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भारतवंशी नावी पिल्लई को शांति का नोबेल मिलते ही भड़के ट्रंप, उनसे जुड़े कोर्ट पर ही लगा दिए प्रतिबंध

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Source :- LIVE HINDUSTAN

भारवंशी नावी पिल्लई को नोबेल का शांति पुरस्कार मिलने के बाद डोनाल्ड ट्रंप भड़के हुए हैं. उन्होंने आनन-फानन में इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट पर ही प्रतिबंध लगा दिए। उन्होंने नॉर्वे को खूब खरी-खोटी सुनाई है।

शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए आठ युद्ध रुकवाने का दावा करने वाले डोनाल्ड ट्रंप को इस बार भी नोबेल समिति ने झटका दे दिया। अब डोनाल्ड ट्रंप नॉर्वे पर बुरी तरह भड़के हुए हैं। इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) की पूर्व जज भारतवंशी नवनेथम या नावी पिल्लई को शांति का नोबेल पुरस्कार दिया जा रहा है। इस फैसले के कुछ देर बाद ही डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इंटरनेशन क्रिमिनल कोर्ट पर ही प्रतिबंध लगा दिए।

नरसंहार और युद्ध अपराध जैसे मामलों पर सुनवाई करने वाले आईसीसी की निंदा करते हुए ट्र्ंप प्रशासन ने कहा, यह कानून का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि यह कोर्ट स्वतंत्र नहीं है बल्कि जिन देशों ने मिलकर इसे बनाया है उनका हित भी इसमें छिपा हुआ है। अमेरिका ने धमकी देते हुए कहा कि अगर कोर्ट हदें पार करेगा तो उसे बुरे परिणाम भुगतने होंगे।

नॉर्वे पर भी भड़के डोनाल्ड ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को नोबेल समितिके फैसले को शर्मनाक बताया और कहा कि यह बेहद अपमानजनक है। उन्होंने कहा कि इस फैसले ने नॉर्वे की छवि पर दाग लगा दिया है जो कि जल्दी नहीं मिटेगा। उन्होंने कहा कि वह नॉर्वे के इस फैसले को कभी नहीं भूलेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे शख्स को शांति का नोबेल दे दिया गया है जिसका नाम उन्होंने कभी सुना ही नहीं। उनको कोई जानका ीह नहीं है। ट्रंप ने कहा कि शांति के लिए उनके काम को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि युद्ध रुकवाने के लिए उन्हें 8 नोबेल मिलने चाहिए थे।

उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान को यूरोप को तबाह करने से रोक दियया है। उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम करवाने का दावा 11 से ज्यादा बार किया है। डोनाल्ड ट्रंप खुलकर नोबेल प्राइज के लिए दावेदारी पेश करते रहे हैं। इस बार नोबेल का शांति पुरस्कार मानवाधिकारों की रक्षा के लिए दक्षिण अफ्रीका में जन्मीं भारतवंशी नवनेथनम नवी पिल्लै को दिया गया है। वह संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त भी रह चुकी हैं।

पिल्लै का जन्म 1941 में हुआ था। वह शुरू में वकालत करती थीं। उन्होंने नेल्सन मंडेला समेत कई राजनीतिक बंदियों की रिहाई की भी लड़ाई लड़ी थी। उनके पूर्वज भारत में तमिलनाडु के रहने वाले थे और वे दक्षिण अफ्रीका गए थे। नावी पिल्लै महात्मा गांधी के विचारों से काफी प्रभावित हैं। वह कई बार भारत के दौरे पर आ चुकी हैं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN