Home rss business hindi 25 साल में पहली बार! शेयर बाजार में लगातार 8वीं साप्ताहिक गिरावट,...

25 साल में पहली बार! शेयर बाजार में लगातार 8वीं साप्ताहिक गिरावट, Nifty 26,373 के हाई से 15% नीचे

5
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • Nifty 50 लगातार 8वें हफ्ते गिरावट की ओर बढ़ रहा है, जो 25 साल में सबसे लंबी गिरावट (लूजिंग स्ट्रीक) है
  • पिछले करीब 9 हफ्तों में इंडेक्स 2,149 अंक और लगभग 8.7% गिर चुका है
  • Nifty अपने 26,373 के रिकॉर्ड हाई से करीब 15% नीचे है
  • आइए इसका कारण जानते हैं

भारतीय शेयर बाजार के लिए अक्टूबर की शुरुआत चुनौतीपूर्ण माहौल में हुई है। Nifty 50 लगातार 8वें हफ्ते गिरावट के साथ बंद होने की ओर बढ़ रहा है। यह 25 साल में लगातार गिरावट का सबसे लंबा दौर है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, अमेरिका में ऊंची बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव ने बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव बढ़ाया है। इस दौरान Nifty अपने जनवरी के रिकॉर्ड हाई 26,373 से करीब 15% नीचे आ चुका है। अगर गिरावट 20% तक पहुंचती है, तो बाजार को टेक्निकल रूप से बियर मार्केट (Bear Market) में माना जाएगा।

इस हफ्ते Nifty में 3% से ज्यादा की गिरावट आई है। पिछले करीब 9 हफ्तों में इंडेक्स लगभग 8.7% यानी 2,149 अंक टूट चुका है। लगातार साप्ताहिक गिरावट का यह सिलसिला 2001 के बाद सबसे लंबा है, जब Nifty लगातार 9 हफ्ते गिरा था। इससे पहले 1993 में Index में लगातार 10 हफ्तों तक गिरावट देखने को मिली थी। सितंबर में भी Nifty करीब 6.1% गिरा, जिससे लगातार दूसरे महीने बाजार नुकसान में रहा।

बाजार की कमजोरी कितनी व्यापक है?

कमजोरी केवल Nifty तक सीमित नहीं है। ICICI सिक्योरिटीज के मुताबिक Nifty 500 में करीब 81% शेयर अपने 50-डे सिंपल मूविंग एवरेज से नीचे कारोबार कर रहे हैं। इसका मतलब है कि बाजार में गिरावट व्यापक स्तर पर दिखाई दे रही है। हालांकि, इंडेक्स अब एक महत्वपूर्ण टेक्निकल सपोर्ट जोन (Technical Support Zone) के करीब पहुंच चुका है। ब्रोकरेज के अनुसार 22,400 के आसपास 200-वीक वीकली एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज और फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट (Fibonacci Retracement) जैसे कई टेक्निकल संकेत एक साथ सपोर्ट दे रहे हैं।

ICICI सिक्योरिटीज के मुताबिक पिछले दो सालों में सितंबर 2024 और जनवरी 2026 में भी बड़ी गिरावट आई थी, लेकिन बाद में बाजार ने रिकवरी की थी। मौजूदा गिरावट उस तरह का तीसरा करेक्शन हो सकता है। हालांकि, तेजी की स्थिति मजबूत होने के लिए Nifty को 23,080 के स्तर के ऊपर वापस जाकर टिकना जरूरी माना जा रहा है। पिछले सात हफ्तों में Index इस स्तर को पार नहीं कर पाया है।

FII सेलिंग और US बॉन्ड यील्ड बना दबाव

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स (Geojit Investments) के चीफ इंवेस्टमेंट स्ट्रेटजिस्ट डॉ. वीके विजय कुमार के मुताबिक, सितंबर में FIIs ने एक्सचेंज के जरिए भारतीय शेयरों में करीब ₹45,536 करोड़ की बिकवाली की। हालांकि, प्राइमरी मार्केट में उन्होंने करीब ₹9,676 करोड़ का निवेश किया। पिछले दो कारोबारी दिनों में ही FII बिकवाली करीब ₹20,128 करोड़ रही। इसी बीच US 10-ईयर ट्रेजरी यील्ड करीब 5.3% तक पहुंच गई है, जिससे एमर्जिंग मार्केट (Emerging Markets) की इक्विटी (Equity) में निवेश का आकर्षण प्रभावित हो सकता है।

क्रूड ऑयल और US-ईरान तनाव पर नजर

बाजार की दिशा आगे कच्चे तेल और US-ईरान तनाव से भी प्रभावित हो सकती है। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) फिलहाल $100 प्रति बैरल से नीचे करीब 98 डॉलर पर है, जबकि WTI करीब $90 के आसपास है। हालांकि, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) से जुड़े किसी भी नए तनाव से तेल की कीमतों में फिर तेजी आ सकती है। दूसरी ओर, घरेलू अर्थव्यवस्था में क्रेडिट ग्रोथ (Credit Growth) 18% से ऊपर और इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (Industrial Production) मजबूत रहने से कुछ सकारात्मक संकेत भी मौजूद हैं। टेक्निकल लेवल पर 22,400 अहम सपोर्ट माना जा रहा है। इसके नीचे कमजोरी बढ़ने पर 22,200–22,000 का जोन देखा जा सकता है, जबकि 22,600–22,800 तत्काल रेजिस्टेंस जोन (Resistance Zone) बन गया है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN