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2014 में रिटायरमेंट…फिर भी नहीं मिली पेंशन! 12 साल बाद आया ये बड़ा आदेश

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • हैदराबाद के NIMS के रिटायर्ड प्रोफेशर डॉ
  • मंथा श्रीनिवास को वॉलंट्री रिटायरमेंट के करीब 12 साल बाद भी पेंशनरी बेनिफिट्स नहीं मिले थे
  • मामले में तेलंगाना ह्यूमन राइट कमीशन ने हस्तक्षेप करते हुए NIMS डायरेक्टर को बकाया पेंशन बेनिफिट तय कराकर 3 हफ्ते के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है

तेलंगाना के एक रिटायर्ड प्रोफेसर को अपनी पेंशन और रिटायरमेंट बेनिफिट के लिए करीब 12 साल तक इंतजार करना पड़ा। लंबे समय तक भुगतान नहीं होने के बाद मामला TGHRC (Telangana Human Rights Commission) तक पहुंचा। आयोग ने अब हैदराबाद के NIMS (Nizam’s Institute of Medical Sciences) को प्रोफेसर के बकाया पेंशनरी बेनिफिट (Pensionary Benefits) का निपटारा करने के लिए तीन हफ्ते की समयसीमा दी है। आइए इस मामले को जरा विस्तार से समझते हैं।

मामला NIMS के पूर्व प्रोफेसर ऑफ अनेस्थिसियोलॉजी डॉ. मंथा श्रीनिवास से जुड़ा है। उन्होंने 13 नवंबर 2014 को वॉलंट्री रिटायरमेंट लिया था। इसके बाद उन्हें मिलने वाले पेंशन और अन्य रिटायरमेंट बेनिफिट का मामला लंबे समय तक लंबित रहा। TGHRC ने 5 अक्टूबर 2026 को इस मामले में अपना आदेश जारी किया। प्रोफेसर ने भुगतान में देरी को लेकर आयोग से शिकायत की थी।

सरकार के आदेश के बाद भी नहीं मिला भुगतान

आयोग की कार्यवाही के मुताबिक, तेलंगाना सरकार ने अक्टूबर 2023 में ही NIMS को प्रोफेसर के पेंशनरी बेनिफिट जारी करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद भुगतान नहीं हो सका। मामला अलग-अलग कमेटीज और प्रॉसेस से गुजरता रहा और रिटायर्ड प्रोफेसर को अपने हक की राशि के लिए इंतजार करना पड़ा।

TGHRC ने इस लंबी देरी को गंभीरता से लिया। आयोग ने माना कि रिटायरमेंट बेनिफिट किसी कर्मचारी के सालों के सर्विस से जुड़े अधिकार हैं और नौकरी खत्म होने के बाद यही राशि व्यक्ति की आर्थिक सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में पेंशन से जुड़े भुगतान को वर्षों तक लंबित रखना रिटायर्ड कर्मचारी के लिए बड़ी परेशानी पैदा कर सकता है।

NIMS डायरेक्टर को मामला देखने का निर्देश

तेलंगाना ह्युमन राइट कमीशन (Telangana Human Rights Commission) ने NIMS डायरेक्टर को निर्देश दिया है कि वह खुद इस मामले को देखें और डॉ. श्रीनिवास को मिलने वाले पेंशनरी बेनिफिट की राशि तय कराकर उसका भुगतान तीन हफ्ते के भीतर सुनिश्चित करें। NIMS को आयोग के सामने कम्पलॉयंस रिपोर्ट भी जमा करनी होगी।

इस मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को होगी। आयोग ने यह भी कहा है कि अगर उसके निर्देश का पालन नहीं किया गया तो NIMS डायरेक्टर को खुद आयोग के सामने पेश होकर देरी की वजह बतानी पड़ सकती है।

हर पेंशन केस पर लागू नहीं होगी ये समयसीमा

हालांकि, आयोग की तीन हफ्ते में भुगतान करने की यह समयसीमा सिर्फ इसी मामले के लिए है। इसे सभी पेंशन क्लेम्स के लिए लागू होने वाला सामान्य नियम नहीं माना जा सकता। फिर भी यह मामला दिखाता है कि रिटायरमेंट बेनिफिट के भुगतान में देरी से किसी रिटायर्ड कर्मचारी को कितनी लंबी परेशानी झेलनी पड़ सकती है।

ऐसे मामलों में रिटायर के लिए जरूरी है कि वे रिटायरमेंट एप्लीकेशन, पेंशन डॉक्युमेंट्स, एक्नॉलेजमेंट, विभागीय पत्राचार और सरकारी आदेशों की कॉपिज सुरक्षित रखें। अगर पेंशन का भुगतान अटक जाए तो लिखित रूप में अपनी क्लेम स्टेटस की जानकारी लेना भी उपयोगी हो सकता है। NIMS का यह मामला यह भी बताता है कि सरकारी आदेश जारी होने के बाद भी भुगतान में देरी हो सकती है, इसलिए सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स और करेसपॉन्डेंस संभालकर रखना महत्वपूर्ण है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN