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‘हनुमान अंश’: दो करोड़ से कम बजट, कमाई 300 करोड़ के क़रीब पहुँची: ‘नीब करौरी बाबा’ की कहानी में ऐसा क्या है?

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Source :- BBC INDIA

नैनीताल स्थित नीब करौरी बाबा के आश्रम का दृश्य (फ़ाइल फ़ोटो)

क़रीब पांच दशक पहले दुनिया छोड़ चुके एक संत, उत्तराखंड की पहाड़ियों में बना एक आश्रम और उस संत के जीवन से प्रेरित एक फ़िल्म.

फिल्म की शुरुआत बड़ी हिंदी फ़िल्मों जैसी नहीं थी. मगर फिल्म इस समय की सुर्खियों में शुमार हैं. इसकी वजह है ‘हनुमान अंश’ नाम की इस फ़िल्म का बॉक्स ऑफ़िस पर हिट होना.

मशहूर फ़िल्म आलोचक तरन आदर्श के मुताबिक फ़िल्म कुल रेवेन्यू के मामले में 300 करोड़ के निकट पहुँच रही है. आदर्श ने एक्स पर पोस्ट के ज़रिए लिखा है कि गुरुवार तक फ़िल्म ने कुल 272.23 करोड़ की कमाई की है.

फ़िल्म समीक्षक कोमल नहाटा का कहना है कि फ़िल्म आसानी से 350 करोड़ का आंकड़ा पार कर लेगी.

फ़िल्म का पैमाना और उसकी कमाई इसलिए भी ध्यान खींचती है क्योंकि बीबीसी न्यूज़ हिंदी से बातचीत के दौरान इस फ़िल्म की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर ने फ़िल्म की लागत को 2 करोड़ रुपये से भी कम बताया.

फ़िल्म में क्या दिखाया गया?

हनुमान अंश ‘नीब करौरी बाबा’ की ज़िंदगी और उनसे जुड़े क़िस्सों पर बनी फ़िल्म है. इसकी कहानी भोसले नाम के एक व्यक्ति से शुरू होती है, जो अपने पोते को बाबा से हुई मुलाक़ात के बारे में बताता है. फिर कहानी बाबा के बचपन में पहुंचती है.

फ़िल्म में दिखाया गया है कि लक्ष्मी नारायण अपनी मां की मौत के बाद घर छोड़ देते हैं. उन्हें लगता है कि अगर वे भगवान तक पहुंच गए, तो शायद अपनी मां से दोबारा मिल सकेंगे.

आगे चलकर उनकी यह तलाश लोगों की मदद करने और भूखों को खाना खिलाने से जुड़ जाती है. फ़िल्म में ‘नीब करौरी बाबा’ का मुख्य किरदार शोभिनव सत्या ने निभाया है.

इस फ़िल्म की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर बीबीसी से बातचीत के दौरान बतातीं हैं कि शोभिनव सत्या के लिए ये बड़ी जिम्मेदारी थी कि क्या दर्शक उन्हें बतौर एक्टर ‘नीब करौरी बाबा’ के किरदार में अपना पाएंगे, लेकिन जिस तरह से दर्शकों का रिस्पॉंस आया उससे पता चलता है कि उन्होंने शानदार किरदार निभाया है.

फ़िल्म हनुमान अंश के डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी और प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर.

द इंडियन एक्सप्रेस की फ़िल्म समीक्षक शुभ्रा गुप्ता बतातीं हैं कि शोभिनव अपने चेहरे के भाव, ठहराव और ख़ामोशी से किरदार को असरदार बनाते हैं.

स्क्रीनप्ले पर इतनी सफाई से काम किया गया है कि आपको कहानी के उस दौर का अहसास होने लगता है. आगे वो कहतीं हैं कि फिल्म में काम करने वाले लोगों ने काफी अच्छा रोल प्ले किया है.

प्रोड्यूसर की बात करें तो रागिनी सोना पहले से फ़िल्म पर काम करती रही हैं. उनके नाम के साथ साल 2004 की फ़िल्में ‘कौन है जो सपनों में आया’ और ‘शुक्रिया’ और 2005 की ‘चॉकलेट’ जुड़ी हैं. इन फ़िल्मों में वो बतौर प्रोड्यूसर काम कर चुकी हैं.

हनुमान अंश को सिनेमाघरों में बनाए रखने में भी रागिनी की भूमिका रही. SCREEN को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि दूसरे हफ़्ते फ़िल्म दिखाने वाले सिनेमाघरों की संख्या बहुत घट गई थी. उस समय उन्होंने और विशाल चतुर्वेदी ने फ़िल्म को आगे चलाने का फ़ैसला किया.

इस फ़िल्म की दूसरी प्रोड्यूसर नम्रता सिंह हैं. जो डिजिटल मीडिया और मनोरंजन कारोबार में काम कर चुकी हैं. जनवरी 2023 में प्रकाशित म्यूजिक प्लस के इंटरव्यू के मुताबिक़, वे सोनी की कंपनी SETVI में डिजिटल और नई टेक्नोलॉजी से जुड़े काम की हेड थीं.

उन्होंने बॉलीवुड हंगामा को बताया कि टीम शुरू से इस कहानी को तीन फ़िल्मों में दिखाना चाहती थी. उनके मुताबिक़, पहली फ़िल्म की शूटिंग 22 दिनों में पूरी हुई. इनमें दो दिन मुंबई में और बाक़ी शूटिंग चित्रकूट में हुई थी.

फ़िल्म का गाया वायरल

इस फ़िल्म का एक गाना इंटरनेट पर वायरल है जिसे सुनील लोधी ने गाया है. वो दोनों आंखों से दृष्टिहीन हैं. इंटरनेट पर उनका ये गाना वायरल होने के बाद उनसे कई बड़े नेता-अभिनेता मुलाकात कर उनके गाने की तारीफ़ कर चुके हैं.

भक्ति, संतों की ज़िंदगी और आस्था पर बनी कई भारतीय फ़िल्मों ने बॉक्स ऑफ़िस पर अच्छा प्रदर्शन किया है जैसे साल 2024 में रिलीज हुई फ़िल्म हनु-मान ने बॉक्स ऑफ़िस पर करीब 300 करोड़ का बिजनेस किया .

इसी के साथ में साल 2025 में रिलीज हुई फ़िल्म महावतार नरसिंह ने बॉक्स ऑफ़िस पर 325 करोड़ रुपए से ज्यादा कमाई की. धर्म-आस्था से जुड़ी ऐसी कई फ़िल्में हैं जो बॉक्स ऑफ़िस पर सुपरहिट साबित हुई हैं.

कैंची धाम में बढ़ती भीड़ के साथ मुश्किलें भी बढ़ीं

नीब करौरी बाबा, कैंची धाम आश्रम (फ़ाइल फ़ोटो).

कैंची धाम की लोकप्रियता का दूसरा पहलू वहां का इंफ्रास्ट्रक्चर है. साल 2025 की कैरिंग कैपेसिटी स्टडी की रिपोर्टिंग में करीब 74 प्रतिशत लोगों ने पार्किंग और 58 प्रतिशत ने सैनिटेशन पर असंतोष जताया था. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सामने दाख़िल उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जुड़े एक ज्वाइंट कमेटी रिपोर्ट में भी कैंची धाम आने वाले लोगों की वजह से सैनिटेशन-सॉलिड वेस्ट और सीवेज़ मैनेजमेंट पर बढ़ते दबाव का उल्लेख किया गया था.

केंद्र सरकार भी यहां इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर पैसा लगा रही है. पर्यटन मंत्रालय के आधिकारिक दस्तावेज़ में चैलेंज बेस्ड डेस्टिनेशन डेवलेपमेंट स्कीम के तहत डेवलेपमेंट ऑफ़ कैंची धाम कैंपस के लिए 17.60 करोड़ रुपये की सैंक्शन कॉस्ट दर्ज़ है.

इससे यह भी पता चलता है कि कैंची धाम के प्रति आकर्षण अब सिर्फ़ धार्मिक या सांस्कृतिक घटना नहीं रह गई है बल्कि वो प्रशासन और टूरिज़्म प्लानिंग का विषय भी बन चुकी है.

जहां ‘नीब करौरी बाबा’ का जन्म हुआ

सितंबर 2026 में उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘नीब करौरी बाबा’ से जुड़ी जगहों को एक धार्मिक पर्यटन रूट में जोड़ने की योजना आगे बढ़ाई. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ प्रस्तावित सर्किट में फिरोज़ाबाद का अकबरपुर, फर्रुख़ाबाद का नीब करौरी धाम, लखनऊ का हनुमान सेतु मंदिर और वृंदावन में बाबा से जुड़ी जगह शामिल हैं.

ये विकास ऐसे समय हो रहा है जब फ़िल्म ‘हनुमान अंश’ की सफलता ने उनसे जुड़ी जगहों और इतिहास में लोगों की नई रुचि पैदा की है.

इसी अकबरपुर में बाबा के पैतृक घर को लेकर एक विवाद भी सामने आया है. उनकी छह पोतियों ने जिला प्रशासन के सामने शिकायत कर एक ट्रस्ट पर संपत्ति के नियंत्रण को लेकर आरोप लगाए हैं. ट्रस्ट ने आरोपों से इनकार किया है और फिरोज़ाबाद प्रशासन ने दावों की जांच के लिए समिति बनाई है. फ़िलहाल अभी जांच जारी है .

नई पीढ़ी की इतनी दिलचस्पी क्यों है?

नीब करौरी आश्रम के मुख्य द्वार का फोटो.

इस सवाल का कोई सीधा जवाब नहीं है. लेकिन उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कुछ तर्क ज़रूर दिए जाते हैं. एक तरफ़ राम दास, कृष्ण दास और लैरी ब्रिलियंट के जरिए बनी दशकों पुरानी इंटरनेशनल लिगेसी है. दूसरी तरफ़ स्टीव जॉब्स और मार्क़ ज़करबर्ग से जुड़ी डॉक्यूमेंटेड स्टोरीज़ हैं.

भारत में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा जैसे चर्चित लोगों का वहां जाना और इसी बीच अब ‘हनुमान अंश’ जैसी सफ़ल फ़िल्म भी इसी कहानी का हिस्सा बन गई है.

उनके लिए आस्था रखने वालों की अपनी वजहें हैं, वहीं नई पीढ़ी तक उनकी पहचान कभी राम दास और कृष्ण दास के ज़रिए पहुंचती है, कभी स्टीव जॉब्स और मार्क ज़करबर्ग से जुड़ी कहानियों के रास्ते और अब ‘हनुमान अंश’ जैसी फ़िल्म के ज़रिए पहुंच रही है.

हालांकि इसी दौरान सोशल मीडिया पर भारतीय स्वंतत्रता आंदोलन में उनकी किसी तरह की भागीदारी नहीं होने को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणियां भी देखने को मिल रही हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS