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https://www.livehindustan.com/lh-img/smart/img/2026/09/30/1200x900/tukaram_1790745147587_9FTw_1790745151853_aL4L_8bef0939-90e5-4ae8-a4a6-8eafc1a4c91f_uC1n.pngशाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ ने ‘विमल इलायची’ विज्ञापन मामले में FDA के नोटिस का जवाब दे दिया है। दो अभिनेताओं की व्यक्तिगत सुनवाई भी पूरी हो चुकी है।
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने ‘विमल इलायची’ विज्ञापन मामले में शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ नोटिस भेजा था। पहले खबर आई थी कि तीन में से सिर्फ एक ने ही नोटिस का जवाब नहीं दिया है, लेकिन अब FDA ने बताया कि तीनों के जवाब मिल गए हैं।
कहां तब पहुंचा पूरा मामला?
मंगलवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में तुकाराम मुंढे ने बताया कि तीनों के जवाब मिल गए हैं। दो अभिनेताओं ने व्यक्तिगत सुनवाई की मांग की थी। ऐसे में सोमवार को दोनों की व्यक्तिगल सुनवाई की गई। अब FDA इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर काम कर रहा है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि किन दो अभिनेताओं ने सुनवाई का अनुरोध किया था।
क्या है FDA का आरोप?
दरअसल, FDA ने 11 अगस्त को शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस जारी किया था। तीनों से 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया था। FDA का आरोप है कि ‘विमल इलायची’ की आड़ में प्रतिबंधित पान मसाला ब्रांड का प्रचार किया जा रहा है।
‘मेरे लिए वे कानून का उल्लंघन करने वाले हैं’ – तुकाराम मुंढे
तुकाराम मुंढे ने तीनों सुपरस्टार्स को नोटिस भेजने के बाद एनडीटीवी को दिए बयान में कहा था, ‘आपके लिए वे बड़े स्टार हो सकते हैं, लेकिन मेरे लिए वे इस मामले में सिर्फ विज्ञापनदाता हैं। मैं उन्हें कानून का उल्लंघन करने वालों के तौर पर देख रहा हूं और कानून अपना काम करेगा।’
विज्ञापन करने वाले कलाकारों की भी जिम्मेदारी
तुकाराम मुंढे ने यह तर्क भी खारिज किया था कि किसी विज्ञापन में दिखाए जाने वाले उत्पाद की जिम्मेदारी सिर्फ कंपनी की होती है। उनका कहना है कि खाद्य सुरक्षा कानून के तहत किसी उत्पाद का प्रचार करने वाले कलाकारों की भी जिम्मेदारी बनती है। विज्ञापन करने से पहले उन्हें यह देखना चाहिए कि जिस उत्पाद का प्रचार किया जा रहा है, वह कानूनी है या नहीं और उसके बारे में किए जा रहे दावे सही हैं या नहीं।
क्या कहता है कानून?
FDA ने यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत की है। इस कानून की धारा 24 (खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006) भ्रामक विज्ञापनों और किसी उत्पाद के बारे में गलत दावे करने पर रोक लगाती है।। वहीं, धारा 53 (FSSA 2006) के तहत भ्रामक या प्रतिबंधित उत्पादों के विज्ञापन में शामिल होने या उसे प्रकाशित करने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माने लगाने का हक देता है।
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