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वज़न घटाने वाली एक नई दवा जो आई भी नहीं और ब्लैक मार्केट में छा गई

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Source :- BBC INDIA

कैमरे की ओर देखते हुए एक युवक की तस्वीर. उसके भूरे बाल हैं और वह नग्न है. चमकदार, रंगीन अक्षरों में 'रिटैट्रुटाइड' लिखा हुआ सफेद डिब्बों की एक छवि. डिब्बों में एक छोटी पारदर्शी खिड़की है जिसके अंदर नकली रिटैट्रुटाइड की एक शीशी दिखाई दे रही है.

इमेज स्रोत, Tom Davies/MHRA

नई दवा को बनाने को लेकर उत्साह अक्सर उसे विकसित करने वालों के लिए जश्न की वजह होता है, ख़ासकर तब जब शुरुआती क्लिनिकल ट्रायल में उससे उम्मीद जगती दिखे.

लेकिन वज़न घटाने वाली नई दवा रेटाट्रूटाइड, न सिर्फ़ इसे बनाने वाली फ़ार्मास्यूटिकल कंपनी एली लिली के लिए सिरदर्द बन गई है, बल्कि ब्रिटेन और दुनिया भर के दवा नियामकों के लिए भी.

यह इंजेक्शन अभी तक किसी भी नियामक संस्था द्वारा इंसानों के इस्तेमाल के लिए मंज़ूर नहीं हुआ है. लेकिन ब्लैक मार्केट में रेटाट्रूटाइड की नक़ली और ग़ैरक़ानूनी नक़लों की बाढ़ आ गई है.

विशेषज्ञों ने बीबीसी को बताया कि यह संभवतः पहली बार होगा कि किसी प्रयोगात्मक दवा की नक़ली वर्ज़न इतने व्यापक रूप से उपलब्ध हो रहे हैं, जबकि असली दवा अभी टेस्ट के दौर से ही गुज़र रही है.

‘रेटा’ नाम से मशहूर हो चुकी इस दवा की शीशियाँ ब्रिटेन में जिम, नेल और ब्यूटी सैलून, हेयरड्रेसर, सोशल मीडिया और यहाँ तक कि सड़क पर फूल बेचने वालों के पास भी बिक रही हैं.

24 एचआर फ़ार्मेसी की निदेशक और फ़ार्मासिस्ट सेहर शाहिद कहती हैं, “दुनिया पागल हो गई है.”

“लोग असल में एक ग़ैरक़ानूनी दवा का इंजेक्शन लगा रहे हैं और सोच रहे हैं कि यह सुरक्षित है.”

“यह इतना सामान्य हो गया है कि लोग खुलेआम अपने डीलरों के बारे में बात कर रहे हैं, बता रहे हैं कि यह कहाँ से सबसे अच्छी मिल सकती है और सोशल मीडिया पर जगह-जगह पोस्ट कर रहे हैं.”

जोखिम हैं, लेकिन कई लोग उठाने को भी तैयार

एक कारख़ाने के अंदर का दृश्य जिसमें दवाओं के डिब्बे दिखाई दे रहे हैं. गत्ते के डिब्बे खुले हुए हैं जिनमें छोटे सफे़द डिब्बों में बिना लाइसेंस वाली दवाएं रखी हैं.

इमेज स्रोत, MHRA

अपने सोशल मीडिया पर एक सरसरी नज़र डालने के कुछ ही मिनट में मैं रेटाट्रूटाइड नाम से बिक रही दवा का एक बैच ऑर्डर कर सकती हूँ – हालाँकि इस बात का कोई सबूत नहीं होगा कि यह वास्तव में किससे बनी है, इसके असर क्या होंगे और यह कहाँ से आई है.

इसे इस्तेमाल करने वाले उत्साही लोग अपने टिकटॉक फ़ीड पर ‘रेटा’ के पहले और बाद की तस्वीरें डाल रहे हैं, बता रहे हैं कि इससे फ़ूड नॉएस ( लगातार कोई चीज़ खाने की तीव्र इच्छा) शांत हो गया है, वज़न और इंच घटाने में मदद मिली, और कुछ तो कहते हैं कि इसने उनकी ज़िंदगी पूरी तरह बदल दी है.

समस्या यह है कि हालिया क्लिनिकल ट्रायल में सकारात्मक नतीजे आने के बावजूद असली रेटाट्रूटाइड की सुरक्षा और प्रभावशीलता का परीक्षण अभी जारी है.

अमेरिका में इस परीक्षण के फ़ेज़-III में पहुँचने वाली केवल 50% दवाओं को ही आख़िरकार फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफ़डीए) की मंज़ूरी मिलती है, इसलिए इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि रेटाट्रूटाइड बाज़ार में आएगी ही.

उच्च असफलता दर का मुख्य कारण यह है कि बड़ी, विविध मानव आबादी में दवाएँ उतनी कारगर नहीं होतीं जितनी छोटे शुरुआती परीक्षणों में दिखती हैं, या फिर वे अप्रत्याशित सुरक्षा ख़तरों को उजागर कर देती हैं.

और हो सकता है कि जो नक़ली वर्ज़न इस समय उपलब्ध हैं, वे प्रयोगशाला की सुरक्षित सीमाओं में विकसित हो रही असली दवा से बिल्कुल मेल भी न खाते हों.

एली लिली की वेबसाइट पर सख़्त चेतावनी दी गई है, “किसी को भी रेटाट्रूटाइड नाम से बिक रही कोई भी चीज़, लिली-प्रायोजित क्लिनिकल ट्रायल के बाहर नहीं लेनी चाहिए.”

“ग़ैरक़ानूनी रेटाट्रूटाइड उत्पादों में अज्ञात तत्व, हानिकारक प्रदूषक और अशुद्धियाँ हो सकती हैं. इनमें सक्रिय तत्व बहुत ज़्यादा या बहुत कम हो सकता है, या फिर पूरी तरह ग़लत तत्व भी हो सकता है.”

इसके बावजूद, लगता है कि बहुत से लोग यह जोखिम उठाने को तैयार हैं.

एंडोक्राइनोलॉजिस्ट प्रोफ़ेसर डोनल ओ’शे कहते हैं, “मतली, उल्टी, दस्त और कुछ मामलों में गुर्दे ख़राब होने तक के युवा और तंदुरुस्त मरीज़ अस्पताल आ रहे हैं.”

उनका कहना है कि कुछ पर्सनल ट्रेनर न सिर्फ़ अपने क्लाइंट्स को यह दवा दे रहे हैं, बल्कि उन्हें इंजेक्शन भी लगा रहे हैं.

“मरीज़ों को पता ही नहीं होता कि उन्होंने यह कितना लिया है, या उन्हें वास्तव में क्या इंजेक्ट किया गया है.”

‘लग रहा था सीधे इमरजेंसी वॉर्ड में पहुंच जाऊंगा’

टॉम के टिकटॉक लाइव का एक स्क्रीनशॉट - इसमें वह फ्रेम के बीच में खड़े होकर अपना दाहिना हाथ ऊपर उठाकर अपने धड़ का ऊपरी हिस्सा दिखा रहे हैं, उन्होंने ऊपर कुछ नहीं पहना है और उनकी छाती नंगी है.

इमेज स्रोत, Tom

टॉम डेविस बताते हैं कि नकली रेटाट्रूटाइड की ओवरडोज़ से वे लगभग अस्पताल पहुँच गए थे. जब उनके जिम के दोस्तों ने इसकी सिफ़ारिश की तो उन्होंने इसे चीन के एक सप्लायर से ऑर्डर किया था.

ब्राइटन के 20 वर्षीय टॉम कहते हैं, “यह भयानक था.”

“शरीर पर बहुत ज़्यादा दबाव महसूस हो रहा था, मेरा पेट बहुत फूला हुआ लग रहा था, जैसे किसी ने मेरे पेट पर 20 किलो का वज़न रख दिया हो.”

“72 घंटे तक मुझे बहुत बुरा दस्त और मतली रही. मैंने सोचा, अगर यह जारी रहा तो मैं सीधे इमरजेंसी वॉर्ड में पहुँच जाऊँगा.”

बाद में टॉम को एहसास हुआ कि उन्होंने बताई गई मात्रा से आठ गुना ज़्यादा डोज़ ले ली थी.

जो ऑर्डर किया गया, उसके अनुसार नक़ली रेटाट्रूटाइड को स्टेराइल, बैक्टीरियोस्टैटिक पानी के साथ मिलाना पड़ता है, जिसके लिए अलग हिसाब लगाना पड़ता है.

चेस्टर में स्थित शोध चिकित्सक डॉक्टर नैस खट्टक, एली लिली के फ़ेज़-III क्लिनिकल ट्रायल के लिए मरीज़ों की स्क्रीनिंग कर रहे हैं. उनका कहना है कि नक़ली संस्करण लेने वाले लोग असल में बिना किसी मेडिकल निगरानी के प्रयोगशाला के चूहों की तरह व्यवहार कर रहे हैं.

वह चेतावनी देते हैं, “इसे ऑनलाइन ख़रीदने वाले लोग अगर ख़ुद ही डॉक्टर बन रहे हैं, तो वे बहुत बड़ा जोखिम उठा रहे हैं.”

वह कहते हैं कि ट्रायल प्रतिभागियों को असली दवा या प्लेसिबो लेना शुरू करने से पहले सख़्त मानदंड पूरे करने होते हैं.

“हम उनकी स्वास्थ्य जांच के रिकॉर्ड माँगते हैं, सुनिश्चित करते हैं कि वे भावनात्मक रूप से ठीक हैं. आत्महत्या, आत्म-हानि और मानसिक स्वास्थ्य का आकलन किया जाता है – और यह सब डॉक्टर करते हैं.”

फिर हम उनके ख़ून की जांच की रिपोर्ट देखते हैं, सब कुछ जाँचते हैं और फिर तय करते हैं कि वे उपयुक्त हैं या नहीं.

टॉम ने ख़ुराक लेने पर और शोध करने का फ़ैसला किया और पहले हुए बुरे दुष्प्रभावों के बावजूद अपनी नक़ली रेटाट्रूटाइड को दोबारा आज़माने का निश्चय किया. नौ महीने तक इसे कई चरणों में लेने के बाद वे कहते हैं कि उनकी चीनी और जंक फ़ूड की लालसा ख़त्म हो गई है.

फ़ार्मासिस्ट शाहिद चेतावनी देते हैं कि सिर्फ़ इसलिए कि नक़ली ‘रेटा’ किसी एक व्यक्ति पर असर कर गया है, इसका मतलब यह नहीं कि यह ‘अगले’ पर भी करेगा.

हर हफ़्ते 3 किलो तक कम हुआ वज़न

लिसा किंग

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वर्तमान में बाज़ार में मौजूद मोटापा घटाने वाली दवाएं – जैसे सेमाग्लूटाइड (जो ओज़ेम्पिक और वेगोवी के नाम से बिकती हैं), और टिर्ज़ेपाटाइड (जो माउनजारो के नाम से बिकती है) – केवल एक या दो हार्मोन रिसेप्टर को निशाना बनाती हैं. लेकिन अगर मंज़ूरी मिलती है तो रेटाट्रूटाइड वज़न घटाने वाली दुनिया की पहली दवा होगी जो तीन रिसेप्टर पर काम करेगी, इसी वजह से इसे ‘ट्रिपल जी’ का उपनाम मिला है.

वे तीन हार्मोन जिनकी यह नक़ल करती है, वो हैं…

जीएलपी-1 – यह पेट ख़ाली होने की गति को धीमा करता है, दिमाग़ को तृप्ति का संकेत देता है जिससे भूख कम होती है और ब्लड शूगर लेवल नियंत्रित करने में मदद करता है.

जीआईपी – यह इंसुलिन स्राव को बढ़ाता है और इंसुलिन संवेदनशीलता सुधारता है. जीएलपी-1 के साथ मिलकर यह शरीर को पोषक तत्वों को प्रोसेस करने में मदद करता है और भूख कम करता है.

ग्लूकागन – यह रेटाट्रूटाइड के लिए नया हार्मोन है. यह आराम की स्थिति में ऊर्जा ख़र्च बढ़ाता है ताकि शरीर ज़्यादा कैलोरी जलाए, लिवर की चर्बी कम करने और वज़न घटाने में मदद करे.

लीसा किंग जुलाई से नक़ली रेटाट्रूटाइड ले रही हैं और एक समय, जब वह जिम जा रही थीं और स्वस्थ भोजन कर रही थीं, उनका वज़न हर हफ़्ते 3 किलो तक घट रहा था.

उनका मानना है कि यह उन्हें पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीएमओएस) के कुछ लक्षणों को संभालने में भी मदद कर रहा है. जीएलपी-1 ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है और कुछ अध्ययन बताते हैं कि वज़न घटाने वाली ये दवाएँ पीएमओएस से होने वाली कुछ समस्याओं – जैसे अत्यधिक थकान, गुर्दे की परेशानी और उच्च रक्तचाप – में मदद कर सकती हैं.

लीसा कहती हैं, “मुझे यक़ीन नहीं है कि यह ‘रेटा’ की वजह से हुआ है, लेकिन मेरी चीनी की लालसा कम हो गई है, मेरे पीरियड नियमित हो गए हैं और मेरे पास बहुत ज़्यादा ऊर्जा है.”

लेकिन रेटाट्रूटाइड का ट्रायल अभी भी चल रहा है. क्या यह बात लीसा को परेशान करती है?

वह कहती हैं, “नहीं, बिलकुल नहीं. बहुत सी चीज़ें हैं जिन्हें मंज़ूरी नहीं मिली है.”

“अगर मुझे कोई नकारात्मक दुष्प्रभाव महसूस होने लगे तो मैं तुरंत इसे छोड़ दूँगी.”.

नक़ली रेटाट्रूटाइड लेने वाले अन्य उपयोगकर्ताओं ने कई तरह की समस्याएँ बताई हैं, जैसे दिमाग़ी धुंधलापन, मतली, दस्त, यौन इच्छा में कमी और ख़ुशी या आनंद महसूस न कर पाना.

इन नक़ली वज़न घटाने वाली दवाओं को इस्तेमाल करने वालों में दिख रहे दुष्प्रभावों को लेकर डॉक्टरों की चिंता लगातार बढ़ रही है.

ब्रिटिश इस्लामिक मेडिकल एसोसिएशन की अध्यक्ष और जनरल फ़िज़िशियन डॉक्टर साहिरा दार कहती हैं कि स्वास्थ्यकर्मियों को मरीज़ों से ब्लैक मार्केट उत्पादों के बारे में ‘बिना कोई राय बनाए’ पूछना चाहिए, ताकि मरीज़ खुलकर बता सकें कि ‘उन्होंने क्या लिया है.’

एली लिली की ब्लैक मार्केट दवाओं से जंग जारी

ब्रुकलिन, न्यूयॉर्क के विलियम्सबर्ग इलाके में एक टेबल पर रेटाट्रूटाइड की एक शीशी रखी है

इमेज स्रोत, Vincent Alban/For The Washington Post via Getty Images

एली लिली लगभग 10 साल से रेटाट्रूटाइड विकसित कर रही है. अब कंपनी अपने उत्पाद की रक्षा करने और दुनिया भर में हो रही ग़ैरक़ानूनी बिक्री को रोकने की कोशिश कर रही है.

यह पेप्टाइड कंपनियों, इन्फ़्लुएंसर्स, नक़ली दवा बनाने वाली कंपाउंड फ़ार्मेसीज़ और वेलनेस क्लीनिकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रही है. कंपनी ने ऐसी 14,000 से अधिक वेबसाइटों, विज्ञापनों और सोशल मीडिया पोस्ट की रिपोर्ट की है, जो उसके अनुसार ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से इस दवा का प्रचार कर रहे हैं.

एली लिली का कहना है कि वह “क़ानून प्रवर्तन एजेंसियों और नियामक अधिकारियों के साथ मिलकर ब्लैक मार्केट की दवाओं से लड़ने का काम जारी रखे हुए है.”

कंपनी के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया, “ऑनलाइन उपलब्ध कोई भी रेटाट्रूटाइड अप्रूव्ड नहीं है, सत्यापित नहीं है और जोखिम उठाने लायक बिल्कुल नहीं है.”

पिछले एक साल में छापेमारी के दौरान ब्रिटेन की मेडिसिन्स एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी (एमएचआरए) ने “रेटाट्रूटाइड होने का दावा करने वाले कई उत्पादों” को ज़ब्त किया है.

एजेंसी का कहना है कि ये उत्पाद अलग-अलग रास्तों से ब्रिटेन में प्रवेश करते हैं और वह ‘ग़ैरक़ानूनी आयात और वितरण को बाधित करने’ पर काम कर रही है.

लेकिन बिक्री जारी है.

प्रोफ़ेसर ओ’शे कहते हैं कि हमें जहाँ “ब्लैक मार्केट की ऐसी दवाओं के ख़तरों पर रोशनी डालनी चाहिए”, वहीं “दवाओं के उस समूह को पूरी तरह ख़ारिज नहीं करना चाहिए.”

“जीएलपी-1 मोटापे के प्रबंधन में एक बड़ी प्रगति है, और इससे दिमाग़ की लालसा और भूख को नियंत्रित करने को लेकर हमारी समझ में भी बड़ी प्रगति हुई है.

वह कहते हैं, “यह बहुत बड़ी बात है.”

फ़िलहाल, रेटाट्रूटाइड को कहीं से भी मंज़ूरी मिलने में अभी लंबा समय है.

एली लिली अगले साल की शुरुआत में अमेरिकी एफ़डीए को आवेदन देने की योजना बना रही है. समीक्षा में एक साल तक लग सकता है, इसलिए रेटाट्रूटाइड अमेरिका में 2027 के अंत से पहले कानूनी रूप से उपलब्ध नहीं होगी.

ब्रिटेन में एमएचआरए की मंज़ूरी पर निर्भर है और यह 2028 तक बाज़ार में आ सकती है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS