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Gold Rate Today: सोने की कीमतों में इस सप्ताह जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से जल्द ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद कमजोर हुई, जिसका सीधा फायदा सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों को मिला। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में नरमी तथा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी बुलियन मार्केट को प्रभावित किया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच सोने की कीमत में सप्ताह के दौरान करीब 8% की तेजी दर्ज की गई। अब निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इतनी तेज बढ़त के बाद भी सोने में निवेश का मौका है या फिर कीमतों में गिरावट का इंतजार करना बेहतर होगा?
तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण
सोने की तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण इस सप्ताह अमेरिका से आए कमजोर रोजगार आंकड़े रहे। शुक्रवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अनुमान के उलट 23,000 नौकरियों की कमी आई। बाजार को करीब 80,000 नई नौकरियों के जुड़ने की उम्मीद थी। इसके अलावा पिछले दो महीनों के रोजगार आंकड़ों में भी बड़े स्तर पर संशोधन किया गया, जिससे करीब 1.03 लाख नौकरियों का पूर्व अनुमान कम हो गया।
इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था में रोजगार की मजबूती को लेकर सवाल उठे और निवेशकों को लगा कि फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों को ऊंचा रखने या आगे बढ़ाने की गुंजाइश कम हो सकती है। जब ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद कमजोर होती है, तो सोने को आमतौर पर फायदा मिलता है, क्योंकि सोना खुद कोई ब्याज नहीं देता।
इस बीच अमेरिका के प्राइवेट सेक्टर से आने वाले ADP रोजगार आंकड़े भी उम्मीद से कमजोर रहे। निजी कंपनियों में करीब 44,000 नई नौकरियां जुड़ीं, जबकि बाजार का अनुमान लगभग 75,000 का था। ISM सर्विसेस एम्प्लॉयमेंट इंडेक्स में भी गिरावट दर्ज की गई। इन संकेतों ने निवेशकों को यह सोचने पर मजबूर किया कि अमेरिकी लेबर मार्केट में धीरे-धीरे कमजोरी आ रही है। इसके बाद अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट और डॉलर के कमजोर होने से सोने की डिमांड और मजबूत हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 7 सप्ताह के उच्च स्तर तक पहुंच गया, जबकि चांदी ने भी करीब 6 सप्ताह का उच्च स्तर छुआ।
सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाला दूसरा बड़ा मुद्दा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) यानी होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सामने आई खबरें हैं। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार ईरान और ओमान के बीच बातचीत में प्रगति हुई है और इससे इस रणनीतिक जलमार्ग को दोबारा खोलने तथा तेल की सामान्य आवाजाही बहाल होने की उम्मीद बढ़ी है। अगर यहां से तेल की सप्लाई सामान्य होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। इससे वैश्विक महंगाई को लेकर चिंता भी घट सकती है और अमेरिकी फेड के लिए ब्याज दरों को लेकर फैसला कुछ अलग दिशा ले सकता है।
SEBI-रजिस्टर्ड मार्केट एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर पर दबाव डाल सकती है। अगर तेल की सप्लाई सामान्य रहती है और महंगाई नियंत्रित होती है, तो फेड की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम हो सकती है। ऐसी स्थिति सोने के लिए सकारात्मक हो सकती है। हालांकि, सोने की कीमतों के लिए अमेरिकी महंगाई के आंकड़े, फेडरल रिजर्व की टिप्पणियां, डॉलर, बॉन्ड यील्ड और मध्य पूर्व की स्थिति आगे भी महत्वपूर्ण ट्रिगर बने रहेंगे।
अब सवाल है कि क्या अभी सोना खरीदना चाहिए? इनरिच मनी (Enrich Money) के CEO पोनमुडी आर के मुताबिक सोने का शॉर्ट-टर्म फंडामेंटल आउटलुक मजबूत हुआ है। अमेरिकी रोजगार बाजार में कमजोरी और बॉन्ड यील्ड में संभावित गिरावट सोने को सपोर्ट कर सकती है। हालांकि, इतनी तेज तेजी के बाद निवेशकों को एकमुश्त खरीदारी के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करने पर विचार करना चाहिए, यानी कीमतों में गिरावट आने पर धीरे-धीरे खरीदारी करना जोखिम को नियंत्रित करने का बेहतर तरीका हो सकता है।
तकनीकी स्तरों की बात करें तो अनुज गुप्ता के मुताबिक MCX Gold में ₹1,52,000 के आसपास महत्वपूर्ण स्तर बना हुआ है। ₹1,49,400 और ₹1,47,000 तत्काल सपोर्ट के तौर पर देखे जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में COMEX Gold के लिए करीब $4,350 का सपोर्ट और $4,450 प्रति औंस का रेजिस्टेंस बताया गया है। वहीं पोनमुडी आर के मुताबिक MCX गोल्ड अक्टूबर फ्यूचर्स ने ₹1,52,000 के आसपास सप्ताह का अंत किया और 20-वीक EMA के ऊपर मजबूती दिखाई। तकनीकी संकेतक भी तेजी की ओर इशारा कर रहे हैं।
आगे की बात करें तो ₹1,52,200-₹1,52,800 का स्तर महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस है। इसके ऊपर मजबूती से टिकने पर ₹1,54,100-₹1,54,800 का अगला जोन खुल सकता है। अगर ₹1,54,800 के ऊपर लगातार क्लोजिंग मिलती है, तो सोना नए रिकॉर्ड स्तरों की ओर बढ़ सकता है। दूसरी तरफ ₹1,50,000-₹1,50,700 शुरुआती सपोर्ट और ₹1,48,000-₹1,48,600 अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है। ₹1,48,000 के नीचे गिरावट आने पर मौजूदा तेजी की रफ्तार कमजोर पड़ सकती है।
सोने का आउटलुक फिलहाल सकारात्मक नजर आ रहा है, लेकिन कीमतों में तेज उछाल के बाद जोखिम भी बढ़ गया है। इसलिए निवेशकों को केवल तेजी देखकर जल्दबाजी में बड़ी रकम लगाने से बचना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशक अपनी जरूरत, पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी और जोखिम क्षमता के हिसाब से धीरे-धीरे निवेश कर सकते हैं। वहीं शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स के लिए सपोर्ट और रेजिस्टेंस के स्तर महत्वपूर्ण रहेंगे। सोने की अगली दिशा काफी हद तक अमेरिकी महंगाई और रोजगार आंकड़ों, फेड की नीति, डॉलर-ट्रेजरी यील्ड तथा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज और मिडिल ईस्ट से जुड़ी खबरों पर निर्भर करेगी। इसलिए मौजूदा स्तर पर “Buy on Dips” रणनीति पर नजर रखना, तेज उछाल के बाद पीछा करके खरीदने की तुलना में अधिक सावधानी वाला तरीका हो सकता है।
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