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रिलायंस इंडस्ट्रीज की 2026 की वार्षिक आम बैठक (AGM) में चेयरमैन मुकेश अंबानी और जियो के चेयरमैन आकाश अंबानी ने भविष्य की टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सैटेलाइट इंटरनेट और डिजिटल इंडिया को लेकर कई बड़े ऐलान किए। इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा AI और स्पेस कनेक्टिविटी से जुड़ी योजनाओं की रही, जिन्हें आने वाले सालों में रिलायंस के अगले बड़े ग्रोथ इंजन के रूप में देखा जा रहा है।
AGM में आकाश अंबानी ने बताया कि रिलायंस जियो और गूगल की साझेदारी अब केवल स्मार्टफोन और डिजिटल सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह AI-फर्स्ट सहयोग में बदल चुकी है। दोनों कंपनियां मिलकर ऐसे AI आधारित समाधान विकसित करेंगी, जो भारतीय उपभोक्ताओं और व्यवसायों के लिए खास तौर पर तैयार किए जाएंगे। इसका उद्देश्य भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को आम लोगों तक पहुंचाना और डिजिटल सेवाओं को अधिक स्मार्ट बनाना है।
रिलायंस ने यह भी संकेत दिया कि वह देश में बड़े पैमाने पर AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है। कंपनी हाई-परफॉर्मेंस डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग और AI मॉडल्स के विकास पर भारी निवेश कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत को वैश्विक AI हब बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कंपनी का लक्ष्य है कि भारतीय व्यवसायों, स्टार्टअप्स और सरकारी संस्थाओं को स्वदेशी AI प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया जाए, जिससे विदेशी तकनीकों पर निर्भरता कम हो।
AGM का एक और बड़ा आकर्षण जियो की सैटेलाइट इंटरनेट योजना रही। आकाश अंबानी ने घोषणा की कि जियो भारत के लिए एक स्वदेशी लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट नेटवर्क विकसित करने की संभावनाओं पर काम कर रही है। यह नेटवर्क देश के दूरदराज और ग्रामीण इलाकों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने में मदद करेगा। इसके साथ ही जियो वैश्विक सैटेलाइट ऑपरेटरों के साथ भी साझेदारी कर रही है, ताकि ग्राहकों को बेहतर कवरेज और कनेक्टिविटी मिल सके।
कंपनी भारत में अपने ग्राउंड स्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर का भी निर्माण कर रही है। इससे अंतरिक्ष आधारित संचार सेवाओं पर भारत का नियंत्रण मजबूत होगा और देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम ऐसे समय में आया है, जब दुनिया भर में सैटेलाइट इंटरनेट और स्पेस कम्युनिकेशन को भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में गिना जा रहा है।
रिलायंस का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI, क्लाउड, डेटा सेंटर और सैटेलाइट कनेक्टिविटी मिलकर भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे। AGM में किए गए ऐलानों से यह साफ संकेत मिला कि कंपनी केवल टेलीकॉम या रिटेल तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वह AI और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में भी वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाना चाहती है।
आकाश अंबानी ने क्या कहा?
रिलायंस इंडस्ट्रीज की AGM 2026 में आकाश अंबानी ने बताया कि कंपनी गुजरात के जामनगर में रिलायंस इंटेलिजेंस के तहत भारत का स्वदेशी AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है। इस पहल का उद्देश्य देश के लिए एक मजबूत और सुरक्षित AI बैकबोन बनाना है, जिससे भारतीय कंपनियों, स्टार्टअप्स, डेवलपर्स और सरकारी संस्थानों को बड़े पैमाने पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सुविधाएं मिल सकें। कंपनी अत्याधुनिक डेटा सेंटर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC), AI मॉडल ट्रेनिंग और क्लाउड-आधारित AI सेवाओं पर काम कर रही है।
रिलायंस का कहना है कि यह प्लेटफॉर्म भारत की डिजिटल संप्रभुता को मजबूत करेगा और विदेशी AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता कम करेगा। साथ ही कंपनी गूगल के साथ अपनी साझेदारी को AI-फर्स्ट सहयोग के रूप में आगे बढ़ा रही है और भविष्य में भारतीय भाषाओं, एंटरप्राइज AI सॉल्यूशंस तथा जनरेटिव AI टेक्नोलॉजी पर विशेष फोकस करेगी।
निवेशकों और टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट के लिए यह AGM काफी महत्वपूर्ण रही, क्योंकि इससे रिलायंस की भविष्य की रणनीति की झलक मिली। AI और सैटेलाइट इंटरनेट पर कंपनी का फोकस यह दर्शाता है कि आने वाले दशक में रिलायंस भारत के डिजिटल और तकनीकी विकास की दिशा तय करने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल रह सकती है।
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