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30 की उम्र में अपनाएं ये आदतें, 70 तक रहेंगे हेल्दी

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Source :- BBC INDIA

सेहत

रोज़ 15 मिनट तेज़ चलने से लेकर नियमित समय पर सोने तक, 30 की उम्र से अपनाई गईं कुछ आदतें आपको 70 की उम्र के बाद भी फ़िट रहने में मदद कर सकती हैं.

जब आप जीवन के आठवें दशक यानी 70 की उम्र में पहुंचेंगे, तो शायद जवानी के मुक़ाबले शरीर में ज़्यादा कमज़ोरी और अकड़न महसूस हो. हो सकता है कि सोचने और समझने की क्षमता भी पहले जैसी तेज़ न रहे.

आपके सोने का तरीक़ा भी बदल सकता है. शाम को जल्दी नींद आने लगे और सुबह भी जल्दी आंख खुल जाए. सबसे बड़ी चिंता यह है कि आबादी के औसत आंकड़ों के मुताबिक़, उस उम्र में आप कम से कम एक लंबे समय तक चलने वाली बीमारी का सामना कर रहे होंगे.

लेकिन उम्र बढ़ने पर ऐसा होना तय नहीं है. शोधकर्ताओं को अब पहले से कहीं ज़्यादा भरोसा है कि इसे बदला जा सकता है.

रिसर्च में क्या सामने आया है?

जानकारों का कहना है कि 65 से 70 साल की उम्र तक अधिक दिक्कत नहीं आती लेकिन इसके बाद बुढ़ापे से जुड़ी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं.

कैलिफ़ोर्निया के बक इंस्टीट्यूट फ़ॉर रिसर्च ऑन एजिंग के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी एरिक वर्डिन कहते हैं, “अब तक हमें जो जानकारी मिली है, उसके आधार पर कहा जा सकता है कि अगर लोग अपनी जीवनशैली को बेहतर बनाएं, तो उनमें से ज़्यादातर 90 या 95 साल की उम्र तक अच्छी सेहत के साथ जी सकते हैं.”

“लेकिन अभी हम इससे बहुत दूर हैं. ज़्यादातर लोग 65 या 70 साल तक स्वस्थ रहते हैं. इसके बाद वे बीमार होने लगते हैं और उन्हें बुढ़ापे से जुड़ी तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता है.”

वर्डिन कहते हैं कि किसी भी उम्र में सेहत सुधारने के लिए देर नहीं होती. ज़्यादा कसरत, बेहतर खान-पान और शराब कम करने जैसे जीवनशैली से जुड़े बदलाव किसी भी उम्र में फ़ायदा पहुंचा सकते हैं.

हालांकि, जितनी जल्दी शुरुआत की जाए, नतीजे उतने ही बेहतर हो सकते हैं.

शोधकर्ताओं के मुताबिक़, 30 से 39 साल की उम्र इस मामले में ख़ास है. इसी दौरान शरीर की कई प्रणालियों में उम्र से जुड़े शुरुआती और हल्के बदलाव दिखाई देने लगते हैं.

इनमें मांसपेशियों का आकार और ताक़त, हड्डियों की मज़बूती और शरीर के भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया शामिल है.

अमेरिका के मिनेसोटा में मेयो क्लिनिक के कोगोड सेंटर ऑन एजिंग में शरीर विज्ञान के प्रोफ़ेसर जोआओ पासोस कहते हैं, “यह उम्र ऐसा अहम मौक़ा है, जब हमें उन आदतों को और मज़बूत करना चाहिए जो शरीर को लंबे समय तक मज़बूत बनाए रखती हैं.”

30 की उम्र में शरीर को कितना मज़बूत बनाना चाहिए?

अगर आपको कसरत की आदत पड़ जाए तो ये जीवन भर आपके साथ रहती.

उम्र बढ़ने के बावजूद शरीर को स्वस्थ रखना कितना संभव है, यह समझने के लिए शोधकर्ता अक्सर ऐसे लोगों पर ध्यान देते हैं जिनकी उम्र बढ़ने का तरीक़ा आम लोगों से अलग होता है.

ऐसा ही एक समूह ‘मास्टर्स एथलीट्स’ का है. ये 35 साल से ज़्यादा उम्र के ऐसे लोग हैं, जो दौड़, साइकिलिंग या दूसरे खेलों की प्रतियोगिताओं में नियमित रूप से हिस्सा लेते हैं. इनमें से कई लोग 60 साल की उम्र और उसके बाद भी खेलते रहते हैं.

मैनचेस्टर मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी में पोषण और शरीर में भोजन से ऊर्जा बनने की प्रक्रिया पढ़ाने वाले वरिष्ठ लेक्चरर पॉल मॉर्गन कहते हैं कि इन खिलाड़ियों की उम्र बढ़ने का तरीक़ा हममें से ज़्यादातर लोगों से काफ़ी अलग होता है.

उनके दिल और फेफड़ों की काम करने की क्षमता, मांसपेशियों की ताक़त और उनके काम करने की क्षमता पहले काफ़ी ऊंचे स्तर पर पहुंचती है. इसके बाद इनमें गिरावट भी देर से शुरू होती है.

मॉर्गन के मुताबिक़, इस वजह से इनमें से कई लोग बढ़ती उम्र में लंबे समय तक चलने-फिरने की क्षमता और अपनी आज़ादी बनाए रखते हैं.

वह कहते हैं, “उनके शरीर में यह अतिरिक्त क्षमता होती है, जो जीवन के बीच के वर्षों में सुरक्षा की दीवार की तरह काम करती है.”

इससे हम सभी सीख सकते हैं.

’30 से 39 तक शरीर को बेहतर क्षमता में पहुंचाएं’

मॉर्गन कहते हैं कि अगर हम बढ़ती उम्र में स्वस्थ रहना चाहते हैं, तो 30 से 39 साल की उम्र के बीच शरीर को उसकी सबसे बेहतर क्षमता तक पहुंचाने की कोशिश करनी चाहिए.

ख़ास तौर पर हमें शरीर की ऑक्सीजन इस्तेमाल करने की क्षमता, शरीर के लचीलेपन और मांसपेशियों की ताक़त पर ध्यान देना चाहिए.

शरीर की ऑक्सीजन इस्तेमाल करने की क्षमता का मतलब है कि कसरत करते समय आपका शरीर ज़्यादा से ज़्यादा कितनी ऑक्सीजन का इस्तेमाल कर सकता है.

70 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों के सामने सबसे बड़े ख़तरों में से एक ठोकर खाकर गिरना है. इसका संबंध शरीर की फुर्ती कम होने और जोड़ों के हिलने-डुलने की क्षमता घटने से है.

मॉर्गन कहते हैं, “मुझे हमेशा लगता है कि चलने-फिरने में मदद करने वाली पैरों की मांसपेशियों की बढ़ती उम्र में अपनी आज़ादी और अच्छी सेहत बनाए रखने में सबसे बड़ी भूमिका होती है.”

“इसलिए इन मांसपेशियों पर ख़ास ध्यान देना ज़रूरी है.” खेलना इसे हासिल करने का एक बेहतरीन तरीक़ा है.

शोध में सामने आया है कि टेनिस या बैडमिंटन जैसे रैकेट से खेले जाने वाले खेलों में हिस्सा लेने और लंबी उम्र के बीच लगातार संबंध दिखाई दिया है.

साल 2025 में जापान में हुए एक अध्ययन में साइकिल चलाने के फ़ायदों का भी पता चला. नियमित रूप से साइकिल चलाने वाले बुज़ुर्गों को लंबे समय तक देखभाल की ज़रूरत पड़ने या समय से पहले मौत होने की आशंका कम पाई गई.

हर हफ़्ते 75 मिनट से ज़्यादा दौड़ने से भी उम्र बढ़ने की प्रक्रिया के कुछ हिस्सों को धीमा करने में मदद मिलती है.

लेकिन मैराथन दौड़ने के बारे में शायद दोबारा सोचने की ज़रूरत है.

कुछ प्रमाण बताते हैं कि शरीर को उसकी हद से ज़्यादा धकेलने पर जैविक रूप से उम्र बढ़ने की प्रक्रिया के कुछ हिस्से तेज़ हो सकते हैं. हालांकि, इसके बारे में अभी बहुत कम जानकारी है.

दूसरी ओर, एक अध्ययन में पाया गया कि रोज़ केवल पांच मिनट की हल्की से तेज़ कसरत भी दिमाग़ की उम्र बढ़ने की रफ़्तार को धीमा करने में मदद कर सकती है.

अमेरिका की पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी में मेडिसिन की असिस्टेंट प्रोफ़ेसर अदिति गुरकर कहती हैं कि हम सभी कुछ आसान तरीक़े अपनाकर बढ़ती उम्र में स्वस्थ रहने के फ़ायदे पा सकते हैं.

वह कहती हैं, “खाना खाने के बाद केवल 15 मिनट तेज़ चलने से भी काफ़ी फ़र्क़ पड़ सकता है.”

दिमाग़ की क्षमता कैसे बचाकर रखें?

जिस तरह हम 30 की उम्र में अपनी मांसपेशियों और दिल की सेहत को सुरक्षित और मज़बूत बना सकते हैं, उसी तरह दिमाग़ को भी मज़बूत बनाया जा सकता है.

दांतों की अच्छी सेहत बनाए रखने से हैरान करने वाला फ़र्क़ पड़ सकता है. इसके लिए दांतों की नियमित जांच कराना, सही तरीक़े से ब्रश करना, धूम्रपान न करना और मीठी चीज़ें कम खाना ज़रूरी है.

कई अध्ययनों में बार-बार मसूड़ों की बीमारी और बढ़ती उम्र में सोचने-समझने की क्षमता कम होने के बीच संबंध पाया गया है.

मसूड़ों की इस बीमारी को ‘पेरियोडोंटल डिज़ीज़’ कहा जाता है. इसमें मसूड़ों में सूजन बढ़ जाती है.

माना जाता है कि शरीर में लंबे समय तक रहने वाली सूजन का दिमाग़ पर असर पड़ता है. इसी वजह से मसूड़ों की बीमारी और सोचने-समझने की क्षमता घटने के बीच संबंध हो सकता है.

30 से 39 साल की उम्र शराब कम करने की शुरुआत के लिए भी सही समय हो सकती है.

शराब और सेहत का क्या संबंध है?

शराब पीने का संबंध शरीर में जीन के काम करने के तरीक़े में बदलाव से है. ये बदलाव उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज़ करते हैं. शराब नींद में भी बड़ी रुकावट बनती है.

वर्डिन कहते हैं कि रोज़ लगभग एक ही समय पर सोना और जागना ज़रूरी है. इससे आने वाले वर्षों में उम्र के साथ दिमाग़ का आकार घटने और डिमेंशिया होने का ख़तरा कम किया जा सकता है.

रोज़ तय समय पर सोने और जागने को नींद की नियमितता कहा जाता है.

नींद के दौरान शरीर अपनी कोशिकाओं की मरम्मत पर ध्यान देता है. अच्छी नींद से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए ऊर्जा और प्रेरणा भी मिलती है.

वर्डिन कहते हैं, “अगर आप केवल एक रात भी पूरी नींद नहीं लेते हैं, तो शरीर के भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया बदल जाती है. इसके साथ आपको स्वस्थ रखने वाले काम करने की आपकी इच्छाशक्ति भी कम हो जाती है.”

नियमित समय पर सोना इतना ज़रूरी है कि वर्डिन अब हर रात अलार्म लगाते हैं. यह अलार्म उन्हें जगाने के लिए नहीं, बल्कि सोने का समय याद दिलाने के लिए होता है.

वह कहते हैं, “इसकी वजह यह है कि हमारा शरीर दिन और रात के तय चक्र के मुताबिक़ काम करता है.”

“जीन के काम करने के तरीक़े से लेकर भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया तक, हमारा पूरा शरीर 24 घंटे के चक्र के साथ तालमेल में रहता है.”

“इसलिए मैं लोगों से कहता हूं कि हर दिन एक ही समय पर सोने से शरीर को इस पूरे चक्र के साथ सही तालमेल बनाए रखने में मदद मिलती है.”

हालांकि, हर रात अच्छी नींद लेना हमेशा संभव नहीं होता. 30 से 39 साल की उम्र में छोटे बच्चों की परवरिश करने वाला कोई भी व्यक्ति यह बात जानता होगा.

खाने की आदतों में क्या बदलाव करें?

संतुलित भोजन

30 से 39 साल की उम्र पोषण और खान-पान को थोड़ा ज़्यादा गंभीरता से लेने का भी अच्छा समय हो सकती है.

वर्डिन कहते हैं कि हम अपने शरीर के लिए जो सबसे अच्छे काम कर सकते हैं, उनमें दिन के दौरान उसे कुछ ऐसा समय देना भी शामिल है, जब हम कुछ न खा रहे हों.

ऐसा इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग यानी कुछ घंटों तक लगातार खाना न खाकर किया जा सकता है.

इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग की सलाह देने वाले कई लोग 16:8 का तरीक़ा अपनाने को कहते हैं. इसमें दिन के 16 घंटे कुछ नहीं खाया जाता और बाकी आठ घंटों के दौरान ही खाना खाया जाता है.

लेकिन वर्डिन कहते हैं कि इससे आसान 12:12 का तरीक़ा अपनाकर भी काफ़ी फ़ायदे हासिल किए जा सकते हैं.

इसमें 12 घंटे खाना खाया जा सकता है और अगले 12 घंटे कुछ नहीं खाया जाता.

वह कहते हैं, “जब आप कुछ नहीं खाते हैं, तो आपका शरीर खाना पचाने के बजाय अपनी मरम्मत पर ध्यान दे सकता है.”

“मैं लोगों से कहता हूं कि जब आप खाना खाते हैं, तब शरीर कुछ बना रहा होता है. जब आप कुछ नहीं खाते, तब शरीर अपनी मरम्मत कर रहा होता है.”

बहुत ज़्यादा प्रोसेस किए गए खाने की जगह ज़्यादा फल और सब्ज़ियां खाने से भी फ़र्क़ पड़ सकता है.

अदिति गुरकर अपने और दूसरे शोधकर्ताओं के किए काम का ज़िक्र करती हैं. इसमें सामने आया कि खाने से ज़्यादा मात्रा में कैरोटेनॉइड लेने वाले लोगों में उम्र बढ़ने की रफ़्तार धीमी होती है.

कैरोटेनॉइड पौधों में पाए जाने वाले रासायनिक तत्व हैं. ये शकरकंद और गाजर जैसी सब्ज़ियों के साथ आम और ख़ुबानी जैसे फलों में पाए जाते हैं.

हो सकता है कि उम्र बढ़ने की रफ़्तार कम होने की वजह यह हो कि ये तत्व हमारी कोशिकाओं को ‘ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस’ नाम के नुक़सान से बचाने में भूमिका निभाते हैं.

30 की उम्र की आदतों का असर कब तक रहता है?

कुल मिलाकर पासोस मानते हैं कि जवानी के शुरुआती वर्षों में लिए गए फ़ैसलों का हमारे उम्र बढ़ने के तरीक़े पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है.

वह अमेरिका में हुए कुछ बड़े अध्ययनों का उदाहरण देते हैं, जिनमें कई दशकों तक हज़ारों लोगों पर नज़र रखी गई.

इनमें फ़्रामिंघम हार्ट स्टडी और नर्सेज़ हेल्थ स्टडी शामिल हैं.

इन अध्ययनों से पता चला कि जीवन के बीच के वर्षों में बेहतर जीवनशैली अपनाने वाले लोगों में कई दशक बाद भी दिल से जुड़ी बीमारियों, सोचने-समझने की क्षमता में गिरावट और शारीरिक कमज़ोरी का ख़तरा कम होता है.

पासोस कहते हैं, “30 से 39 साल की उम्र में स्वस्थ आदतें अपनाकर हम शरीर के अणुओं और कोशिकाओं में होने वाले छोटे बदलावों को रोक सकते हैं या उनकी रफ़्तार कम कर सकते हैं.”

“अगर इन बदलावों को रोका न जाए, तो ये समय के साथ बढ़ते जाते हैं और 70 की उम्र में शरीर की काम करने की क्षमता घटने की वजह बनते हैं.”

“मैं नहीं मानता कि ऐसा करके हम उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को रोक सकते हैं. लेकिन हम यह ज़रूर तय कर सकते हैं कि उम्र बढ़ने का हमारे शरीर पर किस तरह असर पड़ेगा.”

30 से 39 साल की उम्र में आपको शायद लगे कि आपके शरीर को कुछ नहीं हो सकता. लेकिन उम्र बढ़ने की घड़ी लगातार चलती रहती है और आख़िरकार इसका असर हम सभी पर पड़ता है.

अगर आप बहुत ज़्यादा शराब पीना छोड़ दें, कोई ऐसा खेल चुनें जिसे बढ़ती उम्र तक खेल सकें, नियमित समय पर सोने की आदत बनाएं और शरीर को लगातार खाना पचाने के बीच कुछ समय का आराम दें, तो आने वाले वर्षों में आपका दिल, मांसपेशियां, जोड़ और दिमाग़ इसके लिए आपका शुक्रिया अदा करेंगे.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS