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‘सबसे खतरनाक है घर का खाना’ क्यों कही फिटनेस एक्सपर्ट ने ऐसी बात

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Source :- LIVE HINDUSTAN

घर का खाना है तो हेल्दी ही होगा, अक्सर लोगों के दिमाग में यहीं बात रहती है, जबकि घर का खाना भी प्रोसेस्ट और जंकफूड के बराबर हो सकता है। अगर उसके पोषक तत्वों की मात्रा पर ध्यान ना दिया जाए। फिटनेस एक्सपर्ट ने बताया घर के खाने की कमियां और उसे दूर करने का तरीका।

इंडिया में खाए जा रहे घर के खाने को फिटनेस एक्सपर्ट ने दुनिया का सबसे खतरनाक खाना बताया है। सुनकर हैरानी होगी क्योंकि जो हम नॉर्थ इंडिया वाले हर दिन दाल, रोटी-सब्जी जैसे खाने को खाते हैं उसे कोई फिटनेस एक्सपर्ट कैसे बुरा बता सकता है। जबकि हेल्दी ईटिंग के लिए घर के खाने बेस्ट बताया जाता है। सालों से हमारे घर के किचन में खाना बनता चला आया है। जिसे भरपूर पोषण वाला माना जाता है। लेकिन क्या ये घर के बने खाने की थाली पोषण से भरपूर होती है? फिटनेस कन्सल्टेंट सान्या कहती हैं कि रोजमर्रा के खाने में पोषण की कमी होती है। एक्स पर किए एक पोस्ट में उन्होंने बताया था कि होमकुक्ड फूड में समस्या नहीं है लेकन कुछ खास तरह के खाने होते हैं जिसमे न्यूट्रिशनल वैल्यू कम होती है। अक्सर देखा गया है कि जो खाना हर रोज इंडियन खाते हैं वो कार्बोहाइड्रेट में हाई होता है और उसमे प्रोटीन की मात्रा काफी कम रहती है।

टिपिकल इंडियन खाने में क्या रहता है

अगर बात की जाए नॉर्थ इंडिया के किसी भी साधारण घर की जहां पर रोजमर्रा के खाने में एक थाली होती है, जिसमे कई सारी चीजें शामिल की जाती है।

इसमे होगी 4 रोटी, आलू की सब्जी, एक कटोरी पतली दाल,सफेद चावल। और, अगर इस थाली की न्यूट्रिशन वैल्यू निकाले तो जानकर आपको हैरानी होगी।

4 रोटी- 32- कैलोरी, 12 ग्राम प्रोटीन

आलू की सब्जी- 200 कैलोरी,3 ग्राम प्रोटीन

पतली दाल- 80 कैलोरी, 5 ग्राम प्रोटीन

सफेद चावल- 200 कैलोरी, 4 ग्राम प्रोटीन

इन सबको टोटल किया जाए तो मिलेगा 800 कैलोरी, 24 ग्राम प्रोटीन और 141 ग्राम कार्बोहाइड्रेट।

सान्या बताती हैं कि अगर इस तरह का खाना दो टाइम खाया जाए तो मिलेगा 48 ग्राम प्रोटीन दिनभर में, जो कि एक एडल्ट के शरीर की मिनिमम रिक्वायरमेंट भी पूरी नहीं करता।

घर के खाने का न्यूट्रिशन कोई चेक नहीं करता

सान्या के मुताबिक अक्सर लोगों की सोच होती है कि घर का बना खाना है तो हेल्दी ही होगा। और इस तरह का न्यूट्रिशनल इंबैलेंस पर किसी का ध्यान ही नहीं जाता है। घर का बना खाना होगा तो उसकी क्वाटिंटी, तेल, प्रोटीन कंटेंट के बारे में कोई नहीं बोलेगा। जबकि घर का बना खाना भी प्रोसेस्ड और जंकफूड के बराबर हो सकता है, केवल घर का बना होना हेल्दी होने की गारंटी नहीं हो सकता है।

सब्जी में आलू की मात्रा

इंडियन खाने में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होती है। रोटी, चावल, आलू के साथ बनी सब्जी में काफी ज्यादा कैलोरी होती है। खासतौर पर जिस सब्जी को हेल्दी समझकर खाते हैं, उसमे आलू की मात्रा एक्स्ट्रा स्टार्च प्लेट में ऐड करती है।

क्या दाल से पूरी हो जाती है प्रोटीन की जरूरत

दाल को वेजिटेरियन लोगों के लिए प्रोटीन का सोर्स माना जाता है। लेकिन जिस तरह की दाल घरों में बनती है और जितनी परोसी जाती है, उतने से प्रोटीन की पूर्ति हो जाएगी?

न्यूट्रिशनल कंसल्टेंट सान्या बताती है कि दाल जिसमे पानी की मात्रा ज्यादा होती है उसमे प्रोटीन कम होता है। वहीं गाढ़ी और सही पोर्शन में दाल खाना जरूरी है। इसलिए रोज के खाने में दाल से प्रोटीन की कमी पूरी करनी है तो गाढ़ी और सही पोर्शन में खाना जरूरी है।

तो कैसे बनाएं रोज की थाली को न्यूट्रिशनल

रोज की थाली में बहुत सारे बदलाव करने की बजाय सान्या ने बहुत ही सिंपल तरीके से उसी खाने में थोड़े से बदलाव किए।

  • दाल को ज्यादा गाढ़ा बनाना और पोर्शन साइज ज्यादा खाना
  • आलू की सब्जी बनाने की बजाय पनीर, टोफू, एग, बेसन,चिकन इन सब चीजों से सब्जी बनाएं। सप्ताह में कम से कम 5 दिन।
  • रोज की थाली में एक फुल कटोरी दही या योगर्ट खाएं।
  • और, रोटी 4 की बजाय 2 ही खाएं।
  • अगर रोज की थाली में इस तरह के बदलाव किए जाएं तो लगभग 24 ग्राम से लेकर 45-50 ग्राम के करीब प्रोटीन बढ सकता है।

घर के खाने पर भी रखें ध्यान

आप घर का बना खाना खा रहे तो ये हेल्दी और न्यूट्रिशियस होने की गारंटी नहीं है। आपको रोज के खाने पर भी फोकस करना होगा और प्रोटीन, फाइबर की मात्रा बढ़ानी होगी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN