Source :- LIVE HINDUSTAN

समुद्रों में लंबे समय से भटक रहे ‘डार्क फ्लीट’ अब एक नई और बेहद खतरनाक चुनौती बन गए हैं। ये जर्जर टैंकर अब सिर्फ भौतिक दुर्घटना का खतरा नहीं, बल्कि साइबर हमलों का बड़ा निशाना भी बन चुके हैं।

लंबे समय से समुद्रों में भटकते ‘डार्क फ्लीट’ या भूतिया जहाज अब एक नई और अत्यंत गंभीर साइबर सुरक्षा चुनौती बन गए हैं। ये जर्जर और खराब रखरखाव वाले जहाज न केवल भौतिक दुर्घटनाओं का खतरा पैदा कर रहे हैं, बल्कि उनकी कमजोर डिजिटल प्रणालियां अब साइबर हमलावरों के लिए आसान लक्ष्य बन चुकी हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इन जहाजों को नियंत्रित करने वाले आपराधिक नेटवर्क ऑनलाइन उपकरणों का खुलकर इस्तेमाल कर रहे हैं।

रिमोट कंट्रोल के जरिए जहाजों का संचालन, चालक दल की निगरानी और अवैध गतिविधियों को छिपाने का काम हो रहा है। लेकिन यही डिजिटल पहुंच यदि हैकर्स या किसी दुश्मन देश के हाथ लग गई तो लाखों गैलन कच्चे तेल वाले टैंकरों में विस्फोट, आग या भयावह तेल रिसाव जैसी विनाशकारी घटनाएं हो सकती हैं। अमेरिकी तटरक्षक बल (US Coast Guard) की साइबर सुरक्षा टीमों ने इन जहाजों की गहन जांच की है।

जांच में पता चला कि डार्क फ्लीट के संचालक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों की अनदेखी के साथ-साथ डिजिटल सुरक्षा को भी पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं। इससे ये जहाज भौतिक और साइबर दोनों तरह के दोहरे खतरे का सबब बन गए हैं। तटरक्षक बल के साइबर कमांड प्रमुख रियर एडमिरल जेसन तामा ने कहा कि हम कई वर्षों से जानते थे कि डार्क फ्लीट भौतिक रूप से बेहद खतरनाक है। पुराने जहाज, घटिया रखरखाव और सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। लेकिन जब हमारी टीमों ने इन पर चढ़ाई की और विस्तृत जांच की तो साइबर जोखिम की गंभीरता देखकर हम स्तब्ध रह गए।

रिमोट एक्सेस और मैलवेयर का खुलासा

निरीक्षण के दौरान टीमों ने पाया कि कई जहाज हाई-स्पीड इंटरनेट से जुड़े हैं और AnyDesk, TeamViewer जैसे रिमोट डेस्कटॉप सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनके जरिए मालिक दुनिया के किसी भी कोने से जहाज के सिस्टम में घुस सकते हैं। कई मामलों में ‘स्थायी पहुंच’ और ‘बिना किसी की मौजूदगी’ वाली व्यवस्था पाई गई। एक चौंकाने वाले मामले में जब अमेरिकी अधिकारियों ने एक जहाज पर कब्जा किया तो डार्क फ्लीट के ऑपरेटरों ने दूर से ही सिस्टम से सबूत मिटाने की कोशिश की। टीमों ने पायरेटेड सॉफ्टवेयर भी बरामद किए जिनमें मैलवेयर मौजूद था।

रियर एडमिरल तामा ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर नेविगेशन या इंजन कंट्रोल सिस्टम संक्रमित हो गए तो टैंकर में आग या विस्फोट का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा। लाखों गैलन कच्चा तेल ले जा रहे एक जहाज पर अगर ऐसी घटना हुई तो परिणाम पर्यावरण और वैश्विक सुरक्षा के लिए विनाशकारी होंगे।

फर्जी पहचान और AIS छेड़छाड़

जांच में यह भी सामने आया कि कुछ जहाज अपनी असली पहचान छिपाने के लिए ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं। एक जहाज पर ऐसा स्विच मिला जिससे नाविक इलेक्ट्रॉनिक रूप से जहाज का नाम बदल सकते थे। डार्क फ्लीट के मालिक स्क्रैप हो चुके जहाजों के नामों का इस्तेमाल करके ट्रैकिंग सिस्टम में अपनी मौजूदगी छिपा रहे हैं।

अमेरिकी तटरक्षक बल को उम्मीद है कि इन खुलासों के बाद रूसी तेल ढो रहे डार्क फ्लीट के खिलाफ और अधिक देश सख्त कार्रवाई करेंगे। दिसंबर में अमेरिका के नेतृत्व वाली वैश्विक मुहिम के बाद फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी समेत कई देश पहले ही ऐसे टैंकरों पर प्रतिबंध लगा चुके हैं।

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