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HDFC बैंक में ₹45 करोड़ के कथित भुगतान को लेकर इंटरनल जांच की खबर सामने आने के बाद शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के मुताबिक यह रकम महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को डिफरेंशियल इंटरेस्ट के रूप में कथित तौर पर मार्केटिंग खर्च के जरिए दी गई थी। इस मामले में जांच की जा रही है।
भारत के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC (HDFC Bank) को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आने के बाद शेयर बाजार में हलचल तेज हो गई है। बुधवार को बैंक के शेयर करीब 2% तक टूट गए और इंट्राडे कारोबार में ₹761 के स्तर तक पहुंच गए। गिरावट की वजह एक कथित आंतरिक जांच बताई जा रही है, जिसमें ₹45 करोड़ के भुगतान को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं। यह मामला बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता, कॉरपोरेट गवर्नेंस और नियमों के पालन को लेकर चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
इंडियन एक्सप्रेस और इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पूरा मामला महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (Maharashtra State Road Development Corporation) यानी MSRDC से जुड़ा है। आरोप है कि बैंक ने इस सरकारी एजेंसी को तय ब्याज दर से ज्यादा रिटर्न देने के लिए कथित तौर पर एक अलग व्यवस्था बनाई। कहा जा रहा है कि अतिरिक्त ब्याज सीधे खाते में देने के बजाय इसे मार्केटिंग खर्च के रूप में दिखाया गया और रोड सेफ्टी कैंपेन के नाम पर कुछ वेंडर्स के जरिए भुगतान किया गया।
बताया जा रहा है कि बैंक के मार्केटिंग विभाग की FY25 की इंटरनल ऑडिट के दौरान इस लेनदेन पर सवाल उठे। ऑडिट रिपोर्ट में विभाग की कार्यप्रणाली को असंतोषजनक बताया गया, जिसके बाद बैंक की ऑडिट कमेटी ने आंतरिक सतर्कता जांच (Internal Vigilance Investigation) शुरू करने का फैसला लिया।
इस मामले में सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर गया कि कथित फैसलों में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बैंक के CEO शशिधर जगदीशन (Sashidhar Jagdishan) उन चर्चाओं में शामिल थे, जिनमें MSRDC को अतिरिक्त रिटर्न देने के विकल्पों पर विचार हुआ था। हालांकि, अभी तक बैंक की ओर से किसी भी तरह की आधिकारिक गलती स्वीकार नहीं की गई है।
जानकारी के अनुसार साल 2021 में HDFC बैंक ने MSRDC के बड़े डिपॉजिट को आकर्षित करने की कोशिश की थी। उस समय बैंक सेविंग अकाउंट पर लगभग 3.5% ब्याज दे रहा था, जबकि दूसरी वित्तीय संस्थाएं 6% या उससे ज्यादा रिटर्न ऑफर कर रही थीं। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि MSRDC ने लगभग 6.01% रिटर्न की मांग रखी थी, जिसके बाद बैंक के अंदर विशेष व्यवस्था तैयार की गई।
बताया जा रहा है कि बैंक ने कुछ समय के लिए 4.5% तक का स्पेशल इंटरेस्ट रेट भी मंजूर किया था, लेकिन अपेक्षित डिपॉजिट नहीं आने के बाद यह व्यवस्था बंद कर दी गई। इसके बाद कथित तौर पर अतिरिक्त ब्याज को मार्केटिंग स्पेंड के जरिए एडजस्ट करने की योजना बनाई गई।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कई दस्तावेज लीगल और कंप्लायंस टीम से बिना मंजूरी के तैयार किए गए थे। साथ ही RBI के नियमों के संभावित उल्लंघन की बात भी कही गई है। नियमों के मुताबिक बैंक किसी खास ग्राहक को अलग से तय ब्याज दर नहीं दे सकते। वहीं, बैंक की एंटी-ब्राइबरी और एंटी-करप्शन पॉलिसी के उल्लंघन की आशंका भी जताई गई है। फिलहाल, मामले की जांच जारी है।
शेयर परफॉर्मेंस
हालिया इंटरनल जांच से जुड़ी खबरों के बाद निवेशकों में थोड़ी चिंता बढ़ी है, जिसका असर शेयर पर साफ दिखाई दिया। HDFC बैंक के शेयर में आज 27 मई 2026 दबाव देखने को मिला और NSE पर यह स्टॉक 2.22% की गिरावट के साथ ₹761.60 पर बंद हुआ।
इस खबर के सामने आने के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि बैंकिंग सेक्टर में भरोसा सबसे बड़ा आधार माना जाता है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अभी जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष आने से पहले किसी ठोस नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। फिर भी इस पूरे मामले ने कॉरपोरेट गवर्नेंस और बैंकिंग पारदर्शिता पर एक नई बहस जरूर शुरू कर दी है। (S&C-Indian Express/economic times)
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