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घर बैठे बोर हो रहे हैं, ओटीटी पर सब देख डाला और थिएटर में कुछ खास नहीं तो शॉर्ट फिल्में बेस्ट ऑप्शन हैं। यहां हर मूड को जंचने वाली शॉर्ट फिल्मों की लिस्ट है जिन्हें देखकर आपको मजा आ जाएगा।

समय की कमी है और घर बैठे फटाफट मूड फ्रेश करना है तो आपके लिए कुछ शॉर्ट फिल्मों के सजेशंस हैं। इनमें से ज्यादातर आप मुफ्त में यूट्यूब पर देख सकते हैं। यहां अलग-अलग जॉनर की 7 फिल्में हैं। इनके सब्जेक्ट ऐसे हैं कि आपके दिलोदिमाग पर गहरा असर छोड़ेंगे। इनमें साइकोलॉजिकल थ्रिलर से लेकर एक घरेलू महिला तक की डीप कहानियों पर आधारित शॉर्ट मूवीज हैं।

स्टेशन मास्टर फूल कुमार

यह फूल कुमार नाम के एक स्टेशन मास्टर की कहानी है। वह एक बेहद छोटे, सुनसान और दूर-दराज के रेलवे स्टेशन पर स्टेशन मास्टर का काम करता है। इस स्टेशन पर ज्यादा ट्रेनें नहीं रुकतीं। फूल कुमार बोर होता रहता है। फिर वहां एक लड़की आती है…इसके बाद की कहानी आप खुद देखेंगे तब मजा आएगा।

घर की मुर्गी

यह शॉर्ट फिल्म आप 15 मिनट में निपटा सकते हैं। यह एक गृहणी सीमा की कहानी है। मूवी से हर वो महिला खुद को जुड़ा महसूस करेगी जो दिनभर काम में जुटी रहती है लेकिन उसके काम की कोई गिनती नहीं होती। सीमा का रोल साक्षी तंवर ने निभाया है। सीमा को जब अहसास होता है कि वह लोगों के लिए सिर्फ मशीन बनकर रह गई है तो वह रुकती है। फिर कहानी में एक ट्विस्ट आता है। यहां क्लिक करें लिंक

चुभन

कहानी एक शादीशुदा महिला की है जिसका नाम मेघा है। वह अपने पति मानव के साथ रहती है। मेघा की जिंदगी बिल्कुल सामान्य चल रही होती है, लेकिन अचानक उसके व्यवहार में एक अजीब सा बदलाव आने लगता है। उसके मन में एक चुभन है जिसकी परतें फिल्म में खुलेंगी।

बातें

यह फिल्म मेंटल हेल्थ पर है। कभी-कभी सबसे जरूरी बात वही होती है जो अनकही रह जाती है। मिसेज देशपांडे जो अपने बच्चे को खो चुकी हैं, उनसे मिलने एक यंग डॉक्युमेंट्री मेकर जीत आता है। वह उनके बेटे का दोस्त बनकर बातें करता है। उनकी बातों से कुछ ऐसी परतें खुलती हैं जो जिंदगी के लिए उनका नजरिया बदल देती हैं।

द ब्रोकन टेबल

द ब्रोकन टेबल नसीरुद्दीन शाह और रसिका दुगल की शॉर्ट फिल्म है। एक दिन के लिए केयरटेकर दीप्ति (रसिका) को अल्ज़ाइमर से पीड़ित गिरिधर (नसीर) की देखभाल करनी है क्योंकि उनका परिवार शादी में गया है। लेकिन इस एक दिन में दीप्ति को खुद अपने बारे में भी कुछ याद आ जाता है।

नटखट

यह विद्या बालन की शॉर्ट फिल्म है। वह एक जॉइंट फैमिली की बहू बनी हैं, जिनका नाम सुरेखा है। यह सुरेखा और उसके सात साल के बेटे की कहानी है। सुरेखा के परिवार में पुरुषों का राज चलता है। एक दिन उसे अपने बेटे की बात से अहसास होता है कि उस पर इसका कितना गलत असर पड़ रहा है। वह बेटे को समझाने का एक संवेदनशील तरीका चुनती है।

कॉपी

सुजॉय घोष बेहतरीन शॉर्ट फिल्में बनाते हैं। कॉपी भी उनकी साइकोलॉजिकल थ्रिलर है। फिल्म में विक्रांत मैसी हैं। वह सिद्धार्थ के रोल में हैं जो ऐसी कंपनी में काम करता है जो इंसान की हूबहू कॉपी बनाता है। इस कॉपी में इमोशंस नहीं होते बल्कि ये मालिक के गुलाम होते हैं। सिद्धार्थ अपनी खुद की कॉपी बनवाकर एक गंदा खेल शुरू करता है।

कॉपी आप जियो हॉटस्टार पर देख सकते हैं।

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