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बांग्लादेश के अहम परमाणु प्रोजेक्ट के लिए यूरेनियम पहुँचने में देरी का पाकिस्तान से क्या संबंध है?

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Source :- BBC INDIA

रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट की पहली यूनिट (फ़ाइल फ़ोटो).

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पढ़ने का समय: 6 मिनट

बांग्लादेश के रूपपुर परमाणु बिजलीघर की दूसरी यूनिट के लिए रूस से आने वाला यूरेनियम तय समय पर देश नहीं पहुँच सका.

बांग्लादेश में कुछ लोग इस देरी के लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं. उनका दावा है कि पाकिस्तान ने यूरेनियम लेकर आने वाली उड़ान को अपने हवाई क्षेत्र से गुज़रने की अनुमति नहीं दी और इसी वजह से यह स्थिति पैदा हुई.

यह मामला बांग्लादेश में बहस, आलोचना और विवाद का विषय बन गया है. सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर अलग-अलग राय और टिप्पणियां सामने आ रही हैं.

सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि हाल के दिनों में बांग्लादेश और पाकिस्तान के रिश्तों में सुधार के बावजूद पाकिस्तान ने ऐसा फ़ैसला क्यों किया?

इस देरी पर पाकिस्तान ने क्या कहा?

रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए रूस में बनाई गई फ़्यूल असेंबली (फ़ाइल फ़ोटो).

इस मामले में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर ने बीबीसी उर्दू के संवाददाता उमर दराज़ नंगियाना से बात की.

उन्होंने कहा, “यह मामला उड़ान के रास्ते और हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति से जुड़ी तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया का है.”

“ऐसे मामलों में कई बार विमानन संस्थाओं और दूसरे संबंधित अधिकारियों के बीच तालमेल की ज़रूरत होती है. इसकी वजह से उड़ानों के कार्यक्रम में बदलाव भी हो सकता है.”

इस बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि तय समय पर यूरेनियम नहीं पहुँचने के कारण क्या रूपपुर परमाणु परियोजना से व्यावसायिक स्तर पर बिजली उत्पादन शुरू होने में और देरी होगी?

माना जा रहा है कि बांग्लादेश के अंदरूनी राजनीतिक हालात और बिजली आपूर्ति की स्थिति के कारण इस मामले पर बहस और बढ़ गई है.

यह घटना ऐसे समय हुई है, जब ईंधन संकट के कारण बांग्लादेश में बिजली आपूर्ति की स्थिति पहले ही काफ़ी मुश्किल बनी हुई है.

देश भर में बढ़ती बिजली कटौती की वजह से सरकार पर भी काफ़ी दबाव है.

इन हालात में बांग्लादेश चाहता है कि बिजली संकट से निपटने के लिए रूपपुर परमाणु बिजलीघर से पैदा होने वाली बिजली को जल्द से जल्द राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ा जाए.

लेकिन तकनीकी समस्याओं और समय पर यूरेनियम की आपूर्ति न होने के कारण उत्पादन शुरू होने में और देरी होने का डर पैदा हो गया है.

हालांकि, यूरेनियम की आपूर्ति के अगले कार्यक्रम को लेकर रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोसाटॉम पहले ही एक बयान जारी कर चुकी है.

ये मुद्दा इतना संवेदनशील क्यों है?

दुनिया भर में परमाणु ईंधन को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाना बेहद संवेदनशील मामला माना जाता है. इसके लिए विशेष नियमों और प्रोटोकॉल का पालन करना होता है.

अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक़, परमाणु सामग्री ले जाने वाली उड़ान को जिन देशों के हवाई क्षेत्र से गुज़रना होता है, उनमें से हर देश से अलग-अलग राजनयिक अनुमति लेनी पड़ती है. इसे ओवरफ़्लाइट क्लीयरेंस कहा जाता है.

रोसाटॉम के सूत्रों के मुताबिक़, हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति समय पर नहीं मिलने के कारण रूपपुर परमाणु परियोजना के लिए यूरेनियम लेकर आने वाली उड़ान का कार्यक्रम रद्द करना पड़ा.

हालांकि, रोसाटॉम ने आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान का नाम नहीं लिया है.

इसके बाद हाल के दिनों में बांग्लादेश और पाकिस्तान के रिश्तों में आए सुधार को लेकर भी सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं.

लोग सवाल कर रहे हैं कि पाकिस्तान ने ऐसा फ़ैसला क्यों किया?

पबना में बना रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट (फ़ाइल फ़ोटो).

इस मामले को लेकर बांग्लादेश में चल रही बहस, आलोचना और विवाद के बीच बीबीसी उर्दू ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से उसका पक्ष जानने की कोशिश की.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर ने बीबीसी उर्दू के संवाददाता उमर दराज़ नंगियाना से कहा कि पाकिस्तान राजनयिक उड़ानों और अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल से जुड़ी सभी अर्ज़ियों पर तय नियमों और नागरिक उड्डयन की प्रक्रिया के मुताबिक़ समय पर कार्रवाई करता है.

उन्होंने कहा, “सामने आ रही रिपोर्टों से पता चलता है कि यह मामला उड़ान के रास्ते और हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति से जुड़ी तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया का है.”

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आगे कहा, “पाकिस्तान, बांग्लादेश के साथ अपने रिश्तों को बहुत अहमियत देता है.”

“इसलिए इस मामले को इसके सही तकनीकी संदर्भ में देखा जाना चाहिए. ऐसी रिपोर्टों या दावों को बेवजह अहमियत नहीं दी जानी चाहिए, जो इस मामले को ग़लत तरीक़े से पेश करके दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं.”

बिजली उत्पादन शुरू होने में देरी

बिजली कटौती ने देश के आम लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है (सांकेतिक तस्वीर).

इस साल अप्रैल में रूपपुर परमाणु बिजलीघर की पहली यूनिट के रिएक्टर वेसल में आधिकारिक तौर पर ईंधन डालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी.

लेकिन अब तक वहां से व्यावसायिक स्तर पर बिजली उत्पादन शुरू नहीं हो पाया है.

घोषणा की गई थी कि सितंबर से परीक्षण के तौर पर बिजली उत्पादन शुरू हो जाएगा.

लेकिन वास्तविकता यह थी कि सितंबर में बिजली मिलने की संभावना नहीं थी. अब यह भी साफ़ नहीं है कि इस साल के आख़िर तक बिजली उत्पादन शुरू हो पाएगा या नहीं.

इस महीने की शुरुआत में बांग्लादेश के विज्ञान और तकनीक मंत्री फ़क़ीर महबूब इनाम ने बीबीसी बांग्ला को बताया था कि परमाणु रिएक्टर के एक उपकरण में ख़राबी आने की वजह से समस्या पैदा हुई है.

इस उपकरण को पायलट ऑपरेटेड रिलीफ़ वाल्व यानी पीओआरवी कहा जाता है.

उन्होंने बीबीसी बांग्ला से कहा, “रूपपुर में वाल्व से जुड़ी यह समस्या अचानक सामने आई. इसे पीओआरवी वाल्व कहा जाता है. यही हमारे लिए परेशानी पैदा कर रहा है.”

“हमारे वैज्ञानिक और रूसी वैज्ञानिक मिलकर इस समस्या को हल करने की कोशिश कर रहे हैं.”

अब इस बिजलीघर की दूसरी यूनिट के लिए ईंधन भी तय समय पर नहीं पहुंच पाया है.

इसलिए व्यावसायिक स्तर पर बिजली उत्पादन शुरू होने में और देरी की आशंका बढ़ गई है.

हालांकि, यूरेनियम की आपूर्ति में देरी होने के बाद रोसाटॉम ने एक बयान जारी किया है.

बयान में कहा गया है कि रूपपुर परमाणु बिजलीघर की दूसरी यूनिट के लिए परमाणु ईंधन की आपूर्ति अक्टूबर 2026 में शुरू होगी और यह प्रक्रिया दिसंबर तक चलेगी.

रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी ने यह भी बताया कि समझौते की शर्तों और परियोजना के कार्यक्रम के मुताबिक़ यह ईंधन कई उड़ानों के ज़रिए पहुंचाया जाएगा.

यानी यूरेनियम की जो खेप सितंबर में पहुंचनी थी, वह अब अक्टूबर से दिसंबर के बीच कई चरणों में पहुंचेगी.

बिजली संकट के बीच बढ़ी चिंता

यूरेनियम पहुंचने में यह देरी ऐसे समय हुई है, जब बांग्लादेश में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर पैदा हो चुका है.

एलएनजी के आयात में कमी आई है. बकाया बिलों के कारण कई निजी बिजलीघर भी बंद हो गए हैं.

इस वजह से पूरे देश में बिजली कटौती बढ़ गई है.

सरकार को उम्मीद थी कि रूपपुर से 1,200 मेगावॉट बिजली राष्ट्रीय ग्रिड में जुड़ने के बाद इस संकट में काफ़ी कमी आएगी.

इसके साथ ही महंगे तेल से चलने वाले बिजलीघरों पर देश की निर्भरता भी कम हो जाएगी.

लेकिन पहली यूनिट में वाल्व से जुड़ी तकनीकी समस्या और दूसरी यूनिट के लिए ईंधन पहुंचने में देरी के कारण पूरी स्थिति को लेकर चिंता और बढ़ गई है.

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दूसरी यूनिट का ईंधन अक्टूबर से दिसंबर के बीच पहुंच भी जाता है और परीक्षण के सभी चरण सफलतापूर्वक पूरे हो जाते हैं, तब भी दूसरी यूनिट से व्यावसायिक स्तर पर बिजली उत्पादन 2027 के बीच से पहले शुरू होना संभव नहीं होगा.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS