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ब्राज़ील में दक्षिणपंथी राजनीति को झटका, लूला चौथी बार बनेंगे राष्ट्रपति

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Source :- BBC INDIA

ब्राज़ील

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ब्राज़ील के नेता लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने शानदार वापसी करते हुए राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की है.

इस जीत के साथ 80 वर्षीय लूला को चौथी बार राष्ट्रपति बनने का मौक़ा मिला है.

उन्होंने देश के राष्ट्रपति चुनाव में कट्टर दक्षिणपंथी प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो को मामूली अंतर से हराया.

लगभग सभी वोटों की गिनती पूरी होने के बाद, रविवार को लैटिन अमेरिका के सबसे बड़े लोकतंत्र में हुए चुनाव के दूसरे दौर में लूला को 51.76 फीसदी वोट मिले, जबकि जेल में बंद पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.24 फीसदी वोट मिले.

लूला की जीत कई चुनावी सर्वे के अनुमानों के उलट रही. इन सर्वे में बोल्सोनारो को मामूली बढ़त दी गई थी. इस महीने की शुरुआत में पहले दौर के मतदान में 45 वर्षीय सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो ने लगभग दो प्रतिशत अंकों की बढ़त हासिल की थी.

वामपंथी नेता लूला इससे पहले 2003 से 2010 तक राष्ट्रपति रह चुके हैं. चार साल पहले उन्होंने तीसरी बार राष्ट्रपति पद हासिल किया था.

हालांकि, रविवार को मतदान की प्रक्रिया विवादों से घिर गई. सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने मतदान केंद्रों के बंद होने का निर्धारित समय क़रीब आने पर मतदान की अवधि दो घंटे बढ़ाने का आदेश दिया.

यह फ़ैसला लूला के गठबंधन की उन शिकायतों के बाद आया, जिनमें कई राज्यों में सार्वजनिक परिवहन से जुड़ी समस्याओं का ज़िक्र किया गया था. ब्राज़ील के कई नागरिक मतदान केंद्रों तक पहुँचने के लिए सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर हैं.

कहा जा रहा है कि लैटिन अमेरिका में दक्षिणपंथी दलों की चुनावी जीत के रुझान को पलटते हुए लूला की दोबारा जीत से इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने की अमेरिकी महत्वाकांक्षाओं को झटका लगा है.

पूर्व मेटल वर्कर लूला 1989 में पहली बार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने के बाद से ब्राज़ील में वामपंथ के सबसे प्रमुख नेता रहे हैं. इसके बावजूद, उन्हें अब अपने राजनीतिक जीवन की सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है.

उनका नया कार्यकाल पाँच जनवरी 2027 से शुरू होने वाला है. इसकी शुरुआत देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़ी चुनौतियों के बीच होगी. इनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाराज़गी भी शामिल है.

ट्रंप ने लूला के प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो का सीधे तौर पर समर्थन नहीं किया था. हालांकि, उन्होंने कोलंबिया और होंडुरास में राष्ट्रपति चुनाव जीतने वाले दक्षिणपंथी उम्मीदवारों का समर्थन किया था. इसके बावजूद, इसमें बहुत कम संदेह है कि अमेरिकी प्रशासन 21.3 करोड़ आबादी वाले ब्राज़ील की सत्ता में किसी रूढ़िवादी नेता को देखना अधिक पसंद करता.

व्हाइट हाउस लैटिन अमेरिका को अमेरिकी प्रभाव का क्षेत्र मानता है. ट्रंप प्रशासन चाहता है कि इस क्षेत्र में ऐसे नेता सत्ता में रहें, जो रक्षा, सुरक्षा और व्यापार समेत विभिन्न मुद्दों पर उसकी नीतियों का समर्थन करें.

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अमेरिका के लिए झटका?

पूर्व ट्रेड यूनियन नेता लूला ने डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक विदेश नीति की आलोचना की है, जबकि बोल्सोनारो ने व्हाइट हाउस में अपने वैचारिक सहयोगी के साथ क़रीबी संबंध बनाने का वादा किया था.

पिछले साल से अमेरिका ने ब्राज़ील पर व्यापार शुल्क और अन्य प्रतिबंध लगाए हैं.

शुरुआती दौर में फीके रहे चुनाव प्रचार के बाद लूला ने पहले चरण के मतदान के नतीजों के बाद कई तरह की राहतों की घोषणा की. इनमें क़र्ज़ माफ़ी, वीकेंड में मुफ़्त सार्वजनिक परिवहन और गरीब छात्रों के लिए वित्तीय सहायता शामिल थीं.

विपक्ष ने मौजूदा राष्ट्रपति लूला पर वोट ख़रीदने का आरोप लगाया और कहा कि इन उपायों से सरकारी वित्तीय स्थिति और ख़राब होगी.

फ्लावियो बोल्सोनारो के पिता जायर बोल्सोनारो को पिछले साल 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में दोबारा जीत हासिल करने की नाकाम कोशिश के बाद तख्तापलट की साज़िश रचने का दोषी पाया गया था.

जायर बोल्सोनारो फ़िलहाल 27 साल की सज़ा काट रहे हैं. स्वास्थ्य कारणों से उन्हें इस समय घर पर रखा गया है.

संगठित अपराध के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई के वादे के साथ फ्लावियो बोल्सोनारो ने सरकारी ख़र्च में कटौती और टैक्स कम करने का भी वादा किया था.

पहले दौर के नतीजों के बाद निवेशकों ने बोल्सोनारो की कारोबारी हितों के अनुकूल नीतियों की संभावनाओं का स्वागत किया था.

तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद लूला की जीत ने आधुनिक ब्राज़ील के इतिहास के सबसे प्रभावशाली राजनेताओं में उनकी जगह को और मज़बूत किया है. सार्वजनिक जीवन में लगभग पांच दशक बिताने के बाद यह जीत उनके राजनीतिक करियर की एक अहम उपलब्धि है.

मेटल इंडस्ट्री में काम कर चुके लूला ने पहली बार 2003 से 2010 तक देश की सरकार का नेतृत्व किया था. इस दौरान उन्होंने कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू कीं, जिनसे ग़रीबी कम करने में मदद मिली.

बाद में भ्रष्टाचार के आरोपों में उन्हें जेल जाना पड़ा. हालांकि, बाद में रिहा कर दिया गया था. इसके बाद चार साल पहले उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो को हराकर सक्रिय राजनीति में वापसी की.

विपक्षी उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो की हार उनके पिता की ओर से क़रीब एक दशक पहले शुरू किए गए कट्टर लोकलुभावन राजनीतिक आंदोलन के लिए झटका है. यह आंदोलन अब ब्राज़ील की राजनीति में दक्षिणपंथ का सबसे प्रभावशाली धड़ा बन चुका है.

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लूला का वादा

ब्राज़ील तेल के समृद्ध भंडार वाला देश है और यहाँ रेयर अर्थ मिनरल्स का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा भंडार मौजूद है. दक्षिण अमेरिका में ब्राज़ील एकमात्र बड़ा देश है, जहाँ दक्षिणपंथी नेता सत्ता में नहीं है. लूला को बड़े पैमाने पर चीन के प्रति दोस्ताना रुख़ रखने वाला नेता माना जाता है.

फ्लावियो बोल्सोनारो ने ब्राज़ील को अमेरिका के और क़रीब लाने का वादा किया था. वहीं, लूला ने अमेरिका को चुनाव में हस्तक्षेप न करने की चेतावनी दी थी. उन्होंने ज़ोर देकर कहा था कि ब्राज़ील “कभी भी किसी का पिछलग्गू नहीं बनेगा”.

हालांकि, लूला की जीत से व्हाइट हाउस में निराशा हो सकती है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाले लोगों ने इसका स्वागत किया है. उन्हें आशंका थी कि बोल्सोनारो की जीत से ब्राज़ील के प्रभावशाली कृषि व्यवसाय और खनन क्षेत्रों की ताक़त बढ़ जाती.

उन्होंने जायर बोल्सोनारो के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान अमेजन में वनों की कटाई और जंगलों में आग लगने की रिकॉर्ड घटनाओं का हवाला दिया था. उनका तर्क था कि जूनियर बोल्सोनारो के सत्ता में आने पर पर्यावरण संबंधी नियमों में ढील दी जा सकती थी, जिससे इस महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को फिर नुक़सान पहुँच सकता था.

चुनाव में बोल्सोनारो की लिबरल पार्टी ने सबसे बड़ी बढ़त हासिल की.

इसके बावजूद, लूला की वर्कर्स पार्टी पहले और दूसरे दौर के मतदान के बीच बड़े पैमाने पर रैलियां आयोजित करने में सफल रही. इससे पार्टी को ज़मीनी स्तर पर हासिल मज़बूत समर्थन का पता चला.

चुनाव से पहले लूला ने इस मुक़ाबले को “ब्राज़ील के लिए निर्णायक मोड़” बताया था.

उन्होंने शासन के एक नए तरीक़े के जरिए ब्राज़ील की विरोधी राजनीतिक विचारधाराओं के बीच की खाई को पाटने का वादा किया था. चुनाव से पहले व्हाट्सऐप पर लाइव प्रसारण के दौरान उन्होंने कहा था कि यह देश अब पहले जैसा कभी नहीं रहेगा.

हालांकि, उन्होंने शासन के इस नए तरीक़े के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दी. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि वह ज़्यादा इंसाफ़ वाले देश के लिए संघर्ष करते रहेंगे, जहाँ सभी को अवसर मिलें और नीतियां जनता की ज़रूरतों के अनुरूप हों”.

लेकिन संसद में बड़े पैमाने पर विरोध का सामना कर रहे लूला के लिए यह संघर्ष पहले के तीन कार्यकालों की तुलना में कहीं अधिक मुश्किल साबित हो सकता है. अपने चौथे कार्यकाल के अंत तक उनकी उम्र 85 वर्ष हो जाएगी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS