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कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान जैसे देशें ने अपनी सीमा पर हाई अलर्ट जारी कर दिया है। इमरजेंसी जैसे हालात हैं। इधर अमेरिका ने रिपोर्ट मांगी है। वायरस ने कोरोना महामारी की खौफनाक यादें ताजा कर दी हैं।
रूस के साइबेरिया स्थित इरकुत्स्क क्षेत्र में एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक महिला लैब टेक्नीशियन दर्या शिपिलोवा की संदिग्ध मौत के बाद इलाके में महामारी का खौफ फैल गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, लैब में जांच के दौरान जिंदा बैक्टीरिया वाली टेस्ट ट्यूब टूटने से वह संक्रमित हो गई थीं। हालांकि, रूसी स्वास्थ्य निगरानी संस्था ‘रोस्पोट्रेबनादजोर’ ने इसे नकारते हुए दावा किया है कि उनकी मौत प्लेग से नहीं, बल्कि अज्ञात निमोनिया से हुई है और नमूनों में कोई घातक रोगाणु नहीं मिला।
इसके विपरीत, पड़ोसी राज्य बुरियाटिया के प्रमुख एलेक्सी त्सिदेनोव ने मौत की वजह प्लेग होने की आशंका जताई है। वहीं, रोस्पोट्रेबनादजोर के पूर्व प्रमुख गेनेडी ओनिश्चेंको का कहना है कि यह प्लेग नहीं है और ठंड के कारण संक्रमण का प्रसार संभव नहीं है।
अस्पताल सील, 200 लोग निगरानी में
मंगोलियाई सीमा के पास शेलेखोव कस्बे के जिस अस्पताल में महिला भर्ती थीं, वहां के पूरे स्टाफ को क्वारंटीन कर दिया गया है। स्वतंत्र मीडिया ‘लिउडी बैकाला’ के अनुसार करीब 200 लोग निगरानी में हैं। अस्पतालों में नए मरीजों की भर्ती रोक दी गई है और कुछ अन्य अस्पताल बंद कर दिए गए हैं। लॉकडाउन की चर्चाओं के बीच गवर्नर इगोर कोब्जेव ने शांति की अपील की है। एहतियातन सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द हैं और नजदीकी एल्युमिनियम प्लांट में मास्क अनिवार्य कर दिया गया है। मेयर मैक्सिम मोदिन के अनुसार, पिछले 10 दिनों में संस्थान के किसी अन्य कर्मी में संक्रमण नहीं मिला, हालांकि संपर्क में आए लोगों में कोविड-19 व राइनोवायरस के दो-दो मामले मिले हैं।
अमेरिका ने मांगी जानकारी
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि वह निमोनिक प्लेग से संभावित मौत की स्थिति पर सीडीसी के साथ नजर रख रहा है। अमेरिका ने रूस से सटीक जानकारी साझा करने की अपील की है। लगभग 95 शोधकर्ताओं वाला यह संस्थान साइबेरिया और सुदूर-पूर्वी क्षेत्रों में अति-जोखिम वाले संक्रमणों की रोकथाम का प्रमुख केंद्र है। इधर अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को कहा कि रूस के साइबेरिया स्थित इरकुत्स्क क्षेत्र में एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट मे लैब वर्कर की मौत के मामले पर करीबी से नजर रख रहे हैं। पत्रकारों से बात करते हुए रुबियो ने कहा कि मुझे लगता है कि चिंता की बात नहीं है।
कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान ने सुरक्षा कड़े किए
रूस में प्लेग फैलने की आशंका के चलते मध्य एशियाई देशों कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान ने अपनी सीमाओं स्वास्थ्य नियंत्रणों को कड़ा कर दिया है। किर्गिस्तान में स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी सीमा चौकियों को हाई अलर्ट पर रखा है। सीमा पार करने वाले यात्रियों, वाहनों और सामानों की कड़ाई से निगरानी की जा रही है।
उज्बेकिस्तान स्वास्थ्य प्राधिकरण ने रूस और विश्व स्वास्थ्य संगठन के डेटा के आधार पर निगरानी तेज कर दी है, ताकि संक्रमण को देश में आने से रोका जा सके। कजाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। संक्रमण फैलने का जोखिम बेहद कम है, फिर भी सीमा पर थर्मल स्क्रीनिंग और जांच की जा रही है।
जब लैब से लीक हुए घातक वायरस
● मारबर्ग वायरस (जर्मनी, 1967) युगांडा से लाए गए अफ्रीकी हरे बंदरों के टिशू कल्चर रिसर्च के दौरान वैज्ञानिक संक्रमित हुए; 31 लोग चपेट में आए 7 की मौत हुई।
● इन्फ्लूएंजा : (रूस-चीन, 1977)
1950 के दशक के फ्रोजन एचवनएनव स्ट्रेन पर वैक्सीन रिसर्च के दौरान वायरस गलती से इंसानों में फैल गया।
● चेचक (ब्रिटेन, 1978) : बर्मिंघम यूनिवर्सिटी की लैब से एयर डक्ट के जरिए स्मॉलपॉक्स लीक होने से जेनेट पार्कर की मौत हुई।
● कोरोना वायरस (वुहान, 2019) इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से वायरस लीक होने का दावा। जिस पर वैश्विक मतभेद जारी हैं।
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