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वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही अप्रत्यक्ष वार्ताओं के बीच एक मसौदा समझौता सामने आया है। ईरानी मीडिया के अनुसार, प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका क्षेत्र से अपनी सैन्य उपस्थिति कम करने पर विचार कर रहा है, जबकि होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों का आवागमन युद्ध पूर्व स्तर पर बहाल किया जाएगा।
Iran US War Update: वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही अप्रत्यक्ष वार्ताओं के बीच एक महत्वपूर्ण मसौदा समझौता सामने आया है। ईरानी मीडिया के अनुसार, प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका क्षेत्र से अपनी सैन्य उपस्थिति कम करने पर विचार कर रहा है, जबकि होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों का आवागमन युद्ध पूर्व स्तर पर बहाल किया जाएगा। ईरानी सरकारी टेलीविजन की रिपोर्ट में कहा गया है कि समझौता ज्ञापन के अंतर्गत 30 दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट से व्यापारिक जहाजों का सामान्य आवागमन बहाल हो जाएगा। इसके बदले अमेरिका ईरान के आसपास अपनी सैन्य तैनाती घटाएगा और ईरान द्वारा लगाई जा रही रोक को हटाएगा। यह घटनाक्रम इस साल की शुरुआत में अमेरिका-ईरान-इजराइल संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत का नतीजा माना जा रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट: समझौते का केंद्रबिंदु
बता दें कि विश्व के कुल तेल निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से गुजरता है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) खुद को इस रणनीतिक मार्ग की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदार संस्था बताती है। ईरानी मीडिया (IRIB) के अनुसार, पिछले 24 घंटों में आईआरजीसी के समन्वय से 23 वाणिज्यिक जहाज हरमुज स्ट्रेट से गुजरे हैं। एक दिन पहले 25 जहाज गुजरने का दावा किया गया था।
ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि कुछ शर्तों के साथ लचीलापन दिखाया गया है, लेकिन पूर्ण बहाली से इनकार कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘शत्रु देशों’ से जुड़े जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकारी मीडिया के हवाले से पता चला है कि ओमान के सहयोग से जहाजों के आवागमन का प्रबंधन करने का प्रस्ताव है, हालांकि इसमें सैन्य जहाज शामिल नहीं होंगे। तेहरान ने जोर देकर कहा है कि बिना ठोस सत्यापन के कोई भी समझौता लागू नहीं किया जाएगा।
अमेरिकी सैन्य वापसी पर चर्चा जारी
ईरान की मिजान न्यूज एजेंसी के अनुसार, अमेरिकी सैन्य वापसी के दायरे को लेकर अभी बातचीत चल रही है। यह स्पष्ट नहीं है कि वाशिंगटन केवल हालिया संघर्ष के दौरान तैनात अतिरिक्त बलों को हटाएगा या क्षेत्र में अपने दीर्घकालिक ठिकानों से भी सैनिकों की संख्या घटाएगा। मसौदा समझौते में यह प्रावधान भी शामिल है कि यदि 60 दिनों के अंदर अंतिम समझौता हो जाता है, तो इसे बाद में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बाध्यकारी प्रस्ताव के रूप में अपनाया जा सकता है।
108 जहाजों के बदले रास्ते, तनाव बरकरार
इधर, अमेरिकी सेना ने बताया कि ईरानी बंदरगाहों और संबंधित ठिकानों पर लगाई गई अपनी नौसैनिक नाकेबंदी के कारण अब तक 108 वाणिज्यिक जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि नाकेबंदी अभी भी प्रभावी है, भले ही दोनों देशों के बीच राजनयिक प्रयास जारी हों। यह अभियान ट्रंप द्वारा ईरान के साथ युद्धविराम घोषित करने के एक सप्ताह से भी कम समय में शुरू किया गया था। इसके बाद दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं।
ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक अभियान को अवैध और युद्धविराम का उल्लंघन बताते हुए निंदा की है। जवाब में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के इलाकों में अपनी पाबंदियां बढ़ा दी हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान इस बात पर अड़ा हुआ है कि सभी वाणिज्यिक जहाजों को पहले ईरानी सैन्य अधिकारियों से मंजूरी लेनी होगी। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि हाल के दिनों में दर्जनों जहाजों ने आईआरजीसी के साथ समन्वय कर मार्ग तय किया है, हालांकि स्वतंत्र स्रोतों से इसकी पुष्टि करना मुश्किल है। वहीं, ईरान ने जहाजों से टोल वसूलने के आरोपों से इनकार किया है और पड़ोसी ओमान के साथ मिलकर शिपिंग, पर्यावरण संरक्षण तथा सुरक्षा की निगरानी के लिए नया समुद्री समन्वय प्रणाली विकसित करने की बात कही है।
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