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₹10 हजार से भी अब कॉरपोरेट बॉन्ड में निवेश, सेबी ने छोटे निवेशकों को दिया तोहफा

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Source :- LIVE HINDUSTAN

भारतीय शेयर बाजार नियामक सेबी ने छोटे यानी रिटेल निवेशकों के लिए बॉन्ड मार्केट की राह आसान कर दी है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने बताया कि कॉरपोरेट बॉन्ड को आम निवेशकों तक पहुंचाने के लिए ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म के जरिए निवेश की सुविधा दी जा रही है। इसके साथ ही बॉन्ड में निवेश की न्यूनतम रकम घटाकर ₹10,000 कर दी गई है। इसका मतलब है कि अब छोटे निवेशक भी शेयर बाजार के अलावा बॉन्ड में कम रकम से निवेश कर सकते हैं। बता दें कि कॉरपोरेट बॉन्ड में अब तक कम से कम एक लाख रुपये से ही निवेश किया जाता था।

क्या है सेबी का प्लान?

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट में निवेशक आमतौर पर सिक्योरिटीज को मैच्योरिटी तक अपने पास रखते हैं। इससे बॉन्ड की खरीद-बिक्री वाला सेकेंडरी मार्केट ज्यादा सक्रिय नहीं हो पाता। सेबी इस पैटर्न को बदलना चाहता है। सेबी चेयरमैन ने कहा कि मार्केट मेकिंग व्यवस्था सेबी के एजेंडा में है और बॉन्ड सूचकांकों में एक्सचेंज पर कारोबार की अनुमति देने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है।

रीट और इनविट पर क्या बदला?

सेबी के निदेशक मंडल ने रीट और इनविट की यूनिट के आधार पर डिपॉजिटरी रसीद जारी करने के लिए संबंधित नियमों में संशोधन को मंजूरी दी। सेबी ने कहा कि इससे इन निवेश माध्यमों में डिपॉजिटरी रसीद के जरिये विदेशी पूंजी आकर्षित करने में मदद मिलेगी। निदेशक मंडल ने रीट और इनविट से जुड़े मतदान नियमों में भी बदलाव किया। अब कुछ मामलों में 75 प्रतिशत की मंजूरी कुल बकाया यूनिट के बजाय मतदान में पड़े कुल मतों के आधार पर तय होगी। सेबी ने कहा कि इससे बिखरे स्वामित्व और कुछ यूनिटधारकों के मतदान में हिस्सा नहीं लेने से आने वाली दिक्कतें दूर होंगी।

सेबी ने ऋण यानी डेट सिक्योरिटीज को पहली बार सूचीबद्ध कराने वाली इकाइयों के लिए पहले से जारी सभी गैर-सूचीबद्ध गैर-परिवर्तनीय डेट सिक्योरिटीज को अनिवार्य रूप से सूचीबद्ध कराने की व्यवस्था हटाने को भी मंजूरी दी। इसके तहत अब केवल भविष्य में जारी होने वाली ऐसी डेट सिक्योरिटीज को सूचीबद्ध करना होगा। सेबी ने कहा कि इससे परिचालन संबंधी दिक्कतें और अनुपालन लागत कम होगी।

सेबी ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को फिजिकल रूप से सैटल किए जाने वाले गैर-कृषि जिंस डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स में भाग लेने की अनुमति देने का फैसला किया। सेबी ने कहा कि किसी एफपीआई को एक्सचेंज पर कारोबार की अनुमति मिलने से पहले अपने ट्रेडिंग सदस्य या ट्रेडिंग-कम-क्लियरिंग सदस्य के साथ समझौता करना होगा। इसमें डिलिवरी अवधि शुरू होने से पहले एफपीआई की खुली स्थिति को समाप्त करने या उसे संबंधित सदस्य को हस्तांतरित करने की व्यवस्था होगी। इसके साथ ही नियामक ने सैटलमेंट व्यवस्था में बदलाव करते हुए 10 लाख रुपये तक की सैटलमेंट रकम वाले मामलों के लिए त्वरित प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया।

-सेबी ने पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवा (पीएमएस) ढांचे में व्यापक बदलाव को मंजूरी दी है। इसके तहत पोर्टफोलियो प्रबंधकों को आईपीओ और प्राथमिक बाजार में जारी होने वाली डेट सिक्योरिटीज, विदेशी सिक्योरिटीज की व्यापक श्रेणी में निवेश की अनुमति दी गई है।

-सेबी ने शेयर ब्रोकर, म्यूचुअल फंड, निवेश सलाहकार और पोर्टफोलियो प्रबंधकों समेत बाजार मध्यस्थों के लिए साझा विज्ञापन संहिता को भी मंजूरी दी। इसके तहत ब्रांड या संस्था के प्रचार के लिए नामचीन हस्तियों का इस्तेमाल किया जा सकेगा, लेकिन किसी विशिष्ट वित्तीय उत्पाद या सेवा का प्रचार नहीं किया जा सकेगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN