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शेख हसीना के तख्तापलट पर नया खुलासा, यूनुस के सपोर्ट में नहीं थे आर्मी चीफ वकार; फिर क्या बदला?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Sheikh Hasina ouster in Bangladesh: शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने की घटना को दो साल पूरे हो चुके हैं। इस मामले पर अब खुलासा हुआ है कि अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाने के लिए मुहम्मद यूनुस के नाम पर आर्मी चीफ वकार सहमत नहीं थे। क्योंकि यूनुस के ऊपर दो गंभीर केस दर्ज थे।

Sheikh Hasina ouster in Bangladesh: बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना का तख्तापलट हुए दो साल बीत चुके हैं। इस मामले पर आए दिन सभी पक्ष अपना-अपना तर्क देते रहते हैं। बांग्लादेश में उस समय पर बड़ी तेजी के साथ स्थिति बदली थी। अब इस मामले पर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के कानूनी सलाहकार रहे आसिफ नजरुल ने नया खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि जब शेख हसीना को सत्ता से हटाने के बाद मुहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का नेतृत्व देने की बात चल रही थी। लेकिन उस वक्त आर्मी चीफ वकार-उज-जमान ने इसका विरोध किया था। इसके लिए उन्होंने यूनुस के खिलाफ दो तर्क भी दिए थे।

बांग्लादेशी अखबार प्रथोम अलो से बात करत हुए आसिफ ने 5 अगस्त को शेख हसीना के तख्तपलट के दो साल पूरे होने पर इस पूरे घटनाक्रम के बारे में विस्तार से बात की। यूनुस सरकार में कानून मंत्रालय में सलाहकार की भूमिका निभाने वाले प्रोफेसर नजरुल ने कहा कि वह आर्मी चीफ के बुलाने पर उनके ऑफिस गए थे।

छात्रों की हिम्मत की तारीफ कर रहे थे आर्मी चीफ वकार- नजरुल

उन्होंने कहा, “आर्मी चीफ ने मुझे मिलने कि लिए बुलाया था। मैं आर्मी हेडक्वार्टर गया। वहां पर जनरल वकार ने छात्रों द्वारा दिखाई गई हिम्मत की दाद दी और रिफॉर्म्स को लेकर अपना समर्थन जताया। उसके बाद उन्होंने सीधे तौर पर पूछा कि अंतरिम सरकार का नेतृत्व किसे करना चाहिए। इस पर मैंने उन्हें बताया कि छात्रों ने नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस के नाम पर मुहर लगा दी है।”नजरूल के मुताबिक, इसके बाद आर्मी चीफ ने इस पर असहमति जताई और कहा कि यूनुस के खिलाफ लेबर लॉ में केस दर्ज है। ऊपर से उनके ऊपर मनी लॉन्ड्रिंग का केस भी है।

बता दें, यूनुस को बांग्लादेश में छोटे रूप में गरीबों के आर्थिक प्रबंधक के रूप में जाना जाता है। हालांकि, इसी मामले में उनकी संस्था के ऊपर करीब 2 मिलियन डॉलर की मनी लॉन्ड्रिंग और गबन का आरोप भी लगा था। इसके अलावा यूनुस को इस आंदोलन के ठीक पहले जनवरी 2024 में बांग्लादेश लेबर कानूनों के उल्लंघन के मामले में छह महीने जेल की सजा सुनाई गई थी। बाद में जब वह अंतरिम सरकार के अध्यक्ष बने, तो उनकी यह सजा रद्द कर दी गई।

नजरूल बोले- आर्मी चीफ से उन्होंने की यूनुस की सिफारिश

नजरूल ने बताया कि आर्मी चीफ इस बात को लेकर सचेत थे कि कोई अपराधी इस पद पर न बैठ जाए। नजरूल ने कहा, “मैंने उन्हें समझाया कि लेबर लॉ और मनी लॉन्ड्रिंग दोनों केस राजनीति से प्रेरित हैं। चूंकि तत्कालीन राजनीतिक सत्ता यूनुस को पसंद नहीं करती थी। इसलिए उन पर यह इल्जाम लगाया गया है। इसके बाद आर्मी चीफ वकार उन्हें मुख्य सलाहकार के पद पर नियुक्त करने के लिए मान गए।”

बता दें, शेख हसीना और यूनुस के बीच रिश्ते ठीक नहीं थे। वह खुले तौर पर उनकी आलोचना भी कर चुकी थीं।

5 अगस्त 2024 को कुछ महीने तक चले छात्र आंदोलन के बाद हिंसा करती हुई भीड़ बांग्लादेशी प्रधानमंत्री आवास में घुस गई। इससे पहले ही आर्मी के निर्देश पर शेख हसीना बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गईं। इसके बाद से वह लगातार भारत में ही रह रही हैं। दूसरी तरफ बांग्लादेश में पहले मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार ने देश की कमान संभाली। इसके बाद चुनाव हुए, जिसमें मुख्य विपक्षी पार्टी बीएनपी को जीत हासिल हुई। हालांकि, मुख्य नेता खालिदा जिया की मृत्यु चुनाव के पहले ही हो गई, जिसकी वजह से उनके बेटे तारिक रहमान बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री बने। फिलहाल शेख हसीना के भारत में होने और बीएनपी के चीन और पाकिस्तान की तरफ झुकाव की वजह से दोनों देशों के रिश्ते सामान्य नहीं है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN