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‘मैं वापस आऊंगा’ पाकिस्तान में भी की जा रही पसंद, इम्तियाज़ अली की फ़िल्म में क्या है ख़ास

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Source :- BBC INDIA

फ़िल्म  का पोस्टर

इमेज स्रोत, Applause Entertainment

मशहूर फ़िल्म डायरेक्टर इम्तियाज़ अली की नई फ़िल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ को न सिर्फ़ भारत में, बल्कि पाकिस्तान और दुनिया के दूसरे देशों में भी पसंद किया जा रहा है.

फ़िल्म को इसकी इमोशनल कहानी, भारत के बंटवारे जैसे संवेदनशील विषय और शानदार एक्टिंग के लिए ख़ासतौर पर सराहा जा रहा है.

जहां बॉलीवुड के फ़ैंस पहले से ही इम्तियाज़ अली के कहानी कहने के अंदाज़ के कायल रहे हैं, वहीं इस बार पाकिस्तान में भी ऑनलाइन इस फ़िल्म की काफ़ी चर्चा हो रही है.

फ़िल्म के शुरुआती सीन में नसीरुद्दीन शाह हाथ में पेन लिए उर्दू के कुछ अक्षर लिखते हुए दिखाई देते हैं. इसी पल से यह एहसास हो जाता है कि कहानी अतीत, यादों और एक अधूरी कहानी के इर्द-गिर्द घूमेगी. सिनेमा हॉल में फ़िल्म का टाइटल भी फ़ारसी और गुरमुखी लिपि में दिखाई देता है.

भारत के बंटवारे की पृष्ठभूमि पर बनी इस फ़िल्म ने एक बार फिर दोनों देशों के दर्शकों का ध्यान उस इतिहास की ओर खींचा है जिसने लाखों लोगों की ज़िंदगी बदल दी थी.

पाकिस्तानी फ़िल्ममेकर उमैर नासिर अली ने इसकी तारीफ़ करते हुए कहा कि यह फ़िल्म बंटवारे की मानवीय क़ीमत को संवेदनशीलता के साथ दिखाती है.

बीबीसी उर्दू से बात करते हुए उमैर नासिर अली ने कहा, “मुझे हमेशा से इम्तियाज़ अली की फ़िल्में पसंद रही हैं, लेकिन मुझे लगता है कि एक फ़िल्ममेकर के तौर पर ‘मैं वापस आऊंगा’ उनकी सबसे बेहतरीन फ़िल्म है. यह बहुत ही ख़ूबसूरत और क्रिएटिव काम है. यह एक सच्ची फ़िल्म है जिसे बहुत प्यार से बनाया गया है.”

पाकिस्तानी फ़िल्म ‘नायाब’ के डायरेक्टर उमैर का कहना है कि फ़िल्म की एडिटिंग उन्हें ख़ासतौर पर प्रभावित करती है, “पूरी फ़िल्म के दौरान दो अलग-अलग कहानियों और भावनाओं को एक साथ लेकर चलना आसान नहीं होता, लेकिन एडिटर आरती बजाज ने जिस तरह से इसे संभाला है, वह वाक़ई तारीफ़ के काबिल है. फ़िल्म की भावनाएं आख़िर तक बनी रहती हैं.”

उमैर ने फ़िल्म के हर पहलू की सराहना की, लेकिन वह नसीरुद्दीन शाह के प्रदर्शन से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए.

उन्होंने कहा, “उनकी भूमिका फ़िल्म में सबसे कठिन है और जिस तरह से नसीरुद्दीन शाह ने इसे निभाया है, मुझे नहीं लगता कि कोई अन्य अभिनेता इस भूमिका के साथ न्याय कर सकता था.”

कहानी क्या है?

मुंबई में फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' का पोस्टर

इमेज स्रोत, AFP via Getty Images

‘मैं वापस आऊंगा’ दर्शकों को शुरू से ही बांधे रखती है. यह कहानी 95 साल के इशर सिंह ग्रेवाल की है, जिनका किरदार नसीरुद्दीन शाह ने निभाया है. उन्हें लकवा (पैरालिसिस) है और धीरे-धीरे उनकी याददाश्त कमज़ोर होती जा रही है.

उनका पोता नरवीर, जिसका किरदार दिलजीत दोसांझ ने निभाया है, इंग्लैंड से लौटकर उनके पास आता है. इशर सिंह की बिखरी हुई यादों के बीच, नरवीर को उनकी ज़िंदगी के कुछ ऐसे पन्ने मिलते हैं जो बंटवारे से पहले के पंजाब और पाकिस्तान के शहर सरगोधा से जुड़े हैं.

इशर सिंह की बस एक ही आख़िरी इच्छा है: वह एक बार फिर सरगोधा जाना चाहते हैं. वही शहर जहां उन्होंने अपना बचपन बिताया था और जहां कुछ यादें, कुछ वादे और एक अधूरा प्यार छूट गया था.

फ़िल्म की ख़ास बात यह है कि इम्तियाज़ अली बंटवारे को सिर्फ़ एक राजनीतिक घटना के तौर पर नहीं देखते, बल्कि इसके मानवीय पहलू को केंद्र में रखते हैं. इसी वजह से, फ़िल्म देखने वाले न सिर्फ़ इस ऐतिहासिक घटना को देखते हैं, बल्कि उस दर्द को भी महसूस करते हैं जो उस पीढ़ी ने सहा था.

लोगों को फ़िल्म में क्या पसंद आया?

इम्तियाज़ अली बंटवारे के मानवीय पहलू को केंद्र में रखते हैं

इमेज स्रोत, AFP via Getty Images

दिल्ली की 28 साल की इक़रा मोहसिन ने बीबीसी उर्दू को बताया कि फ़िल्म ने उन्हें बहुत भावुक कर दिया. उन्होंने कहा, “अतीत में जो हुआ, ख़ासकर अपनों का बिछड़ना, शायद वह कभी नहीं होना चाहिए था.”

वह कहती हैं, “मेरे लिए सबसे अच्छी बात यह थी कि अतीत में नफ़रत के जो बीज बोए गए थे, वे आज भी दोनों तरफ़ के लोगों को पूरी तरह अलग नहीं कर पाए हैं. धर्म और सरहदें अपनी जगह हैं, लेकिन भावनात्मक रिश्ते आज भी ज़िंदा हैं.”

30 साल के संदीप ने बीबीसी उर्दू से कहा: “मैंने इम्तियाज़ अली की सभी फ़िल्में देखी हैं और मेरे लिए, ‘मैं वापस आऊंगा’ अब तक का उनका सबसे परिपक्व काम है.”

“फ़िल्म के आखिरी सीन ने मुझे तोड़ दिया. जब कीनू मल्लिका से जाने की इजाज़त मांगता है, तो मैं अपने आँसू नहीं रोक पाई. फ़िल्म ख़त्म होने के बाद भी फ़िल्म की भावनाएँ मेरे साथ बनी रहीं.”

पाकिस्तान के अली उस्मान कासमी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, “इम्तियाज़ अली ने नफ़रत पर आधारित सिनेमा के दौर में हिम्मत दिखाई है. इस फ़िल्म की सबसे अहम बात यह है कि यह हमें याद दिलाती है कि हम बँटवारे के दर्द को अपना नहीं सकते. हम इसे महसूस कर सकते हैं, हम इसके प्रति सहानुभूति रख सकते हैं, लेकिन हम उन लोगों के अनुभव को कभी पूरी तरह नहीं समझ सकते जो इस दर्द से गुज़रे हैं.”

संगीत और पुरानी यादें

'मैं वापस आऊंगा' 95 साल के इशर सिंह ग्रेवाल की कहानी है, जिनका किरदार नसीरुद्दीन शाह ने निभाया है

इमेज स्रोत, LightRocket via Getty Images

उमैर नासिर अली का कहना है कि फ़िल्म का संगीत और उसका सांस्कृतिक माहौल भी असलियत के बहुत करीब लगता है.

“मैंने अपने दादा-दादी से सुना था कि उस समय भी लोग वेस्टर्न संगीत और डांस के शौकीन थे. फ़िल्म में इस संस्कृति को बहुत स्वाभाविक तरीके से दिखाया गया है.”

उमैर खुद पिछले कुछ सालों से बंटवारे की यादों पर आधारित एक फ़िल्म बना रहे हैं, जिसका नाम गुलज़ार की मशहूर कविता से प्रेरित होकर ‘छोड़ आए हम वो गलियां’ रखा गया है.

उनका कहना है कि जिस तरह इम्तियाज़ अली ने ‘मैं वापस आऊंगा’ में अतीत को आज के दर्शकों और मौजूदा हालात से जोड़ा है, वैसे ही वह भी अपनी फ़िल्म में कुछ नए पहलू जोड़ना चाहेंगे.

उमैर ने अहमद फ़राज़ की इस कविता के ज़रिए फ़िल्म और उसकी कहानी को संक्षेप में बताया:

“सुना है उसके शबिस्ताँ से मुत्तसिल है बहिश्त,

मक़ीं उधर के भी जलवे इधर के देखते हैं”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS