Source :- LIVE HINDUSTAN
भारत और न्यूजीलैंड के बीच FTA (Free Trade Agreement) अब 20 अक्टूबर 2026 से लागू हो जाएगा। इन दोनों देशों ने समझौते की प्रॉसेस पूरी कर ली है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 21 सितंबर को इसकी जानकारी दी। खास बात यह है कि इस समझौते के लागू होने के साथ ही भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले सभी एक्सपोर्ट को पहले दिन से 100% ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा। इससे भारतीय कंपनियों को न्यूजीलैंड के बाजार में टैरिफ से जुड़ा फायदा मिलेगा। आइए जरा विस्तार से इस डील की डिटेल्स जानते हैं।
इस ट्रेड डील (Trade Deal) का असर कई भारतीय सेक्टर्स पर देखने को मिल सकता है। इंजीनयरिंग गुड्स (Engineering Goods), ऑटोमोबाइल्स (Automobiles), ऑटो कंपोनेंट्स (Auto Components), एयरोस्पेस (Aerospace) और डिफेंस (Defence) जैसे क्षेत्रों के लिए न्यूजीलैंड के बाजार में बेहतर पहुंच का रास्ता खुलेगा। भारत पहले से न्यूजीलैंड को फार्मासुटिकल (Pharmaceuticals), टेक्सटाइल (Textiles), इंजीनयरिंग गुड्स (Engineering Goods) और रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट (Refined Petroleum Products) जैसे सामान एक्सपोर्ट करता है। वहीं न्यूजीलैंड से भारत आने वाले प्रमुख उत्पादों में वुड और फॉरेस्ट्री (Forestry Products), वूल (Wool), मेटल्स (Metals) और एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट (Agricultural Products) शामिल हैं।
ट्रेड को दोगुना कर ₹35,000 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य
FTA के तहत दोनों देशों ने कारोबार बढ़ाने का भी लक्ष्य रखा है। पीयूष गोयल के मुताबिक, भारत और न्यूजीलैंड 2030 तक गुड्स और सर्विसेस ट्रेड को दोगुना करके ₹35,000 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य रखते हैं। मौजूदा समय में दोनों देशों के बीच गुड्स और सर्विसेस ट्रेड करीब 2.4 अरब डॉलर यानी लगभग ₹20,000 करोड़ के आसपास था। भारत सरकार का कहना है कि ड्यूटी-फ्री एक्सेस (Free Access) से भारतीय एक्सपोर्टर्स को उन देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति मिल सकती है, जिनके साथ न्यूजीलैंड के पहले से ट्रेड एग्रीमेंट (Trade Agreements) हैं।
इंवेस्टमेंट को लेकर भी बड़ा प्रावधान
समझौते में इंवेस्टमेंट को लेकर भी बड़ा प्रावधान है। न्यूजीलैंड ने अगले 15 सालों में भारत में 20 अरब डॉलर तक के इंवेस्टमेंट को फैसिलेटेड करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके तहत न्यूजीलैंड की कंपनियां भारत में मैन्युफैक्चरिंग और बिजनेस ऑपरेशन्स स्थापित कर सकती हैं। इससे उन्हें भारत के बड़े डोमेस्टिक मार्केट के साथ उन दूसरे देशों में एक्सपोर्ट करने का अवसर भी मिल सकता है, जिनके साथ भारत के ट्रेड एग्रीमेंट हैं।
कुछ सेंसिटिव सेक्टर्स टैरिफ कंसेशन से बाहर
हालांकि, भारत ने अपने कुछ सेंसिटिव सेक्टर्स को टैरिफ कंसेशन (Tariff Concessions) से बाहर रखा है। इनमें डेयरी (Dairy) और कुछ एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स (Agricultural Products) जैसे मटर, प्याज, चना, बादाम और चीनी शामिल हैं। दूसरी तरफ न्यूजीलैंड के कीवीफ्रूट (Kiwifruit) और हनी सेक्टर को भारत में ज्यादा मार्केट एक्सेस (Market Access) मिल सकता है। समझौते में इंडियन प्रोफेशनल और स्टूडेंट्स के लिए भी प्रावधान हैं। इसमें 5,000 टेंपरॉरी एम्पलॉयमेंट एंट्री विजास (Employment Entry Visas) का डेडिकेटेड कोटा (Dedicated Quota) और पोस्ट-स्टडी वर्क पाथवेज (Post-Study Work Pathways) को बढ़ाने की व्यवस्था शामिल है।
20 अक्टूबर से समझौता लागू
इस समझौते पर दोनों देशों के बीच बातचीत मार्च 2025 में शुरू हुई थी और 22 दिसंबर 2025 को नेगोसिएशन (Negotiations) पूरी हुईं। इसके बाद 27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में FTA पर हस्ताक्षर किए गए। न्यूजीलैंड की संसद ने 16 सितंबर को संबंधित कानून को मंजूरी दी, जिसके बाद 21 सितंबर को वेलिंगटन में अनुसमर्थन दस्तावेज (Wellington में Ratification Documents) का आदान-प्रदान हुआ। अब 20 अक्टूबर, यानी विजय दशमी के दिन, यह समझौता औपचारिक रूप से लागू हो जाएगा। पीयूष गोयल ने कहा है कि सरकार की प्राथमिकता FTA के प्रावधानों को कारोबार और लोगों के लिए वास्तविक फायदे में बदलना है।
SOURCE : LIVE HINDUSTAN




