Source :- INDIATV NEWS

राजस्थान के उदयपुर के बहुचर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड में आरोपियों को राजस्थान हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने मामले के सभी आठ आरोपियों की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब सभी आठ आरोपियों के खिलाफ आतंकवाद से जुड़ी धाराओं के तहत मुकदमा चलेगा। हाई कोर्ट ने एनआईए की विशेष अदालत की ओर से आरोप तय करने के दिए गए आदेश में किसी तरह का हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।
दरअसल, कन्हैयालाल हत्याकांड में एनआईए की विशेष अदालत ने आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में आरोप तय किए थे। इसमें आतंकवाद से संबंधित धाराएं भी शामिल थीं। आरोपियों की ओर से इन धाराओं के तहत मुकदमा चलाने और आरोप तय करने की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए राजस्थान हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं। आरोपियों ने विशेष अदालत के आदेश पर सवाल उठाते हुए हाई कोर्ट से राहत मांगी थी।
हाई कोर्ट ने खारिज की आरोपियों की याचिका
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने आरोपियों की दलीलों को स्वीकार नहीं किया और सभी आठ याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि एनआईए की विशेष अदालत की ओर से आरोप तय करने के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। इसके साथ ही आरोपियों के खिलाफ आतंकवाद से जुड़ी धाराओं में मुकदमा चलने का रास्ता साफ हो गया है।
दुकान पर दिनदहाड़े हुई थी हत्या
गौरतलब है कि उदयपुर में 28 जून 2022 को कन्हैयालाल की उनकी दुकान पर दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद पूरे राजस्थान सहित देशभर में आक्रोश फैल गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जांच अपने हाथ में ली थी। जांच के दौरान कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी और उनके खिलाफ अदालत में आरोप पत्र पेश किया गया था। अब राजस्थान हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। इस फैसले पर पूरे मामले की न्यायिक प्रक्रिया के लिहाज से नजर रहेगी।
बता दें कि NIA की विशेष अदालत ने 12 जनवरी 2024 और 13 फरवरी 2024 को आरोपियों के खिलाफ UAPA, IPC और आर्म्स एक्ट के तहत आरोप तय किए थे। इस मामले में, NIA के वकीलों ने दलील दी कि UAPA के प्रावधानों के तहत ‘आपराधिक साजिश’ (criminal conspiracy) का दायरा बहुत व्यापक है। इसमें न केवल किसी आतंकी घटना को अंजाम देना शामिल है, बल्कि उस घटना के लिए साजिश रचना, प्रयास करना, उकसाना, सलाह देना, मदद करना और तैयारी करना भी शामिल है। यह जरूरी नहीं है कि आतंकी घटना को पूरी तरह से अंजाम दिया ही गया हो।
रिपोर्ट-भगवान प्रजापत
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