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ट्रंप ने 9 अक्टूबर को घोषणा की थी कि रूस 3,00,000 टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा। इसके बाद नवंबर में 5,00,000 टन और ‘इसके तुरंत बाद’ 10 लाख टन डीजल की अतिरिक्त आपूर्ति की जाएगी।
रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका पिछले काफी समय से भारत को निशाना बना रहा है। लेकिन अब खुद अमेरिका भी वही काम करने जा रहा है। अमेरिका भी रूस से डीजल खरीदेगा। इसके बाद ट्रंप के सुर बदलते दिख रहे हैं। दरअसल रूस के साथ डीजल सप्लाई समझौते को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं। इस पर उन्होंने कहा कि रूस की रिफाइनरियों से मिलने वाला ईंधन वैश्विक बाजार को स्थिर करने के लिए है, जो ऊंची कीमतों से प्रभावित हुआ है।
अमेरिका ने जारी किया लाइसेंस
ट्रंप ने 9 अक्टूबर को घोषणा की थी कि रूस 3,00,000 टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा। इसके बाद नवंबर में 5,00,000 टन और ”इसके तुरंत बाद” 10 लाख टन डीजल की अतिरिक्त आपूर्ति की जाएगी। इन खेपों की आपूर्ति आसान बनाने के लिए अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने एक अस्थायी लाइसेंस जारी किया है। इसके तहत वैश्विक बाजारों में रूसी डीजल की आपूर्ति पर लगे प्रतिबंधों में सात अप्रैल, 2027 तक ढील दी गई है।
यह कदम अमेरिका में नवंबर में होने वाले कांग्रेस के मध्यावधि चुनावों से पहले उठाया गया है। ईरान युद्ध के कारण आपूर्ति बाधित होने से डीजल की कीमतों में तेज उछाल आया है। ट्रंप ने मंगलवार को यहां संवाददाताओं से कहा, ”यह डीजल का समझौता है। हमारे लिए नहीं। इसे दुनिया के बाजार में जारी किया जा रहा है। इसकी आपूर्ति हमें नहीं की जा रही है।” उन्होंने पिछले सप्ताह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के बाद घोषित इस अप्रत्याशित समझौते पर बढ़ती चर्चाओं के बीच यह बात कही।
ट्रंप को मिला भारत पर टैरिफ लगाने का अधिकारी
रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक, दोनों दलों के नेताओं ने इस समझौते की आलोचना की है। ट्रंप ने यह घोषणा अमेरिकी कांग्रेस द्वारा रूस पर व्यापक प्रतिबंध लगाने और चीन तथा भारत समेत रूस के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर टैरिफ लगाने का अधिकार दिए जाने के तीन सप्ताह बाद की थी।
ट्रंप ने कहा, ”यह डीजल का ऐसा समझौता है, जिसके तहत ईंधन वैश्विक बाजार के लिए उपलब्ध कराया जाएगा, क्योंकि वहां ऊंची कीमतों का असर पड़ा है। जब आप डीजल रिफाइनरियों को बंद कर देते हैं, तो यह अच्छी बात नहीं होती। हालांकि वे इसकी आपूर्ति हमें नहीं कर रहे हैं। वे इसे पूरी दुनिया के लिए जारी कर रहे हैं।”
सहयोगियों के साथ विश्वासघात किया
अमेरिका के दोनों प्रमुख दलों के सांसदों के एक समूह ने मंगलवार को ट्रंप को पत्र लिखकर रूस के साथ हुए इस समझौते को ”हमारे विरोधी के लिए तोहफा और हमारे सहयोगियों के साथ विश्वासघात” करार दिया। सांसदों ने कहा, ”राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ नौ अक्टूबर को किया गया आपका समझौता न तो उचित उद्देश्य हासिल करेगा और न ही अमेरिकियों को इससे कोई लाभ होगा।”
इस पत्र पर डेमोक्रेटिक पार्टी के रिचर्ड ब्लूमेंथल, क्रिस कून्स, डिक डर्बिन, जैक रीड, जीन शाहीन तथा शेल्डन व्हाइटहाउस और रिपब्लिकन पार्टी के एलन आर्मस्ट्रांग, सुसान कॉलिन्स, जॉन कॉर्निन, मिच मैककॉनेल, लिसा मर्कोव्स्की तथा थॉम टिलिस ने हस्ताक्षर किए। पत्र में कहा गया, ”यह समझौता हमारे विरोधी के लिए तोहफा और हमारे सहयोगियों के साथ विश्वासघात है। इसे रद्द किया जाना चाहिए।”
क्या है अमेरिका का टैरिफ बिल?
गौरतलब है कि अमेरिकी कांग्रेस ने पिछले महीने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने संबंधी अधिनियम, 2026’ पारित किया था, जिस पर ट्रंप ने तुरंत हस्ताक्षर कर इसे कानून बना दिया। सांसदों ने कहा, ”कांग्रेस के दोनों सदनों ने भारी बहुमत और दोनों दलों के समर्थन से इस कानून को पारित किया था। इससे स्पष्ट होता है कि हमारा उद्देश्य न्यायसंगत और निष्पक्ष शांति स्थापित करना है तथा इसके लिए आपको आवश्यक अधिकार दिए गए हैं।”
उन्होंने कहा कि इन अधिकारों के तहत राष्ट्रपति को रूस और उसके युद्ध में मदद करने वाले प्रमुख देशों, खासकर चीन पर आर्थिक दबाव बनाना चाहिए। इससे अमेरिका की बातचीत की स्थिति मजबूत होगी और इस विनाशकारी संघर्ष को जल्द समाप्त करने में मदद मिलेगी।
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