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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिडटर्म इलेक्शन वाले इस साल की शुरुआत रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं को चेतावनी देते हुए की थी.
छह जनवरी को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के रिपब्लिकन सांसदों से ट्रंप ने कहा था, “आपको मिडटर्म इलेक्शन जीतने ही होंगे. अगर हम मिडटर्म इलेक्शन नहीं जीतते हैं, तो वे मुझे महाभियोग के ज़रिए पद से हटाने का कोई न कोई बहाना ढूंढ लेंगे.”
अब रिपब्लिकन पार्टी मिडटर्म इलेक्शन हार गई है. डेमोक्रेट्स ने कांग्रेस का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया. यहाँ तक कि टेक्सस, साउथ कैरोलाइना और कंसास जैसे पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन के मज़बूत गढ़ माने जाने वाले राज्यों में भी सीनेट की सीटें जीत लीं.
हालांकि, इससे पहले भी डेमोक्रेटिक पार्टी के नियंत्रण वाली कांग्रेस ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग चला चुकी है, लेकिन तब भी उन्हें राष्ट्रपति पद पर बने रहने से नहीं रोका जा सका था.
चुनाव से पहले सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के साथ 53 सदस्य थे, जबकि डेमोक्रेट्स के पक्ष में 47 सीनेटर थे.
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की कुल 435 सीटों में से 367 के नतीजे घोषित हो चुके हैं.
डेमोक्रेट्स इनमें से 218 सीटें जीत चुके हैं, जिससे सदन में उनका बहुमत सुनिश्चित हो गया है. चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी के पास 218-214 के बेहद मामूली अंतर से बहुमत था.
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत हासिल करने के बाद डेमोक्रेट्स को ट्रंप प्रशासन के सदस्यों, जिनमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल हैं, के ख़िलाफ़ महाभियोग की कार्यवाही शुरू करने का अधिकार मिल जाएगा.
पहले कार्यकाल में महाभियोग
अपने पहले कार्यकाल के दौरान ट्रंप को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के डेमोक्रेटिक सांसदों की ओर से लाए गए महाभियोग के दो प्रस्तावों का सामना करना पड़ा था. हालांकि, दोनों ही बार वे सीनेट में आरोपों से बरी हो गए थे.
लेकिन सिर्फ महाभियोग चलाने से ट्रंप को राष्ट्रपति पद से नहीं हटाया जा सकेगा. इसके लिए सीनेट में होने वाली अगली सुनवाई में उन्हें दोषी ठहराना होगा, जिसके लिए मौजूद सीनेटरों के दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन ज़रूरी है. इसका मतलब है कि सीनेट में केवल बहुमत हासिल कर लेने से डेमोक्रेट्स ट्रंप को पद से नहीं हटा सकते.
फ़िलहाल ऐसे कोई संकेत भी नहीं हैं कि डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने ट्रंप के ख़िलाफ़ तीसरी बार महाभियोग लाने की योजना बनाई है.
कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत हासिल करने से डेमोक्रेट्स को ट्रंप के विधायी एजेंडे पर व्यापक नियंत्रण और कार्यपालिका के कामकाज की जांच करने के लिए निगरानी की पर्याप्त शक्तियां भी मिल जाएंगी.
इससे ट्रंप प्रशासन के लिए अपने कार्यकाल के आख़िरी दो वर्षों में नए क़ानूनों और नीतियों को आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है. हालांकि, ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अगर डेमोक्रेट्स ने कांग्रेस का नियंत्रण हासिल किया, तो वह हर बिल पर वीटो कर देंगे.
मिडटर्म इलेक्शन नतीजों का असर
क्या मिडटर्म इलेक्शन नतीजों ने ट्रंप के ख़िलाफ़ एक और महाभियोग का रास्ता खोल दिया है? जानिए इससे जुड़ी अहम बातें.
सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि किसी राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ महाभियोग चलाने के लिए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में जितने बहुमत की ज़रूरत होती है, उससे कहीं ज़्यादा बहुमत सीनेट में उन्हें दोषी ठहराकर पद से हटाने के लिए ज़रूरी होता है.
महाभियोग किसी इंडाइटमेंट की तरह होता है. इसके तहत किसी फेडरल पदाधिकारी पर अपराध करने के आरोपों को औपचारिक रूप से मंज़ूरी दी जाती है.
महाभियोग के प्रस्ताव यानी आरोपों को सीनेट में सुनवाई शुरू होने से पहले हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में साधारण बहुमत से पारित होना ज़रूरी है.
जब किसी राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ महाभियोग की सुनवाई होती है, तो सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इसकी अध्यक्षता करते हैं.
अगर सीनेट में दो-तिहाई बहुमत राष्ट्रपति को दोषी ठहराने के पक्ष में मतदान करता है, तभी उन्हें पद से हटाया जा सकता है. कुछ मामलों में इसका मतलब यह भी होता है कि संबंधित व्यक्ति भविष्य में कभी किसी सरकारी पद पर नहीं रह सकता.
क्या डेमोक्रेट्स ने ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग चलाने के लिए पर्याप्त सीटें जीत ली हैं?
इसका जवाब हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में हाँ है.
चार नवंबर की दोपहर तक डेमोक्रेट्स 237 सीटें जीत चुके थे, जो साधारण बहुमत के लिए ज़रूरी 218 सीटों से ज़्यादा हैं. इसका मतलब है कि अगर सभी डेमोक्रेट सांसद महाभियोग के प्रस्ताव के समर्थन में मतदान करते हैं, तो इसे पारित कराया जा सकता है.
लेकिन यह महाभियोग का सिर्फ़ पहला क़दम है. यह समझना भी ज़रूरी है कि क्या सीनेट में पर्याप्त बहुमत मिल सकता है, जिससे राष्ट्रपति को दोषी ठहराकर पद से हटाया जा सके.
सीनेट में महाभियोग की सुनवाई के दौरान किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन ज़रूरी होता है.
अभी सभी सीटों के नतीजे घोषित नहीं हुए हैं. लेकिन अगर जिन सीटों पर नतीजे आने बाक़ी हैं, उन सभी पर डेमोक्रेट्स जीत भी जाते हैं, तब भी वे 67 वोटों के ज़रूरी आंकड़े से पीछे रहेंगे. यह आकलन इस आधार पर है कि सभी सीनेटर अपनी-अपनी पार्टी के पक्ष में मतदान करेंगे.
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डेमोक्रेट्स ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग चलाने की कोशिश करेंगे?
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हकीम जेफ्रीज ने कहा है कि उनकी पार्टी का ध्यान महंगाई और आम लोगों के लिए जीवनयापन की लागत कम करने पर रहेगा.
न्यूयॉर्क से सांसद जेफ्रीज जनवरी में नई कांग्रेस के कार्यभार संभालने पर हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के अगले स्पीकर बन सकते हैं.
चार नवंबर को उन्होंने कहा था, “हाउस डेमोक्रेटिक कॉकस के किसी भी सदस्य ने मुझसे महाभियोग के बारे में बात नहीं की है.”
उन्होंने कहा कि पार्टी का ध्यान आम लोगों के लिए जीवनयापन की लागत कम करने के साथ-साथ जवाबदेही तय करने पर भी रहेगा.
उन्होंने कहा, “हाउस डेमोक्रेट्स ऐसी कांग्रेस का नेतृत्व करेंगे, जो नियंत्रण से बाहर हो चुकी कार्यपालिका पर निगरानी रखेगी और सत्ता के संतुलन को सुनिश्चित करेगी.”
जब यह स्पष्ट होने लगा कि डेमोक्रेट्स फिर से हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत हासिल कर लेंगे, तो हाउस ओवरसाइट कमिटी में डेमोक्रेटिक पार्टी के शीर्ष सदस्य सांसद रॉबर्ट गार्सिया ने जांच शुरू करने का वादा किया.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “अपने वकीलों को तैयार रखिए.”
बहुमत मिलने का मतलब है कि डेमोक्रेट्स के पास समन जारी करने और अवमानना की कार्रवाई करने की शक्तियां होंगी. इसके ज़रिए वे ट्रंप प्रशासन और उनके परिवार से विभिन्न मुद्दों पर जवाब मांग सकते हैं.
महाभियोग का सामना करने की आशंका सिर्फ़ ट्रंप को ही नहीं है. मिडटर्म इलेक्शन के लिए संसद के अवकाश पर जाने से पहले रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के ख़िलाफ़ भी महाभियोग का प्रस्ताव पेश किया गया था.
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ट्रंप के ख़िलाफ़ अब तक कितनी बार महाभियोग चलाया गया है?
ट्रंप के ख़िलाफ़ अब तक दो बार महाभियोग चलाया जा चुका है, लेकिन दोनों ही बार सीनेट ने उन्हें आरोपों से बरी कर दिया था.
दिसंबर 2019 में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग के दो आरोपों को मंज़ूरी दी थी.
पहला आरोप सत्ता के दुरुपयोग का था. इसमें कहा गया था कि ट्रंप ने यूक्रेन के अधिकारियों से अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की जांच करने के लिए कहा था.
दूसरा आरोप कांग्रेस की जांच में बाधा डालने का था. ट्रंप पर आरोप था कि उन्होंने इस मामले की जांच में रुकावट पैदा की.
फ़रवरी 2020 में सीनेट ने राष्ट्रपति को आरोपों से बरी कर दिया. यूटा से रिपब्लिकन सीनेटर मिट रोमनी अपनी पार्टी की लाइन से हटकर ट्रंप को दोषी ठहराने के पक्ष में मतदान करने वाले एकमात्र रिपब्लिकन सांसद थे.
जनवरी 2021 में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने एक बार फिर ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग चलाने के पक्ष में मतदान किया. इस बार उन पर छह जनवरी 2021 को अमेरिकी कैपिटल में हुई घटनाओं के संबंध में “विद्रोह के लिए उकसाने” का आरोप लगाया गया था.
इस दौरान 10 रिपब्लिकन सांसदों ने अपनी पार्टी का रुख़ छोड़कर डेमोक्रेट्स के साथ ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग के समर्थन में मतदान किया.
इन 10 सांसदों में से अब केवल दो ही पद पर बने हुए हैं. इनमें से एक ने कहा है कि वह 2026 में दोबारा चुनाव नहीं लड़ेंगे. बाकी सांसद या तो कांग्रेस से रिटायर हो गए या अपने चुनाव हार गए.
सीनेट में महाभियोग की सुनवाई ट्रंप के राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद हुई थी. कुछ रिपब्लिकन सांसदों का मानना था कि चूंकि ट्रंप अब सत्ता में नहीं हैं, इसलिए उनके ख़िलाफ़ सुनवाई की ज़रूरत नहीं है.
सीनेट में बहुमत ने ट्रंप को दोषी ठहराने के पक्ष में मतदान किया. इस दौरान सात रिपब्लिकन सांसदों ने अपनी पार्टी की लाइन से हटकर डेमोक्रेट्स का समर्थन किया.
हालांकि, 57 के मुकाबले 43 वोटों का यह परिणाम दोषी ठहराने के लिए ज़रूरी दो-तिहाई बहुमत से कम था.
चूंकि सीनेट ने ट्रंप को आरोपों से बरी कर दिया था, इसलिए उन्हें भविष्य में दोबारा सरकारी पद संभालने से रोकने के लिए मतदान की नौबत ही नहीं आई.
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