Source :- LIVE HINDUSTAN
देश की प्रमुख ज्वेलरी और गोल्ड एक्सपोर्ट कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स एक बार फिर सुर्खियों में है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कंपनी और उसके प्रमोटर्स से जुड़े बेंगलुरु और मुंबई के कई ठिकानों पर छापेमारी के बाद ऐसे खुलासे किए हैं, जिन्होंने निवेशकों और मार्केट एक्सपर्ट दोनों को चौंका दिया है। ED की जांच में कंपनी के विदेशी लेनदेन, स्टॉक रिकॉर्ड, शेयर ट्रेडिंग और फंड फ्लो से जुड़े कई गंभीर सवाल सामने आए हैं। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
ED के मुताबिक, जांच के दौरान सबसे बड़ी समस्या यह सामने आई कि कंपनी कई महत्वपूर्ण विदेशी लेनदेन से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सकी। एजेंसी का कहना है कि आयात-निर्यात, विदेशी निवेश और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े कई रिकॉर्ड या तो मिले नहीं या कंपनी ने उपलब्ध नहीं कराए। खास तौर पर कंपनी द्वारा अफ्रीका की खदानों में किए गए करीब ₹1,035 करोड़ के निवेश को लेकर कोई ठोस दस्तावेज जांच एजेंसी को नहीं मिले।
जांच में एक और बड़ा मामला लगभग ₹3,000 करोड़ के विदेशी व्यापारिक लेनदेन का सामने आया है। ED का आरोप है कि कंपनी ने UAE और अन्य विदेशी देशों की कुछ संदिग्ध कंपनियों के साथ व्यापारिक देनदारियों और प्राप्तियों का समायोजन (Set-off) किया, जिससे असली पैसों की आवाजाही को ट्रैक करना मुश्किल हो गया। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन लेनदेन के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था।
सबसे चौंकाने वाली बात कंपनी के स्टॉक रिकॉर्ड को लेकर सामने आई। ED ने दावा किया कि फैक्ट्री में मौजूद वास्तविक स्टॉक और कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज स्टॉक के बीच लगभग 40% का अंतर पाया गया, यानी कागजों में जो माल दिखाया गया, उसका बड़ा हिस्सा मौके पर मौजूद नहीं था। यह अंतर जांच एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
CFO को साल 2020 के बाद कोई वेतन नहीं
कंपनी के प्रबंधन से जुड़े तथ्यों ने भी कई सवाल खड़े किए हैं। ED के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स जैसी बड़ी कंपनी, जिसने हाल के सालों में लाखों करोड़ रुपये का कारोबार दिखाया, उसके मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) को साल 2020 के बाद कोई वेतन नहीं मिला। वहीं कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर की मासिक सैलरी मात्र ₹17,000 बताई गई है। इतनी बड़ी कंपनी के टॉप अधिकारियों का यह वेतन ढांचा जांच एजेंसी को असामान्य और संदिग्ध लग रहा है।
इसके अलावा ED ने कंपनी के शेयरों में हुए कुछ ब्लॉक ट्रेड्स को भी जांच के दायरे में लिया है। एजेंसी का दावा है कि कुछ ऐसे व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं, जिनका संबंध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑफशोर कंपनियों के खुलासे करने वाले ICIJ (International Consortium of Investigative Journalists) की रिपोर्टों में भी दिखाई देता है। जांच में यह भी आशंका जताई गई है कि एनआरआई बेनामी निवेशकों के जरिए शेयरों में हेरफेर कर भारत से ₹600 करोड़ से अधिक की राशि बाहर भेजी गई हो सकती है।
गौरतलब है कि हाल ही में SEBI ने भी राजेश एक्सपोर्ट्स पर फाइनेंशियल अनियमितताओं और कथित गलत लेखांकन को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद ED की कार्रवाई ने कंपनी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। फिलहाल, कंपनी की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन बाजार की नजर अब जांच के अगले चरण पर टिकी हुई है।
निवेशकों के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि राजेश एक्सपोर्ट्स लंबे समय से भारत की सबसे बड़ी ज्वेलरी निर्यात कंपनियों में गिनी जाती रही है। अब ED और SEBI की जांच के बाद आने वाले दिनों में कंपनी के भविष्य और उसके शेयरों पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
SOURCE : LIVE HINDUSTAN




