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भारत में सोने की अवैध तस्करी 1500% बढ़ी, ग्राहक रहें सावधान; ऐसे चेक करके लें असली गोल्ड

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • भारत में सोने की अवैध तस्करी में जुलाई-सितंबर 2026 के दौरान करीब 1500% का उछाल आया और गैरकानूनी आयात 3 टन से बढ़कर 50 टन पहुंच गया
  • सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% किए जाने को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है
  • आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं

Illegal Gold Imports in India: भारत में सोने की अवैध तस्करी में अचानक बड़ा उछाल आया है। जुलाई-सितंबर 2026 के दौरान देश में सोने का गैरकानूनी आयात करीब 1500% बढ़कर 50 मिट्रिक टन पहुंच गया। एक साल पहले इसी अवधि में यह आंकड़ा महज 3 टन था। यह 2023 के बाद अवैध सोने के आयात का सबसे ऊंचा स्तर बताया जा रहा है। ब्लूमबर्ग (Bloomberg) की रिपोर्ट में वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद अवैध कारोबार को बढ़ावा मिला है। जब कानूनी तरीके से सोना मंगाना महंगा हो जाता है, तो तस्करी और दूसरे गैरकानूनी रास्तों से सोना लाने का आर्थिक फायदा बढ़ सकता है।

भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। देश में सोने की मांग का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है। ऐसे में आयात शुल्क में बदलाव का असर सोने की कीमतों, ज्वेलरी कारोबार और ग्राहकों की खरीदारी पर पड़ता है।

सोने की अवैध तस्करी में 1500% उछाल क्यों आया?

सोने की अवैध तस्करी बढ़ने की सबसे बड़ी वजह इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी को माना जा रहा है। मई 2026 में सरकार ने सोने और चांदी के आयात पर टैक्स बढ़ा दिया था। इससे कानूनी तरीके से सोना आयात करने की लागत बढ़ गई। ऐसे में कुछ कारोबारी और तस्कर टैक्स से बचने के लिए गैरकानूनी रास्तों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें सीमाओं के जरिए सोने की तस्करी करना या विदेश से आने वाले यात्रियों के सामान में छोटी-छोटी मात्रा में सोना लाना शामिल है। इस तरह लाए गए सोने पर निर्धारित कस्टम ड्यूटी नहीं चुकाई जाती। इसलिए इसकी कीमत कानूनी तरीके से आयात किए गए सोने के मुकाबले कम रखी जा सकती है। इससे अवैध बाजार को बढ़ावा मिलने की आशंका रहती है।

भारत में सोने पर कितना टैक्स लगता है?

मई 2026 में सरकार ने सोने और चांदी के आयात पर लगने वाले शुल्क में बदलाव किया था। इसके बाद इन धातुओं पर प्रभावी इंपोर्ट टैक्स 6% से बढ़कर 15% हो गया, यानी सोने के आयात पर 15% प्रभावी इंपोर्ट ड्यूटी के अलावा 3% IGST भी लागू होता है। आइए मौजूदा चार्जेस की ब्योरा इस प्रकार है।

टैक्स का प्रकार दर
बेसिक कस्टम ड्यूटी 10%
Agriculture Infrastructure and Development Cess (AIDC) 5%
कुल प्रभावी इंपोर्ट ड्यूटी 15%
IGST 3%

इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने का सीधा असर आयात की लागत पर पड़ता है। कारोबारियों को विदेश से सोना मंगाने के लिए पहले से ज्यादा टैक्स देना पड़ता है। इसका असर घरेलू बाजार में सोने की उपलब्धता और कीमतों पर भी पड़ सकता है।

सरकार ने सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी क्यों बढ़ाई?

सरकार का मकसद सोने और चांदी के आयात को कम करना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटाना था। भारत अपनी सोने और चांदी की घरेलू जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। जब इन धातुओं का आयात बढ़ता है, तो देश से विदेशी मुद्रा बाहर जाती है। ऐसे में आयात कम करने के लिए सरकार ने मई 2026 में टैक्स बढ़ाने का फैसला किया।

इस दौरान भारतीय रुपये पर भी दबाव बना हुआ था और वह एशिया की कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भारतीयों से सोना खरीदने से बचने की अपील की थी। हालांकि, इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है। कानूनी आयात महंगा होने से अवैध तरीके से सोना लाने का फायदा बढ़ सकता है। WGC के आंकड़ों में तस्करी में आई तेज बढ़ोतरी इसी चिंता को सामने लाती है।

तारीख रिवीजन
16 Jan 12 +2%
16 Mar 12 +2%
21 Jan 13 +2%
5 Jun 13 +2%
13 Aug 13 +2%
6 Jul 19 +2.5%
2 Feb 21 -1.75$
1 Jul 22 +4.25%
24 Jul 24 -9%
13 May 26 +9%

2012 से अब तक कितनी बार बदली सोने की इंपोर्ट ड्यूटी?

भारत में सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी में पिछले डेढ़ दशक के दौरान कई बदलाव हुए हैं। WGC के आंकड़ों के मुताबिक, 2012 और 2013 के बीच सरकार ने कई बार 2-2 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद ड्यूटी बढ़कर 10% तक पहुंच गई। जुलाई 2019 में करीब 6 साल के अंतराल के बाद इंपोर्ट ड्यूटी में फिर 2.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की गई। इसके बाद 2021 और 2024 में शुल्क घटाया गया, जबकि 2022 और 2026 में इसमें तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। इन बदलावों से साफ है कि सरकार समय-समय पर सोने के आयात को नियंत्रित करने और घरेलू आर्थिक जरूरतों के हिसाब से शुल्क में बदलाव करती रही है।

भारत में सोने की ज्वेलरी की मांग 20% घटी

सोने की तस्करी बढ़ने के बीच भारत में सोने की ज्वेलरी की मांग कमजोर हुई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की Q3 2026 गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत में सोने की ज्वेलरी की खपत सालाना आधार पर 20% घट गई। यह 2020 के बाद किसी तीसरी तिमाही में दर्ज सबसे कमजोर मांग बताई गई है। पूरे साल यानी 2026 में अब तक ज्वेलरी की मांग 18% नीचे रही है। इस गिरावट की बड़ी वजह सोने की ऊंची कीमतों को माना गया है। महंगा सोना होने के कारण आम ग्राहकों के लिए ज्वेलरी खरीदना मुश्किल हुआ है।

इसी वजह से बाजार में हल्के वजन वाले गहनों, कम कैरेट के सोने और स्टडेड ज्वेलरी की मांग बढ़ी है। ज्वेलर्स भी 18 कैरेट, 14 कैरेट और 9 कैरेट गोल्ड के साथ डायमंड ज्वेलरी पर जोर दे रहे हैं। इससे कम मात्रा में सोना बेचने के बावजूद कारोबारियों को अपने मार्जिन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

कैसे चेक करें असली सोना?

सोना खरीदने से पहले उसकी शुद्धता की जांच करना बेहद जरूरी है, ताकि आपकी मेहनत की कमाई नकली या कम कैरेट वाले सोने में न फंस जाए। इसके लिए सबसे पहले ज्वेलरी पर लगा BIS हॉलमार्क और 6 अंकों का HUID (Hallmark Unique Identification) नंबर जरूर चेक करें। आप BIS Care ऐप के जरिए HUID नंबर डालकर सोने की शुद्धता, कैरेट और ज्वेलर से जुड़ी जानकारी की पुष्टि कर सकते हैं। इसके अलावा गहने पर 22K916, 18K750 या 14K585 जैसी शुद्धता की मार्किंग देखें और खरीदारी के समय पक्का बिल लें। बिल में सोने का वजन, प्रति ग्राम कीमत, मेकिंग चार्ज और GST की जानकारी अलग-अलग दर्ज होनी चाहिए। इससे भविष्य में सोना बेचने या बदलने के दौरान भी आपको परेशानी नहीं होगी।

Gold ETF में बढ़ा निवेश

सोने की ज्वेलरी की मांग कमजोर होने के बावजूद निवेश के दूसरे विकल्पों में अलग-अलग रुझान देखने को मिले। WGC के मुताबिक, जुलाई-सितंबर 2026 की तिमाही में भारत के गोल्ड ETF में 6 टन का निवेश आया। इससे पता चलता है कि कुछ निवेशक फिजिकल गोल्ड के बजाय गोल्ड ETF के जरिए सोने में निवेश करना पसंद कर रहे हैं। इसके उलट सोने के बार और सिक्कों की मांग में बड़ी गिरावट आई। Q3 2026 में इनकी मांग सालाना आधार पर 40% घटकर 55 टन रह गई। पिछले साल इसी अवधि में यह 91.6 टन थी। इस तरह सोने के बाजार में एक तरफ अवैध आयात बढ़ा है, वहीं दूसरी तरफ ज्वेलरी और फिजिकल गोल्ड की मांग कमजोर हुई है। निवेशकों का रुझान गोल्ड ETF की ओर भी देखने को मिला है।

आगे सोने के बाजार पर क्या होगा असर?

भारत में सोने की अवैध तस्करी में आई तेजी सरकार और ज्वेलरी इंडस्ट्री के लिए चिंता का विषय हो सकती है। अगर कानूनी आयात महंगा बना रहता है और अवैध कारोबार बढ़ता है, तो इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा और कीमतों को लेकर चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। हालांकि, तस्करी के आंकड़ों में बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि सोने की कुल मांग भी उतनी ही तेजी से बढ़ रही है। ज्वेलरी, बार और सिक्कों की मांग में गिरावट के आंकड़े बताते हैं कि ऊंची कीमतों का असर ग्राहकों की खरीदारी पर पड़ा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN