Home World News hindi सिंधु संधि पर रोक से बेदम पाकिस्तान ने बुलाई ‘रुदाली पंचायत’, भारत...

सिंधु संधि पर रोक से बेदम पाकिस्तान ने बुलाई ‘रुदाली पंचायत’, भारत के खिलाफ शरीफ-मुनीर का क्या है नया प्लान?

2
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

भारत ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला लिया था। नई दिल्ली का स्पष्ट रुख है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि स्थगित रहेगी।

पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty-IWT) को स्थगित कर दिया था। इससे पश्चिमी पड़ोसी देश पाकिस्तान बौखलाया हुआ है और एक साल से लगातार इस पर हाथ-पैर मार रहा है। कोई सफलता न मिलता देख अब पाकिस्तान ने इस मुद्दे को वैश्विक मंच पर उठाने और भारत को घेरने की नई कोशिश शुरू कर दी है। इसी कड़ी में मंगलवार को इस्लामाबाद में एक मेगा इवेंट आयोजित किया जा रहा है, जहां पाक पूरी दुनिया के सामने इस मुद्दे पर रोएगा और समर्थन के लिए गिड़गिड़ाएगा।

खुफिया सूत्रों के अनुसार, इस्लामाबाद एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है, जिसके जरिए भारत पर कूटनीतिक दबाव बनाने और वैश्विक समर्थन जुटाने की कोशिश की जाएगी। इस सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर, शीर्ष नौकरशाह, सैन्य अधिकारी और कई विदेशी वक्ताओं के शामिल होने की संभावना है। सम्मेलन में पाकिस्तान अपनी नई “ग्लोबल वाटर डिप्लोमेसी स्ट्रैटेजी” पेश करेगा। पाकिस्तान की इस कवायद का मकसद दशकों पुराने जल-बंटवारे समझौते को फिर से बहाल करने के लिए पूरी दुनिया से समर्थन जुटाना है।

इस कार्यक्रम में क्या होना है?

खुफिया सूत्रों के हवाले ने न्यूज 18 की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कार्यक्रम में सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान के सख्त रुख को पेश किए जाने की उम्मीद है। इसमें भारत की जल नीति, संभावित कूटनीतिक और कानूनी प्रतिक्रियाओं, और जारी विवाद के लिए “ठोस और गैर-ठोस समाधानों” पर चर्चा होगी। बता दें कि अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने संधि को निलंबित कर दिया था। भारत के इस कड़े फैसले के बाद, पाकिस्तान पहले भी इसे कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा चुका है और एक बार फिर सिंधु जल संधि मुद्दे को उठाकर अपनी मुहिम तेज करने की फिराक में जुटा है। इस कड़ी में पाकिस्तान भारत पर “जल आतंकवाद” और “पानी रोकने” की रणनीति अपनाने का आरोप भी लगा सकता है।

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या?

सूत्रों के मुताबिक, सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने के फैसले के खिलाफ वैश्विक जनमत तैयार करना है। पाकिस्तान आने वाले महीनों में संयुक्त राष्ट्र समेत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाने की रणनीति पर काम करेगा। अधिकारियों का तर्क है कि सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान की आर्थिक जीवनरेखा है; देश की लगभग आधी कार्यशक्ति कृषि में लगी है और यह खाद्य सुरक्षा व व्यापक अर्थव्यवस्था के लिए अहम है। इस्लामाबाद का यह भी कहना है कि केवल द्विपक्षीय समझौते निलंबित होने के कारण नदी के बहाव को रोका नहीं जा सकता।

शरीफ-मुनीर की एक सोची-समझी कोशिश

हालांकि, खुफिया सूत्रों का कहना है कि यह नई कूटनीतिक पहल पाकिस्तान की उस रणनीतिक मुश्किल को भी दिखाती है जो भारत द्वारा संधि को निलंबित करने के बाद पैदा हुई है। स्थायी सिंधु आयोग जैसे द्विपक्षीय तंत्र के प्रभावी रूप से काम न करने के कारण, इस्लामाबाद इस विवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रहा है। शरीफ और मुनीर का संयुक्त रूप से इस पहल का नेतृत्व करना अधिकारियों को एक सोची-समझी कोशिश लगती है, ताकि नागरिक और सैन्य नेतृत्व की एकजुट स्थिति का संकेत दिया जा सके। पाकिस्तान अब इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बता रहा है।

घरेलू राजनीति भी बड़ा कारण

खुफिया सूत्रों का यह भी कहना है कि इस पूरे अभियान का एक घरेलू राजनीतिक उद्देश्य भी है। पाकिस्तान की सरकार बढ़ती जल सुरक्षा चिंताओं, पुराने सिंचाई तंत्र, जर्जर नहर नेटवर्क, बांधों की कमी और आर्थिक संकट जैसे आंतरिक मुद्दों से जनता का ध्यान हटाकर भारत पर केंद्रित करना चाहती है। सूत्रों के मुताबिक, सम्मेलन के अंत में पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मुहिम का एक रोडमैप जारी कर सकता है। इसमें विभिन्न वैश्विक संस्थाओं और मंचों पर भारत के खिलाफ कूटनीतिक अभियान चलाने की रणनीति शामिल होने की संभावना है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN