंद था।
- रिएक्टर 6: वर्तमान में केवल यही एक यूनिट पूरी क्षमता से चल रही है।
कंपनी (EDF) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया, ‘इस स्थिति से सुविधाओं की सुरक्षा, हमारे कर्मियों की सुरक्षा या पर्यावरण पर कोई असर नहीं पड़ा है। प्लांट की सुरक्षा सुनिश्चित करने और रिएक्टरों को राष्ट्रीय बिजली ग्रिड से जल्द से जल्द जोड़ने के लिए ऑन-साइट टीमें जुटी हुई हैं।”
24 घंटे गश्त कर रहीं नाव और वैक्यूम ट्रक तैनात
जेलीफिश के संकट से निपटने के लिए तटीय इलाकों में युद्धस्तर पर सफाई और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
EDF ने स्थानीय मछली पकड़ने वाले संगठनों और समुद्री बचाव दल के साथ साझेदारी कर तीन नावों को तैनात किया है। ये नावें 24 घंटे समुद्र में गश्त कर जालों के जरिए जेलीफिश को पकड़कर गहरे समुद्र में वापस छोड़ रही हैं।
वाटर इंटेक कैनाल में पहले से फंसे जेलीफिश को वैक्यूम ट्रकों की मदद से निकाला जा रहा है। फिल्टर ड्रम स्क्रीन पर जेलीफिश के जमाव का तुरंत पता लगाने के लिए फिक्स्ड डिजिटल कैमरे लगाए गए हैं।
फ्रांस के पावर ग्रिड पर दोहरा संकट
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब फ्रांस पहले से ही भीषण गर्मी और सूखे के कारण बिजली संकट से जूझ रहा है। भीषण गर्मी के कारण नदियों का पानी गर्म होने से जून और जुलाई में भी कई परमाणु रिएक्टरों का प्रोडक्शन घटाना पड़ा था। हालिया आंकड़े दर्शाते हैं कि फ्रांस के परमाणु ऊर्जा उत्पादन में पहले से ही 15.6% की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
वैश्विक स्तर पर इससे पहले 2013 में स्वीडन और 1999 में जापान के न्यूक्लियर प्लांट भी जेलीफिश के हमलों के कारण बंद हो चुके हैं।
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