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माइक्रोसॉफ्ट क ा AI डॉक्टरो ं स े भ ी तेज, दाव ा- दोगुन ा सटीकत ा स े बीमार ी क ा पत ा लगात ा ह ै

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Source :- LIVE HINDUSTAN

व ो दिन दूर नही ं जब डॉक्टरो ं क ी जगह भ ी AI ल े लेंगे । माइक्रोसॉफ्ट न े इसक ी पहल भ ी कर द ी है । कंपन ी न े एक ऐस ा एआई सिस्टम तैयार किय ा है, ज ो इंसानो ं डॉक्टरो ं क ी तुलन ा मे ं दोगुन े स े भ ी ज्याद ा सटीकत ा स े बीमार ी क ा पत ा लग ा सकत ा है।

AI न े दुनियाभर मे ं खलबल ी मच ा रख ी है । एआई क े बाद, कई कंपनियो ं न े इस े अपनान े क े चक्कर मे ं अपन े कर्मचारियो ं क ो बाहर क ा रास्त ा दिख ा दिया । अब लगत ा ह ै क ि यह डॉक्टरो ं क ी भ ी जगह ल े रह ा है । खबर ह ै क ि माइक्रोसॉफ्ट न े एक ऐस ा एआई सिस्टम डेवलप किय ा ह ै ज ो तेज ी स े बिमार ी क ा पत ा लग ा सकत ा है । यह हेल्थकेयर सेक्टर मे ं एक बड़ ा इनोवेशन है । ‘ साइंस’ जर्नल मे ं छप ी एक नई स्टड ी क े अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट AI क े CEO मुस्तफ ा सुलेमान क ा मानन ा ​​ह ै क ि यह उस दिश ा मे ं एक बड़ ा कदम ह ै जिस े व े” मेडिकल सुपरइंटेलिजेंस” कहत े हैं । कंपन ी क ा एक AI सिस्टम, जटिल बीमारियो ं क ा पत ा लगान े मे ं इंसान ी डॉक्टरो ं क ी तुलन ा मे ं दोगुन े स े भ ी ज्याद ा सटीक साबित हुआ है । क्य ा ह ै पूर ा मामला, चलिए बतात े हैं…

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कैस े काम करत ा ह ै AI डॉक्टर?

इंडियाटूड े क ी रिपोर्ट क े अनुसार, इस नए सिस्टम क ो MAI-DxO ( माइक्रोसॉफ्ट AI डायग्नोस्टिक ऑर्केस्ट्रेटर ) कह ा ज ा रह ा है । एक नॉर्मल चैटबॉट स े अलग, यह डॉक्टरो ं क े एक वर्चुअल पैनल क ी तरह काम करत ा है । इसमे ं AI, कई एजेंटो ं क ा उपयोग करत ा है, ज ो मिलकर मरीजो ं स े सवाल पूछत े हैं, लैब टेस्ट करान े क ा सुझाव देत े है ं और फाइनल डायग्नोसिस पर पहुंचन े स े पहल े लक्षणो ं पर आपस मे ं चर्च ा करत े हैं।

‘ न्य ू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन ‘ क े मुश्किल मेडिकल केसो ं क ा उपयोग करक े किए गए एक टेस्ट में, MAI-DxO न े 83 % मामलो ं मे ं सह ी जवाब दिया । दूसर ी ओर, मेडिकल रेफरेंस टूल्स क ा इस्तेमाल करन े वाल े जनरल फिजिशियन केवल 36 % मामलो ं मे ं ह ी सह ी थे।

इसमे ं एक छोट ा स ा ट्विस्ट है, इतन े मुश्किल मामलो ं क ो आमतौर पर मेडिकल स्पेशलिस्ट क ी एक टीम संभालत ी है, लेकिन व े इस तुलन ा क ा हिस्स ा नही ं थे । फिर भी, माइक्रोसॉफ्ट AI मे ं हेल्थ क े वीप ी डोमिनिक किंग न े इन नतीजो ं क ो” बहुत महत्वपूर्ण और उत्साहजनक” बताया। उन्होंन े कह ा क ि इस समय हेल्थकेयर क े क्षेत्र मे ं सबस े बड़ ी चुनौत ी मेडिकल एक्सपर्ट्स क ी कम ी है।

GPT-5 और GPT-5.5 क ी ताकत

इन नतीजो ं क े साथ, माइक्रोसॉफ्ट भ ी गूगल और ओपनएआई जैस ी उन कंपनियो ं मे ं शामिल ह ो गय ा है, जिनक ा दाव ा ह ै क ि उनक ा एआई इंसान ी डॉक्टरो ं क ी बराबर ी कर सकत ा है, य ा उनस े भ ी बेहतर प्रदर्शन कर सकत ा है । स्टड ी स े पत ा चल ा क ि एआई क ी ज्यादातर ताकत बैकग्राउंड मे ं चल रह े एडवांस्ड मॉडल्स स े आत ी है । माइक्रोसॉफ्ट न े ओपनएआई, गूगल, मेट ा और अन्य कंपनियो ं क े मॉडल्स क ा टेस्ट किया, लेकिन सबस े अच्छ े नतीज े ओपनएआई क े GPT-5 और नए GPT-5.5 क ा इस्तेमाल करन े पर मिले।

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DxO सिस्टम लागत कम करन े मे ं भ ी मदद करत ा है । उदाहरण क े लिए, किस ी मुश्किल केस मे ं केवल GPT-5 क ा उपयोग करन े पर लगभग 8, 400 डॉलर क ा खर्च आत ा थ ा और एक्युरेस ी 78.9 % थी । DxO सिस्टम क ो जोड़न े से, माइक्रोसॉफ्ट न े इस खर्च क ो लगभग 3, 000 डॉलर कम कर दिय ा और एक्युरेस ी मे ं भ ी थोड़ ा सुधार हुआ।

नए GPT-5.5 मॉडल क े साथ, DxO न े जटिल मामलो ं मे ं एक्युरेस ी क ो 72 % स े बढ़ाकर लगभग 87 % कर दिया, और साथ ह ी खर्च क ो भ ी कम रखा । इसस े कम क्षमत ा वाल े AI मॉडलो ं क ो भ ी काफ ी मदद मिली । गूगल क े जेमिन ी 2.5 फ्लैश न े अकेल े 46.4 % स्कोर किया, लेकिन माइक्रोसॉफ्ट क े DxO सिस्टम क ा इस्तेमाल करन े पर यह आंकड़ ा लगभग 69 % तक पहुंच गया।

आग े क्य ा होगा?

सुलेमान, ज ो पहल े गूगल क े डीपमाइंड क े को-फाउंडर थे, लंब े समय स े एआई क ी मदद स े मेडिकल समस्याओ ं क ो हल करन े पर काम कर रह े हैं । उनक ा मानन ा ह ै क ि अगल े द ो स े तीन सालो ं मे ं हेल्थकेयर क े एआई मॉडल काफ ी बेहतर ह ो जाएंगे । माइक्रोसॉफ्ट पहल े स े ह ी मेय ो क्लिनिक क े साथ मिलकर हेल्थकेयर क े लिए एक खास एआई मॉडल बन ा रह ा है, ज ो अगल े साल रिलीज होन े सकत ा है । सुलेमान न े टेकक्रंच क ो बताय ा कि 2027 तक डॉक्टरो ं क े पास मरीज क े मेडिकल रिकॉर्ड क े बार े मे ं एआई द्वार ा किए गए बहुत सटीक अनुमान उपलब्ध होंगे।

असल ी मरीजो ं पर इस्तेमाल करन े स े पहल े माइक्रोसॉफ्ट DxO क ो असल ी दुनिय ा मे ं परख रह ा है । कंपन ी बोस्टन क े बेथ इजराइल डेकनैस मेडिकल सेंटर क े साथ मिलकर काम कर रह ी है । इस ट्रायल मे ं मरीजो ं क ो इंसान ी डॉक्टरो ं स े सामान्य इलाज मिलेगा । उस ी समय एआई चुपचाप बैकग्राउंड मे ं चलत ा रहेगा । इसक े बाद रिसर्चर एआई क े सुझावो ं क ी तुलन ा उन चीजो ं स े करेंग े ज ो इंसान ी डॉक्टरो ं न े वास्तव मे ं किया।

सुलेमान न े कहा,” यह वैस ी तकनीक ह ै ज ो दुनिय ा क ा हर इंसान चाहत ा है ।” उन्होंन े वाद ा किय ा क ि माइक्रोसॉफ्ट इस े सुरक्षित तरीक े स े दुनिय ा भर क े अस्पतालो ं तक पहुंचान े क े लिए अपन ी पूर ी कोशिश करेगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN