Source :- LIVE HINDUSTAN
मुख्य बातें
- शादी के बाद भी क्या बेटी अपना सोना मायके में रख सकती है? शादी के बाद बेटी का घर तो बदल जाता है, लेकिन मायके से उसका रिश्ता और अधिकार नहीं
- इसके बावजूद हमारे समाज में अगर कोई शादीशुदा बेटी अपने गहने मायके में रखती है, तो कई बार सवाल उठने लगते हैं
शादी के बाद भी क्या बेटी अपना सोना मायके में रख सकती है? शादी के बाद बेटी का घर तो बदल जाता है, लेकिन मायके से उसका रिश्ता और अधिकार नहीं। इसके बावजूद हमारे समाज में अगर कोई शादीशुदा बेटी अपने गहने मायके में रखती है, तो कई बार ससुराल पक्ष, परिवार और रिश्तेदार सवाल उठाने लगते हैं। यहां तक कि इसे लेकर घर में विवाद भी हो जाता है। ऐसे में सवाल है कि क्या शादी के बाद बेटी अपने मायके में सोना और गहने नहीं रख सकती। क्या इसके लिए कोई नियम या पाबंदी है? दिल्ली ITAT के एक अहम फैसले ने इस सवाल पर स्थिति साफ कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली के इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने अपने एक फैसले में कहा है कि शादीशुदा बेटियों का गहना उनके मायके में रखा होना अपने आप में गलत नहीं है। सिर्फ इस आधार पर उसे परिवार की अघोषित संपत्ति नहीं माना जा सकता कि बेटियां शादी के बाद अपने ससुराल में रहती हैं।
यह मामला वकील अहमद बनाम इनकम टैक्स ऑफिसर (ITA No. 2550/DEL/2026) से जुड़ा है। 29 सितंबर 2026 को सुनाए गए फैसले में ट्रिब्यूनल ने 92 लाख रुपये की टैक्स बढ़ोतरी को हटा दिया।
दरअसल, जनवरी 2019 में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने अहमद के घर की तलाशी के दौरान 21 लाख रुपये कैश और करीब 3.9 किलो वजन के गहने बरामद किए थे। अहमद ने उस वित्त वर्ष में 10.45 लाख रुपये की आय घोषित की थी। इसके बाद इनकम टैक्स विभाग ने गहनों और कैश के सोर्स पर सवाल उठाए।
क्यों उठाया गया गहनों पर सवाल?
अहमद ने बताया कि घर में मिले गहने उनकी दिवंगत पत्नी और तीन शादीशुदा बेटियों के थे। ये गहने उन्हें शादी के दौरान रिश्तेदारों और ससुराल पक्ष से उपहार में मिले थे।
हालांकि, टैक्स अधिकारी ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। विभाग का कहना था कि शादीशुदा बेटियां अपने पतियों के साथ रहती हैं, इसलिए उनके गहने मायके में कैसे रखे हो सकते हैं। खरीद के बिल और पेमेंट से जुड़े डॉक्यूमेंट नहीं होने पर विभाग ने करीब 2.3 किलो गहनों को अघोषित निवेश मान लिया और 92 लाख रुपये जोड़ दिए। इसके अलावा 21 लाख रुपये की कैश पर भी सवाल उठाया गया।
बेटी के गहनों के लिए पेश किए ये सबूत
ट्रिब्यूनल में अहमद ने परिवार के सदस्यों और बेटियों के ससुराल पक्ष के हलफनामे पेश किए। इनमें बताया गया कि बेटियों को 1974, 2001, 2004 और 2005 में शादी के दौरान गहने मिले थे।
इसके अलावा शादी की तस्वीरें भी पेश की गईं, जिनमें गहनों की पहचान की गई थी। अहमद ने यह भी बताया कि परिवार ने 1995-96 से 2018-19 के बीच करीब 5.93 करोड़ रुपये की आय पर टैक्स दिया था। यानी परिवार की आर्थिक स्थिति भी गहने रखने के अनुरूप थी।
ITAT ने क्या कहा?
ट्रिब्यूनल ने कहा कि भारत में शादीशुदा बेटियों के गहने मायके में रखना एक प्रचलित पारिवारिक परंपरा है। ऐसा करने पर कोई कानूनी रोक नहीं है। केवल इस आधार पर गहनों को अघोषित संपत्ति नहीं माना जा सकता।
ITAT ने CBDT के 11 मई 1994 के सर्कुलर का भी हवाला दिया। इसके मुताबिक तलाशी के दौरान विवाहित महिला के लिए 500 ग्राम, अविवाहित महिला के लिए 250 ग्राम और पुरुष सदस्य के लिए 100 ग्राम तक सोना जब्त नहीं करने का निर्देश है।
ट्रिब्यूनल ने माना कि परिवार की परिस्थितियों, हलफनामों और अन्य सबूतों को नजरअंदाज करके टैक्स नहीं लगाया जा सकता। इसलिए 92 लाख रुपये की बढ़ोतरी रद्द कर दी गई।
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