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https://www.livehindustan.com/lh-img/smart/img/2026/06/24/1200x900/Haryanvi_Songs_1782291653935_1782291662680_03240d1e-0cf7-4129-bc1d-dbc3a9e9376c.jpgHaryanvi Songs: बीते कुछ सालों में हरियाणवी गानों में काफी बदलाव आया है, सिर्फ म्यूजिक या बोल ही नहीं बल्कि म्यूजिक वीडियो भी काफी हद तक बदल चुके हैं। आखिर क्या है तेजी से आए इस बदलाव की वजह?
क्या आपने भी नोटिस किया है कि हरियाणवी गानों में अब वो ठेठपन या म्यूजिक वीडियोज में वह दबंगई नजर नहीं आती है? अगर हां, तो आप बिलकुल सही हैं। क्योंकि ऐसा महज इत्तेफाकन नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे प्रशासन स्तर पर बरती गई कई सख्तियां और जनता की बदलती पसंद है। पिछले कुछ सालों में हरियाणवी म्यूजिक इंडस्ट्री में कई अहम और अभूतपूर्व बदलाव किए गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह आया है कि अब गानों से गन कल्चर पूरी तरह हटाया जा रहा है। गैंगस्टर लाइफस्टाइल और हथियारों को बढ़ावा देने वाले गानों पर कड़ा एक्शन और बैन लगाया जा रहा है।
67 से ज्यादा गानों पर लगाया गया बैन
हाल ही में हरियाणा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और साइबर यूनिट ने एक बड़ा क्रैकडाउन किया। इन दोनों ही टीम्स ने मिलकर माफिया, हिंसा और हथियारों का ग्लोरिफाई करने वाले 67 से ज्यादा गानों को यूट्यूब और स्पॉटिफाई जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से हटवाया गया या ब्लॉक करवा दिया गया। मशहूर आर्टिस्ट मासूम शर्मा के करीब 19 गाने इस एक्शन की भेंट चढ़ गए। अमित सैनी रोहतकिया, नरेंद्र भगाना और राहुल पुथी जैसे बड़े आर्टिस्ट के गानों को भी यूट्यूब, स्पॉटिफाई, अमेजन म्यूजिक और जियो सावन से पूरी तरह साफ कर दिया गया। इन गानों को हरियाणा में आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा देने या उकसाने वाला माना गया।
DGP ने सिंगर्स को दिया यह साफ निर्देश
हरियाणा के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) ने साफ कहा कि जो भी सिंगर गानों या वीडियो के जरिए युवाओं को गैंग कल्चर की तरफ बढ़ने को उकसाएंगे, उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। यानि कानून इस तरह के उकसावे और भड़कावे को बर्दाश्त करने के जरा भी मूड में नहीं है। लेकिन एक्शन सिर्फ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद गानों पर नहीं हुआ है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के आदेशों और राज्य सरकार की नीतियों के मुताबिक लाइव कॉन्सर्ट, शादियों या पब्लिक इवेंट्स पर भी सख्ती हुई है। ऐसे आयोजनों में शराब, ड्रग्स और हथियारों को प्रमोट करने वाले गाने बजाने पर रोक लगाई गई है।
गानों में लाठी ने ली बंदूक-तमंचों की जगह
सामाजिक नजरिए से देखा जाए तो यह एक काफी अच्छा कदम है, लेकिन म्यूजिक और सॉन्ग मेकर्स के नजरिए से तस्वीर थोड़ी अलग है। अचानक हुए इस एक्शन के बाद निर्देशकों और कलाकारों ने सरकार से अपील की है कि वो उन्हें एक साफ पॉलिसी या सेंसर गाइडलाइन बनाकर दी जाए, ताकि उन्हें पता चल सके कि गाने में क्या लिखना/गाना है और क्या नहीं। गाइडलाइन्स कब तक आएंगी कहना मुश्किल है, लेकिन अभी पुलिस के कड़े रुख के बाद अब म्यूजिक वीडियो मेकर्स अपने गानों में बदलाव कर रहे हैं। गानों में बंदूक और पिस्तौल की जगह ‘लाठी’ या ‘सोंटा’ का इस्तेमाल किया जा रहा है।
ग्लोबल हुआ हरियाणवी म्यूजिक का क्रेज
लीगल एक्शन और फाइनेंशियल लॉस से बचने के लिए अब सिंगर्स लव स्टोरी, फैमिली ड्रामा, कॉमेडी और ठेठ हरियाणवी कल्चर पर गाने ज्यादा बना रहे हैं। हरियाणवी म्यूजिक और वीडियोज में बदलाव जरूर आया है, लेकिन अगर आप सोच रहे हैं कि इससे हरियाणवी म्यूजिक की रीच घटी है, तो ऐसा बिलकुल नहीं है। बल्कि इन तमाम विवादों और बैन के बावजूद हरियाणवी म्यूजिक का क्रेज ग्लोबल हो चुका है। मासूम शर्मा और न्योलीवाला के गाने बिलबोर्ड इंडिया टॉप-20 चार्ट में भी ट्रेंड कर चुके हैं।
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