Source :- BBC INDIA
इमेज स्रोत, Aaron Schwartz/Getty Images
प्रकाशित
पढ़ने का समय: 6 मिनट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान ‘जल्द ही आत्मसमर्पण’ करेगा. उन्होंने पत्रकारों से कहा, “जैसे ही ईरान आत्मसमर्पण करेगा और युद्ध समाप्त होगा, तेल की क़ीमतें धराशायी हो जाएंगी.”
इस बीच ईरान की आईआरजीसी ने एक अमेरिकी पनडुब्बी को अपने क़ब्ज़े में लेने का दावा किया है. उन्होंने इससे जुड़ा एक वीडियो भी शेयर किया है.
इससे पहले ईरान ने दावा किया था कि क्षेत्र में अमेरिका की स्थिति अच्छी नहीं है और वह सैन्य हमला कर सकता है.
ये सारे घटनाक्रम राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से ईरान के प्रस्ताव को ठुकराने के 24 घंटे के दौरान हुए हैं. ट्रंप ने ईरान के होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने के प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया था.
रविवार को उन्होंने पत्रकारों से कहा, “मैं उनके प्रस्ताव को ख़ारिज करता हूं. वे बुरी तरह नाकाम हो रहे हैं, और इसलिए होर्मुज़ स्ट्रेट को तुरंत फिर से खोलने पर सहमत होना चाहते हैं.”
ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा कि ईरान का प्रस्ताव ‘स्वीकार्य’ नहीं है. उन्होंने कहा कि तेहरान सात दिनों के भीतर व्यावसायिक जहाज़ों के लिए स्ट्रेट खोलने का समझौता करना चाहता है, क्योंकि “वे बुरी तरह हार रहे हैं.”
वहीं वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अज्ञात अमेरिकी अधिकारियों का हवाला देते हुए बताया था कि डोनाल्ड ट्रंप को उम्मीद है कि मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान पर हवाई हमले फिर से शुरू हो जाएंगे.
ईरान का अमेरिकी पनडुब्बी पकड़ने का दावा
इमेज स्रोत, IRGC
आईआरजीसी नौसेना का कहना है कि एक ‘उन्नत ड्रोन’ ने ‘खुफिया जानकारी और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध’ के जरिए अमेरिकी सेना को ‘फंसा’ लिया है और उसकी एक पनडुब्बी को पकड़ लिया है.
बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, आईआरजीसी नौसेना के बयान में कहा गया है कि यह रिमोट से संचालित मानवरहित पनडुब्बी ‘रेमस 600 नामक स्मार्ट और उन्नत पनडुब्बियों में से एक है’ और अब इसके बारे में ज़्यादा जानकारी पाने के लिए विशेषज्ञों को सौंप दिया गया है.
रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने पानी से एक पनडुब्बी को बाहर निकालते हुए एक वीडियो भी जारी किया है और अपने बयान में इस बात पर जोर दिया है कि ‘होर्मुज़ स्ट्रेट बंद है.’
वहीं रविवार को ईरान के सैन्य प्रवक्ता ने अमेरिका की ओर से संभावित हमले की चेतावनी दी है.
बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, ईरान के एक सैन्य प्रवक्ता का कहना है कि क्षेत्र में अमेरिका की स्थिति ‘अच्छी नहीं है’ और इसलिए वह ‘सैन्य आक्रामकता’ कर सकता है.
ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया ने कहा कि ईरान की सेना ‘दुश्मन से लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार है.’
इससे पहले, ईरान के सशस्त्र बलों के वरिष्ठ प्रवक्ता ने अमेरिका को चेतावनी दी थी कि यदि उसने होर्मुज़ स्ट्रेट में हस्तक्षेप किया तो उसे “मुंह पर करारा तमाचा” मिलेगा.
अबुलफ़जल शेख़रची ने यह भी कहा कि अमेरिका के पास “पश्चिम एशिया छोड़ने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है” और सलाह दी कि अमेरिकी सेना जितनी जल्दी इस क्षेत्र को छोड़ देगी, उन्हें उतना ही कम नुक़सान होगा.
वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष को ख़त्म करने के लिए सिर्फ “बातचीत से निकला समाधान” ही रास्ता हो सकता है.
ईरान के विदेश मंत्री ने यह बात राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने के प्रस्ताव को सार्वजनिक रूप से ख़ारिज किए जाने के बाद कही.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने टेलीग्राम पर एक पोस्ट में ट्रंप के प्रस्ताव ख़ारिज करने की बात स्वीकार की, लेकिन कहा कि ईरान अमेरिका के ‘अंतिम’ आधिकारिक जवाब का इंतजार करेगा.
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पहले भी विरोधाभासी बयान दे चुके हैं.
अराग़ची ने कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेयट खोलने की शर्तें वही हैं, जिन्हें जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) में शामिल किया गया था.
ईरान ने कहा कि उसने इस सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई बातचीत में होर्मुज़ को फिर से खोलने और संघर्ष ख़त्म करने का मुद्दा उठाया था.
अमेरिका ने बढ़ाया दबाव
इमेज स्रोत, Angelina Katsanis/Bloomberg via Getty Images
पिछले सप्ताह से अमेरिका ने ईरान पर अपनी नाकेबंदी को और कड़ा कर दिया है, जिसमें ईरानी विमानों की उड़ानें और उन्हें सेवाएं देना शामिल है.
अमेरिका ने 27 ईरानी एयरलाइनों को प्रतिबंधों की सूची में डाल दिया है, जो 23 सितंबर से प्रभावी हो गई है.
इसके बाद, कुछ देशों ने ईरानी एयरलाइंस को सेवाएं देने से इनकार कर दिया, और ईरान से अन्य देशों के लिए आने जाने वाली कई उड़ानें रद्द कर दी गईं.
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिवालय का कहना है कि देश का हवाई प्रतिबंधों का मुक़ाबला करने के लिए सैन्य कार्रवाई करने का कोई इरादा नहीं है.
इससे पहले, सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेज़ाई ने ईरानी टेलीविज़न को दिए एक इंटरव्यू में ईरान के पड़ोसी देशों को चेतावनी दी थी.
उन्होंने कहा था, “अगर कोई देश अमेरिका के साथ सहयोग और दुस्साहस करता है, तो उसके हवाई अड्डों पर उड़ानें संचालित नहीं हो पाएंगी.”
क्या था ईरान का प्रस्ताव

ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका के सामने एक प्रस्ताव की घोषणा की है, जिसके तहत ईरान ने कहा है कि अमेरिका सात शर्तों को लागू कर दे तो सात दिनों के भीतर होर्मुज़ स्ट्रेट को खोल दिया जाएगा.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान पत्रकारों से कहा कि ये शर्तें ‘कोई नई बात नहीं’ हैं और इस्लामाबाद समझौते से अलग नहीं हैं.
अब्बास अराग़ची ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान की मौजूदगी में एक बैठक में पत्रकारों को बताया कि ईरान ने मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका के सामने एक प्रस्ताव पेश किया है.
उन्होंने इसके बारे में बताते हुए कहा कि अगर ईरान की शर्तें पूरी हो जाती हैं, तो सात दिनों के अंत में होर्मुज़ स्ट्रेट को खोल दिया जाएगा, जिसके बाद अंतिम समझौते पर पहुंचने के लिए बातचीत फिर से शुरू होगी.
न्यूयॉर्क टाइम्स अख़बार, जिसका एक रिपोर्टर बैठक में मौजूद था, उसने ईरानी विदेश मंत्री के हवाले से बताया कि इस अवधि के दौरान, लेबनान सहित सभी जगहों पर दुश्मनी समाप्त करने, ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी ख़त्म करने, ईरानी तेल निर्यात के लिए प्रतिबंधों में छूट देने और तेहरान को कम से कम 12 अरब डॉलर की फ्रीज़ की गई संपत्तियों तक पहुंच देने की मांग की गई थी.
होर्मुज़ स्ट्रेट एक अहम जलमार्ग है और आम दिनों में दुनिया की क़रीब 20 फ़ीसदी गैस और तेल आपूर्ति इसी से होती रही है.
फ़रवरी में ईरान युद्ध युद्ध शुरू होने के बाद से यह आमतौर पर बंद है, जिससे ऊर्ज़ा की क़ीमतों में काफ़ी बढ़ोतरी हुई है.
चीन की अपील
इमेज स्रोत, CHARLY TRIBALLEAU / AFP via Getty Images
संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में, चीनी उपराष्ट्रपति हान झेंग ने मध्य पूर्वी देशों की संप्रभुता और सुरक्षा के सम्मान का आह्वान किया.
उन्होंने कहा, “चीन का मानना है कि खाड़ी देशों सहित मध्य पूर्वी देशों की संप्रभुता और सुरक्षा का सम्मान किया जाना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक प्रक्रियाएं और आपूर्ति श्रृंखलाएं स्थिर और निर्बाध बनी रहनी चाहिए, और वैश्विक व्यापार की रक्षा की जानी चाहिए.”
हान झेंग ने फ़लस्तीन की संप्रभुता की मान्यता और ग़ज़ा के पुनर्निर्माण की भी मांग की.
ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध बढ़ा दिए हैं, और इन आर्थिक प्रतिबंधों को “ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट” नाम दिया है.
अमेरिका, आर्थिक दबाव का इस्तेमाल कर होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाज़ों पर हमले रोकने के लिए मजबूर करने की कोशिश कर रहा है.
लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदार इन प्रतिबंधों पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं.
इनमें चीन भी शामिल है, जो ईरानी तेल का सबसे बड़ा ख़रीदार है. चीन ने अमेरिका के पिछले प्रतिबंधों की अनदेखी की है और ईरान के साथ कारोबार जारी रखा है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट… सब एक जगह
कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.
SOURCE : BBC NEWS




