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सीरिया के तानाशाह रहे बशर अल-असद को मौत की सजा, रूस में रह रहे पूर्व राष्ट्रपति

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Source :- LIVE HINDUSTAN

सीरिया में दमिश्क की एक अदालत ने मंगलवार को सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद को मौत की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उन्हें पूर्व नियोजित हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए यह सजा सुनाई। उनके अलावा अदालत सीरिया के दारा प्रांत में राजनीतिक सुरक्षा के पूर्व प्रमुख आतिफ नजीब को भी फांसी की सजा सुनाई है।

सीरिया की राजधानी दमिश्क स्थित एक अदालत ने मंगलवार को देश के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद को पूर्व नियोजित हत्या के गंभीर आरोप में दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने अपने फैसले में असद के साथ-साथ दारा प्रांत में राजनीतिक सुरक्षा विभाग के पूर्व प्रमुख आतिफ नजीब को भी पूर्व नियोजित हत्या और प्रताड़ना के आरोपों में फांसी की सजा सुनाई। यह फैसला उन मामलों से जुड़ा है जो असद शासन के दौरान विपक्षी कार्यकर्ताओं, प्रदर्शनकारियों और आम नागरिकों के खिलाफ कथित रूप से अंजाम दिए गए अत्याचारों से संबंधित हैं।

अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि दोनों आरोपियों ने सत्ता में रहते हुए जानबूझकर और सुनियोजित तरीके से लोगों की हत्याएं करवाईं तथा यातनाएं दीं। नजीब पर विशेष रूप से दारा प्रांत में 2011 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा की गई क्रूर कार्रवाइयों में सक्रिय भूमिका निभाने का आरोप था। दारा ही वह क्षेत्र था जहां से असद शासन के खिलाफ सबसे पहले बड़े पैमाने पर जन आंदोलन शुरू हुआ था।

2000 में बने थे राष्ट्रपति

बशर अल-असद का सत्ता में आना सीरियाई राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा है। उनके पिता हाफिज अल-असद की मृत्यु के बाद वर्ष 2000 में वे राष्ट्रपति बने थे। उस समय कई पर्यवेक्षकों ने उन्हें युवा, आधुनिक सोच वाले और सुधारवादी नेता के रूप में देखा था। उन्होंने कुछ आर्थिक उदारीकरण और सीमित राजनीतिक खुलेपन के संकेत दिए थे। लेकिन 2011 में जब पूरे देश में अरब स्प्रिंग की लहर के साथ उनके शासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू हुए, तो असद ने इन्हें कुचलने के लिए सेना, खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा बलों का बेहद कठोर इस्तेमाल किया। सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां कीं और कई इलाकों में घेराबंदी कर दी।

गृहयुद्ध में उलझ गया सीरिया

इस दमनकारी कार्रवाई ने विरोध को और भड़का दिया और धीरे-धीरे सीरिया एक लंबे, जटिल और बेहद विनाशकारी गृहयुद्ध में उलझ गया। युद्ध के दौरान लाखों नागरिक मारे गए, करोड़ों लोग अपने घर छोड़कर शरणार्थी बनने को मजबूर हुए तथा देश का बुनियादी ढांचा लगभग पूरी तरह ध्वस्त हो गया। अंतरराष्ट्रीय संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने असद शासन पर अपनी ही जनता के खिलाफ रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल, अंधाधुंध बमबारी, सामूहिक कब्रों, जेलों में यातना और युद्ध अपराधों के गंभीर आरोप लगाए।

रूस में रह रहे पूर्व राष्ट्रपति

दिसंबर 2024 में स्थिति अचानक बदल गई। सीरियाई विद्रोही बलों ने तेजी से आगे बढ़ते हुए दमिश्क पर कब्जा कर लिया और असद सरकार का पतन हो गया। 8 दिसंबर 2024 की रात को बशर अल-असद रूसी सेना की मदद से गुप्त रूप से सीरिया छोड़कर भाग निकले। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उन्हें और उनके परिवार को राजनीतिक शरण प्रदान की। तब से असद परिवार मॉस्को में राजनीतिक शरणार्थी के रूप में रह रहा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN