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साइक्लोन ‘मुरासु’ आंध्र प्रदेश के तट से कब टकराएगा, किन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट?

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Source :- BBC INDIA

29 अक्तूबर को साइक्लोन अर्नब आंध्रप्रदेश के तट से टकराया था और अब सप्ताहभर के भीतर ही नया साइक्लोन मुरासु यहां पहुंचने को है

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बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना गंभीर चक्रवाती तूफ़ान ‘मुरासु’ पिछले कुछ घंटों के दौरान 25 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है.

इस साइक्लोन का असर आंध्र प्रदेश के अलावा, तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, ओडिशा, कर्नाटक और महाराष्ट्र में होगा. ग़ौरतलब है कि चक्रवात अर्नब के चलते पहले ही कई तटीय क्षेत्रों में भारी नुक़सान हुआ है.

इस चक्रवात के उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने और सोमवार रात 11:30 बजे से मंगलवार, 3 नवंबर की सुबह 4 बजे के बीच दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तट से गंभीर चक्रवाती तूफ़ान के रूप में टकराने की संभावना है. यह चक्रवात नेल्लोर और नरसापुर के बीच, ओंगोल के पास आंध्र प्रदेश के तट से टकराएगा.

मुरासु तमिल भाषा का शब्द है, जिसका मतलब है बड़े आकार का एक ढोल. परंपरागत रूप से इस ढोल का इस्तेमाल युद्ध, उत्सव और लोगों को किसी ख़तरे के प्रति आगाह करने के लिए किया जाता रहा है.

मौसम विभाग

इस दौरान हवा की रफ़्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे रहने और झोंकों के साथ 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है.

भारतीय मौसम विज्ञान ने सोमवार को बताया कि मुरासु चक्रवात अभी चेन्नई (तमिलनाडु) से लगभग 200 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व, नेल्लोर (आंध्र प्रदेश) से 210 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व, मछलीपट्टनम (आंध्र प्रदेश) से 270 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण-पूर्व, कावली (आंध्र प्रदेश) से 220 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व और ओंगोल (आंध्र प्रदेश) से 260 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित था.

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडु सोमवार को दिल्ली दौरे पर आने वाले थे मगर उन्होंने साइक्लोन मुरासु की तैयारियों के चलते अपना दौरा रद्द कर दिया है.

भारी बारिश के चलते चेन्नई एयरपोर्ट पर कई हवाई उड़ाने रद्द होने की भी ख़बरें हैं.

बारिश को लेकर चेतावनी, स्कूल-कॉलेज बंद

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी रविवार को भुवनेश्वर में विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) के कंट्रोल रूम में चक्रवात 'मुरासु' की स्थिति और उसके रास्ते की समीक्षा के दौरान डिजिटल मौसम निगरानी मानचित्र की ओर इशारा करते हुए.

चक्रवात के कारण कई राज्यों में भारी बारिश का अनुमान है.

भारतीय मौसम विभाग ने कहा है कि तटीय आंध्र प्रदेश में सोमवार और मंगलवार को ज़्यादातर जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है.

कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी और कुछ जगहों पर बेहद भारी बारिश होने की संभावना है. बुधवार को भी कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है.

तेलंगाना में भी 2 से 4 नवंबर के बीच कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश और कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है. 3 नवंबर को कुछ जगहों पर बेहद भारी बारिश होने की भी संभावना है.

तमिलनाडु के लिए भी मौसम विभाग का अनुमान लगभग ऐसा ही है.

दक्षिणी ओडिशा में भी बुधवार तक बारिश होने की संभावना है. इसके अलावा, छत्तीसगढ़ में भी चक्रवात के कारण बारिश हो सकती है.

आंध्र प्रदेश के दस जिलों में हाई अलर्ट घोषित किया गया है. यहां कई इलाकों में स्कूल कॉलेज बंद हैं. पड़ोसी ओडिशा में भी बारिश के चलते छुट्टियां घोषित की गई हैं.

द हिन्दू के मुताबिक़, तमिलनाडु में चेन्नई समेत कई जिलों के तेज बारिश की संभावना को देखते हुए सोमवार की स्कूल-कॉलेजों में छुट्टी घोषित कर दी गई है.

मौसम विभाग के सुझाव

हैदराबाद में बारिश

मौसम विभाग ने चक्रवात के दौरान कई सावधानियां बरतने की सलाह दी है. इनमें से कुछ सुझाव इस तरह हैं:

  • मछली पकड़ने का काम पूरी तरह बंद रखें.
  • समुद्र तट के पास बनी झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाएं. प्रभावित इलाक़ों के लोग घरों के अंदर रहें.
  • कमज़ोर और असुरक्षित इमारतों में न रहें.
  • मत्स्य विभाग और मछली पकड़ने के बंदरगाहों के अधिकारी मछुआरों को सतर्क करें और मौसम विभाग की ओर से जारी होने वाली समुद्री चेतावनियों पर नज़र रखें.
  • मछुआरे 3 नवंबर तक अपने इलाक़े के लिए जारी ताज़ा सलाह के मुताबिक़ ही मछली पकड़ने की गतिविधियों की योजना बनाएं.
  • शिपिंग, बंदरगाहों और समुद्र में काम करने वाली कंपनियां अपनी तैयारियों की समीक्षा करें. मौसम से प्रभावित होने वाली गतिविधियों पर संभावित पाबंदियों के बारे में जानने के लिए 3 नवंबर तक मौसम विभाग के पूर्वानुमानों पर नज़र रखें.

चार से छह मीटर उठेंगी लहरें

बीते बुधवार को चेन्नई के एन्नोर स्थित भरतियार नगर में साइक्लोन 'अर्नब' के बाद समुद्र की विशाल लहरें तट पर चट्टानों से टकराती हुईं.

मौसम विभाग का अनुमान है कि चक्रवात के कारण फूस और कच्चे मकानों को नुकसान पहुंच सकता है.

इसके अलावा, कमज़ोर इमारतों और टिन या एस्बेस्टस की छत वाले मकानों को भी ख़तरा हो सकता है.

खेती को होने वाले नुकसान के बारे में मौसम विभाग ने कहा है कि खेतों में खड़ी फ़सलों, बाग़ानों और फलों के बगीचों को नुकसान पहुंच सकता है.

इसके अलावा, कच्चे नारियल गिर सकते हैं और ताड़ के पेड़ों की पत्तियां फट सकती हैं. चक्रवात अर्नब के दौरान भी तटीय इलाक़ों में पेड़ों को भारी नुकसान हुआ था.

विभाग ने कहा है कि समुद्र में उठने वाली लहरों की ऊंचाई 4 से 6 मीटर तक हो सकती है. बाढ़ के कारण कच्ची सड़कों के कुछ हिस्से टूट सकते हैं.

इसके अलावा, बड़े शहरों में सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हो सकता है और यात्रा में ज़्यादा समय लग सकता है.

कैसे रखे जाते हैं चक्रवातों के नाम

एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक आयोग (ईएससीएपी) और विश्व मौसम संगठन (डब्लूएमओ) ने साल 2000 में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उठने वाले चक्रवातों को नाम देने की पद्धति शुरू की.

इसके तहत बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड जैसे देशों के एक समूह ने बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उठने वाले चक्रवातों के लिए 13 नामों की एक सूची सौंपी.

2018 में इन देशों के पैनल में ईरान, क़तर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और यमन का नाम भी जुड़ गया. इस पैनल का काम चक्रवातों के नाम तय करना है.

इन देशों की ओर से सुझाए गए नाम देश के नाम की वर्णमाला के हिसाब से सूचीबद्ध किए जाते हैं. इस सूची की शुरुआत बांग्लादेश से होती है.

फिर इसके बाद इसमें भारत, ईरान, मालदीव, ओमान, पाकिस्तान का नाम आता है.

इस क्रम के हिसाब से ही चक्रवातों के नाम रखे जाते हैं. 2020 में आए चक्रवात निवार के बाद जिन चक्रवातों के नाम सुनाई पड़ने वाले हैं वो हैं बुरेवी (मालदीव), तौकते (म्यांमार), यास (ओमान) और गुलाब (पाकिस्तान).

अप्रैल 2020 में इन नामों वाली नई सूची सदस्य देशों की ओर से मंजूर की गई है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS